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स्थानीय मंडियों में रबी फसलों की सरकारी खरीद की रफ्तार तेज: व्यवस्थाओं का जायजा लेने पहुंचे प्रशासनिक अधिकारी

भूमिका: मंडियों में रौनक और सरकारी मुस्तैदी वर्तमान रबी सीजन के चरम पर पहुंचते ही जिले की स्थानीय धानमंडियों में कृषि फसलों, मुख्य रूप से गेहूं की सरकारी खरीद की प्रक्रिया पूरी गति और सुचारू रूप से चल रही है। खेतों से सोना उगलने के बाद किसान अपनी गाढ़ी कमाई लेकर मंडियों में पहुंच रहे हैं। राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अन्नदाता को अपनी फसल बेचने में किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। इसके लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीद की पुख्ता व्यवस्था की गई है, जिससे किसानों में संतोष का माहौल है।

प्रशासनिक मुस्तैदी और औचक निरीक्षण खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने और व्यवस्थाओं को चुस्त-दुरुस्त रखने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों, उपखंड अधिकारियों और मंडी सचिवों द्वारा लगातार विभिन्न धानमंडियों का औचक निरीक्षण किया जा रहा है। इन दौरों का मुख्य उद्देश्य धरातल पर चल रही व्यवस्थाओं को परखना है। अधिकारी स्वयं तौल कांटों की शुद्धता, बारदाने की उपलब्धता और लेबर (हम्मालों) की कार्यप्रणाली को देख रहे हैं।

अधिकारियों ने मंडी परिसरों का दौरा कर किसानों और आढ़तियों (व्यापारियों) से सीधा संवाद भी किया। अधिकारियों का स्पष्ट निर्देश है कि यदि किसी भी स्तर पर लापरवाही या किसानों के शोषण की शिकायत मिलती है, तो संबंधित एजेंसी या दोषी कर्मचारी के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

बारदाने की व्यवस्था और उठान की चुनौती फसल खरीद के दौरान अक्सर बारदाने (सिलाई के लिए जूट या प्लास्टिक की बोरियां) की कमी एक बड़ी समस्या बनकर उभरती है, जिससे खरीद कार्य बाधित होता है। इस बार प्रशासन ने पहले से ही कमर कस रखी है। मंडियों में बारदाने की व्यवस्था को पूरी तरह दुरुस्त कर लिया गया है। अधिकारियों ने निर्देश दिए हैं कि स्टॉक की दैनिक निगरानी की जाए ताकि किसी भी मंडी में अचानक कमी न आए।

इसके साथ ही, मंडियों में फसल के ऊंचे अंबार न लगें, इसके लिए खरीदे गए गेहूं के उठाव (लिफ्टिंग) की प्रक्रिया को भी तेज कर दिया गया है। परिवहन ठेकेदारों को पाबंद किया गया है कि वे मंडियों से गोदामों तक फसल की समय पर ढुलाई सुनिश्चित करें, ताकि नई आने वाली फसल के लिए पर्याप्त स्थान उपलब्ध रह सके।

किसानों को समय पर भुगतान: प्राथमिकता में सबसे ऊपर सरकारी खरीद की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य समय पर मिलना है। अतीत में भुगतान में होने वाली देरी किसानों के लिए सिरदर्द रही है, लेकिन इस बार डिजिटल तकनीक के माध्यम से इस प्रक्रिया को बेहद सरल और त्वरित बनाया गया है।

अधिकारियों का संदेश: “किसानों के बैंक खातों को सीधे खरीद पोर्टल से जोड़ा गया है। फसल की तुलाई और जे-फॉर्म (J-Form) कटने के निर्धारित समय के भीतर (अधिकतम 48 से 72 घंटों में) राशि सीधे किसान के खाते में ट्रांसफर (DBT) की जा रही है।”

इस त्वरित भुगतान प्रणाली से किसानों को रबी की फसल बेचकर अगली फसल (खरीफ) की तैयारियों, जैसे बीज, खाद और डीजल की व्यवस्था करने में बड़ी मदद मिल रही है।

मंडियों में मूलभूत सुविधाओं का विस्तार चिलचिलाती धूप और गर्मी के मौसम को देखते हुए प्रशासन ने मंडियों में किसानों और मजदूरों के लिए बुनियादी सुविधाओं को चाक-चौबंद किया है:

  • पेयजल व्यवस्था: मंडियों में ठंडे और स्वच्छ पानी के प्याऊ लगाए गए हैं।

  • छाया की व्यवस्था: टीन शेड और तिरपालों का इंतजाम किया गया है ताकि अनाज और किसान दोनों धूप से सुरक्षित रहें।

  • किसान सहायता डेस्क: किसी भी प्रकार के तकनीकी संशय या शिकायत के निवारण के लिए प्रत्येक मंडी में एक हेल्प डेस्क स्थापित की गई है।

निष्कर्ष जिले की धानमंडियों में चल रही रबी फसल की यह सरकारी खरीद प्रशासन, किसानों और व्यापारियों के बेहतर समन्वय का एक उत्कृष्ट उदाहरण पेश कर रही है। सुचारू खरीद, पर्याप्त बारदाना और पारदर्शी व त्वरित भुगतान के चलते इस बार किसानों को मंडियों के चक्कर नहीं काटने पड़ रहे हैं। यदि आने वाले दिनों में भी उठान और भुगतान की यही रफ्तार बनी रही, तो यह सीजन जिले के किसानों के लिए बेहद समृद्ध और परेशानी मुक्त साबित होगा।

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