
भूमिका: राहत की ओर बढ़ते कदम रेगिस्तानी इलाकों के लिए जीवनदायिनी मानी जाने वाली इंदिरा गांधी नहर परियोजना (IGNP) में हर साल होने वाली वार्षिक नहर बंदी की अवधि अब समाप्त हो चुकी है। इस अवधि के दौरान नहरों की मरम्मत, गाद (मिट्टी) निकालने और सुदृढ़ीकरण का काम युद्धस्तर पर किया गया। नहर बंदी पूरी होने के बाद अब श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़ और आसपास के सीमावर्ती इलाकों में सिंचाई और विशेष रूप से पेयजल के लिए पानी की आपूर्ति को धीरे-धीरे बहाल किया जा रहा है। लंबे समय से पानी की किल्लत और कड़े जल संकट से जूझ रहे इस क्षेत्र के नागरिकों और किसानों के लिए यह खबर किसी बड़ी राहत से कम नहीं है।
जल वितरण रेगुलेशन पर मंथन और विभागीय बैठकें नहर में पानी छोड़े जाने के साथ ही सिंचाई विभाग की चुनौतियां और अधिक बढ़ गई हैं। पानी का प्रवाह सुचारू रूप से बना रहे और किसी भी क्षेत्र में जल भराव या रिसाव (सीपेज) न हो, इसके लिए विभाग के आला अधिकारी लगातार मैराथन बैठकें कर रहे हैं। इन बैठकों का मुख्य एजेंडा “जल वितरण का नया रेगुलेशन” तैयार करना है।
अधिकारियों के सामने सबसे बड़ा काम पानी की उपलब्ध मात्रा के अनुसार अलग-अलग नहरों और माइनरों (शाखाओं) के लिए बारी-बारी से पानी की रोटेशन प्रणाली तय करना है। सिंचाई विभाग के मुख्य अभियंता और जल संसाधन विभाग के अधिकारी जल उपभोक्ता संगम (WUA) के प्रतिनिधियों और किसान नेताओं के साथ भी समन्वय बना रहे हैं, ताकि पानी के वितरण को लेकर किसी प्रकार का विवाद या असंतोष न उपजे।
‘टेल’ (अंतिम छोर) तक पानी पहुंचाना सबसे बड़ी चुनौती नहर बंदी के बाद जब पानी दोबारा छोड़ा जाता है, तो शुरुआती इलाकों (हेड) के लोग पानी का अधिक उपयोग कर लेते हैं, जिससे नहर के अंतिम छोर (टेल) पर स्थित गांवों और खेतों तक पानी बहुत देर से या बेहद कम मात्रा में पहुंचता है। इस बार प्रशासन का पूरा ध्यान इसी समस्या के समाधान पर केंद्रित है।
मुख्य अभियंता का सख्त निर्देश: “सभी अधिशासी और सहायक अभियंताओं को फील्ड में रहने के निर्देश दिए गए हैं। यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि टेल पर बैठे आखिरी किसान के खेत और आखिरी गांव की डिग्गी (जल भंडारण टैंक) तक पानी पूरी क्षमता के साथ पहुंचे।”
इसके लिए विभाग ने संवेदनशील और टेल वाले इलाकों में विशेष निगरानी दल (पैट्रोलिंग टीमें) तैनात की हैं। ये टीमें नहरों की सुरक्षा करेंगी और पानी की चोरी रोकने के लिए रात-दिन गश्त करेंगी।
प्राथमिकता के आधार पर जल का आवंटन चूंकि नहर बंदी के कारण पिछले कुछ हफ्तों से जल भंडारण के स्रोत जैसे कि डिब्बियां, तालाब और वाटर वर्क्स के टैंक सूखने की कगार पर पहुंच गए थे, इसलिए विभाग ने जल आपूर्ति को दो मुख्य चरणों में विभाजित किया है:
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प्रथम प्राथमिकता (पेयजल आपूर्ति): सबसे पहले शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के वाटर वर्क्स (जल प्रदाय योजनाओं) के टैंकों को आकस्मिक रूप से भरा जा रहा है ताकि आम जनता को पीने के साफ पानी के लिए तरसना न पड़े।
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द्वितीय प्राथमिकता (सिंचाई व्यवस्था): पेयजल स्रोतों के सुरक्षित स्तर पर पहुंचने के तुरंत बाद, खरीफ की फसलों (जैसे कपास, ग्वार और नरमा) की बुवाई और सिंचाई के लिए किसानों के खातों (बारी) के अनुसार पानी की सप्लीमेंट्री सप्लाई शुरू की जाएगी।
नहरों की निगरानी और अवैध लिफ्टिंग पर रोक नहर बंदी के बाद सूखी नहरों में जब अचानक तेज गति से पानी आता है, तो कई जगह कमजोर तटबंधों (बैंकों) के टूटने का खतरा बना रहता है। इस खतरे को टालने के लिए बेलदारों और तकनीकी स्टाफ को मुस्तैद किया गया है। इसके साथ ही, नहरों से अवैध रूप से पाइप डालकर या इंजन लगाकर पानी चोरी करने वाले असामाजिक तत्वों के खिलाफ पुलिस बल की मदद से सख्त कार्रवाई की रूपरेखा तैयार की गई है। पानी की हर बूंद का हिसाब रखने के लिए रेगुलेटरों पर गेज (पानी मापने का पैमाना) की कड़ाई से मॉनिटरिंग की जा रही है।
निष्कर्ष इंदिरा गांधी नहर में पानी की बहाली श्रीगंगानगर और समूचे पश्चिमी राजस्थान के सामाजिक और आर्थिक जीवन को दोबारा रफ्तार देने वाली है। सिंचाई विभाग के अधिकारियों की मुस्तैदी, पारदर्शी रेगुलेशन और मुस्तैद निगरानी के दम पर उम्मीद की जा रही है कि आगामी कुछ ही दिनों में हर घर और हर खेत तक पानी पहुंच जाएगा। यदि यह बहाली प्रक्रिया योजनाबद्ध तरीके से पूरी होती है, तो यह आगामी खरीफ सीजन के लिए एक बेहतरीन शुरुआत साबित होगी।