
श्रीगंगानगर। उत्तराखंड की प्रसिद्ध चारधाम यात्रा को लेकर सीमावर्ती जिले श्रीगंगानगर और आसपास के क्षेत्र के श्रद्धालुओं में भारी उत्साह देखा जा रहा है। बाबा केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री के दर्शनों की इच्छा रखने वाले स्थानीय यात्रियों की सहूलियत के लिए ऑफलाइन पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) और नए टोकन सिस्टम की प्रक्रिया को पूरी तरह सक्रिय कर दिया गया है। ऑनलाइन स्लॉट फुल होने या तकनीकी दिक्कतों का सामना कर रहे श्रद्धालुओं के लिए यह ऑफलाइन व्यवस्था एक बड़ी राहत बनकर आई है, जिससे अब वे बिना किसी बाधा के अपनी पवित्र यात्रा की योजना बना सकते हैं।
ऑफलाइन पंजीकरण की आवश्यकता और व्यवस्था
हर साल श्रीगंगानगर, सादुलशहर, पदमपुर, और करणपुर सहित पूरे जिले से हजारों की संख्या में श्रद्धालु चारधाम यात्रा के लिए रवाना होते हैं। इस वर्ष यात्रा को लेकर यात्रियों की संख्या में अप्रत्याशित बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिसके कारण आधिकारिक वेबसाइटों पर ऑनलाइन कोटा बहुत जल्द समाप्त हो गया।
श्रद्धालुओं की इसी परेशानी को ध्यान में रखते हुए प्रशासन और चारधाम यात्रा प्रबंधन द्वारा ऑफलाइन पंजीकरण खिड़की को शुरू किया गया है। स्थानीय ट्रेवल एजेंटों और प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, जो यात्री ऑनलाइन माध्यम से अपना स्लॉट बुक नहीं कर पाए थे, वे अब यात्रा मार्ग पर बने आधिकारिक केंद्रों पर जाकर सीधे अपना पंजीकरण करा सकते हैं। इसके लिए यात्रियों को अपना आधार कार्ड, वोटर आईडी या कोई भी वैध सरकारी पहचान पत्र और चालू मोबाइल नंबर साथ रखना अनिवार्य होगा।
दर्शन को सुगम बनाएगा नया ‘टोकन सिस्टम’
इस बार यात्रा को अधिक सुरक्षित, व्यवस्थित और सुगम बनाने के लिए प्रशासन ने ‘टोकन सिस्टम’ को बेहद सख्ती से लागू करने का निर्णय लिया है। अक्सर देखा जाता है कि केदारनाथ और गंगोत्री जैसे संवेदनशील और ऊंचाई वाले धामों पर एक साथ हजारों की भीड़ जमा हो जाती है, जिससे कानून-व्यवस्था और यात्रियों के स्वास्थ्य पर विपरीत असर पड़ता है।
नए नियम के तहत, ऑफलाइन पंजीकरण कराने वाले प्रत्येक श्रद्धालु को एक विशिष्ट टोकन नंबर जारी किया जाएगा। इस टोकन पर दर्शन की संभावित तारीख और समय (टाइम स्लॉट) अंकित होगा।
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भीड़ पर नियंत्रण: टोकन सिस्टम की मदद से मंदिर परिसरों में एक निश्चित समय में केवल उतने ही लोगों को प्रवेश दिया जाएगा, जितने की वहां क्षमता है।
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लंबी लाइनों से मुक्ति: पहले श्रद्धालुओं को दर्शन के लिए 10 से 12 घंटे तक कतारों में खड़ा रहना पड़ता था। अब टोकन पर दिए गए समय के अनुसार ही उन्हें कतार में शामिल होना होगा, जिससे समय की भारी बचत होगी।
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बुजुर्गों और बच्चों को राहत: श्रीगंगानगर से जाने वाले परिवारों में बुजुर्गों और बच्चों की संख्या काफी होती है। समय तय होने से उन्हें घंटों तक ठंड और असुविधा में इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
यात्रा से पहले प्रशासन की जरूरी सलाह
स्थानीय प्रशासन और सामाजिक संस्थाओं ने श्रीगंगानगर के यात्रियों से अपील की है कि वे बिना वैध पंजीकरण और टोकन के यात्रा मार्ग पर आगे न बढ़ें। जगह-जगह बने चेकपोस्टों पर बिना रजिस्ट्रेशन वाले वाहनों और यात्रियों को रोका जा रहा है, जिससे परेशानी खड़ी हो सकती है।
चूंकि केदारनाथ और गंगोत्री की चढ़ाई बेहद कठिन है, इसलिए यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे अपना अनिवार्य स्वास्थ्य परीक्षण (मेडिकल चेकअप) जरूर करवा लें। ऑफलाइन केंद्रों पर भी स्वास्थ्य जांच की बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
Offline पंजीकरण और इस नई टोकन व्यवस्था की शुरुआत से अब श्रीगंगानगर के श्रद्धालुओं की चारधाम यात्रा न केवल आसान होगी, बल्कि वे बिना किसी मानसिक तनाव के शांतिपूर्ण ढंग से देवी-देवताओं के दर्शन कर पुण्य लाभ कमा सकेंगे। स्थानीय स्तर पर विभिन्न धार्मिक और सामाजिक संगठन भी यात्रियों की सहायता के लिए आगे आए हैं, जो उन्हें इन नई गाइडलाइंस के बारे में जागरूक कर रहे हैं।