
आधुनिकता और विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच श्रीगंगानगर जिले के धर्म सिंह वाला गांव के पास स्थित ‘अपना नगर’ कॉलोनी आज भी विकास की मुख्यधारा से कोसों दूर है। बिजली, पानी और पक्की सड़कों जैसी अत्यंत आवश्यक मूलभूत सुविधाओं से वंचित इस कॉलोनी के निवासियों का सब्र का बांध आखिरकार टूट गया है। अपनी जायज मांगों और बदहाल स्थिति को लेकर ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और स्थानीय नगर निकाय के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन करते हुए भारी आक्रोश व्यक्त किया। ग्रामीणों का आरोप है कि दर्जनों बार प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को गुहार लगाने के बावजूद आज तक उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं आया है, जिससे वे अपने ही देश में दोयम दर्जे के नागरिकों जैसा जीवन जीने को मजबूर हैं।
12 साल का लंबा इंतजार, पर ढाक के तीन पात
‘अपना नगर’ कॉलोनी के निवासियों ने अपनी व्यथा बताते हुए कहा कि इस कॉलोनी को बसे हुए लगभग 12 साल से अधिक का समय बीत चुका है। वर्तमान में यहाँ करीब 100 से अधिक परिवार निवास कर रहे हैं। इतने लंबे समय के बाद भी विडंबना यह है कि इस पूरी कॉलोनी में आज तक न तो बिजली के खंभे लगे हैं और न ही घरेलू बिजली के कनेक्शन दिए गए हैं। डिजिटल इंडिया के इस युग में भी यहाँ के बच्चे ढिबरी या मोमबत्ती की रोशनी में पढ़ने को मजबूर हैं।
बिजली न होने के कारण गर्मियों में स्थिति और भी भयावह हो जाती है। इसके साथ ही कॉलोनी में पक्की सड़कों और नालियों का निर्माण न होने से हर तरफ गंदगी का साम्राज्य है। थोड़ी सी बारिश होते ही पूरी कॉलोनी जलमग्न हो जाती है, जिससे संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा हमेशा बना रहता है।
भीषण गर्मी में बूंद-बूंद पानी को तरसते कंठ: टैंकर माफियाओं की चांदी
कॉलोनी की सबसे बड़ी और संवेदनशील समस्या पीने के साफ पानी की अनुपलब्धता है। ‘अपना नगर’ में जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) द्वारा पानी की पाइपलाइन बिछाना तो दूर, सार्वजनिक हैंडपंप तक की व्यवस्था नहीं की गई है। इस समय पूरा श्रीगंगानगर क्षेत्र भीषण गर्मी और लू की चपेट में है, ऐसे में पानी की एक-एक बूंद के लिए हाहाकार मचा हुआ है।
ग्रामीणों ने बताया कि पानी की आवश्यकता को पूरा करने के लिए उन्हें अपनी गाढ़ी कमाई का एक बड़ा हिस्सा निजी वॉटर टैंकरों पर खर्च करना पड़ रहा है। एक सिंगल टैंकर मंगवाने के लिए उन्हें ₹600 से लेकर ₹1000 तक का भुगतान करना पड़ता है। गरीब और मजदूर वर्ग के इन परिवारों के लिए महीने में तीन से चार हजार रुपये केवल पानी पर खर्च करना एक बहुत बड़ा आर्थिक बोझ बन चुका है। जो परिवार टैंकर का खर्च उठाने में सक्षम नहीं हैं, उनकी महिलाएं और बच्चे तपती धूप में कई किलोमीटर दूर से पानी ढोने को मजबूर हैं।
उग्र आंदोलन और चुनाव बहिष्कार की चेतावनी
प्रशासनिक उदासीनता से नाराज ग्रामीणों ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि अब वे और अधिक खोखले आश्वासनों के झांसे में नहीं आने वाले हैं। प्रदर्शन के दौरान महिलाओं ने खाली बर्तनों को पीटकर सरकार के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया।
ग्रामीणों के मुख्य संगठन ने घोषणा की है कि यदि अगले 15 दिनों के भीतर बिजली के पोल लगाने और पेयजल आपूर्ति के लिए पाइपलाइन बिछाने का काम धरातल पर शुरू नहीं किया गया, तो वे जिला कलेक्ट्रेट के सामने अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ जाएंगे। इसके साथ ही, कॉलोनी वासियों ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास किया है कि यदि उनकी समस्याओं का जल्द समाधान नहीं हुआ, तो वे आगामी सभी स्थानीय व निकाय चुनावों का पूर्ण रूप से बहिष्कार करेंगे और किसी भी राजनीतिक नेता को कॉलोनी में कदम नहीं रखने देंगे।