
श्रीगंगानगर। राजस्थान का अन्नकटोरा कहे जाने वाले सीमावर्ती जिले श्रीगंगानगर और इसके प्रमुख व्यावसायिक केंद्र सूरतगढ़ की मुख्य कृषि उपज मंडियों में इन दिनों रबी विपणन सीजन (Rabi Marketing Season) अपनी समाप्ति की ओर है। मई महीने के अंतिम दिन यानी 31 मई को मंडी समितियों और व्यापारिक सूत्रों से मिली विस्तृत रिपोर्ट के अनुसार, मंडियों में रबी फसलों, विशेषकर गेहूं, जौ और सरसों की आवक अब अपने अंतिम चरणों में पहुंच चुकी है। इस बार फसलों की गुणवत्ता (Quality) काफी बेहतर होने के कारण बाजार में व्यापारियों की ओर से अच्छी मांग देखी जा रही है, जिससे जौ सहित अन्य जिंसों के दामों में मजबूत स्थिरता बनी हुई है।
जौ के दामों में मजबूती और बाजार का रुख
श्रीगंगानगर मुख्य अनाज मंडी के व्यापारिक प्रतिनिधियों के अनुसार, इस सप्ताह मंडियों में जौ (Barley) की आवक में थोड़ी कमी जरूर आई है, क्योंकि अधिकांश किसान अपनी उपज मंडियों तक पहुंचा चुके हैं। हालांकि, मांग और आपूर्ति का संतुलन बेहतर होने के कारण भाव में किसी भी तरह की बड़ी गिरावट नहीं देखी गई है। 31 मई को मंडी में जौ का हाजिर भाव ₹2,370 प्रति क्विंटल के आसपास दर्ज किया गया।
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि इस बार माल्ट निर्माताओं और पशु आहार बनाने वाली बड़ी कंपनियों की ओर से जौ की लगातार उठान (Buying) की जा रही है। किसानों को इस बार शुरुआत से ही जौ के अच्छे दाम मिले हैं, जिससे उनके चेहरों पर संतोष है। कृषि अधिकारियों का कहना है कि चालू सीजन के दौरान मौसम के अनुकूल रहने से दानों का आकार और चमक दोनों ही बहुत शानदार रहे हैं, जो किसानों को बेहतर मूल्य दिलाने में सबसे मददगार साबित हुए।
गेहूं की सरकारी और निजी खरीद सुचारू
दूसरी ओर, मंडी में गेहूं की आवक और खरीद को लेकर भी खासी चहल-पहल देखी जा रही है। सरकारी खरीद केंद्रों (FCI और राजफैड) पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर गेहूं की तुलाई और उठान का काम लगभग पूरा होने को है। प्रशासनिक मुस्तैदी के कारण इस बार बारदाने (बोले) की कमी या परिवहन की बड़ी समस्या सामने नहीं आई।
सरकारी व्यवस्थाओं के समांतर, निजी व्यापारियों और फ्लोर मिल संचालकों द्वारा भी मंडियों में ऊंचे दर्जे के गेहूं की अच्छी बोली लगाई जा रही है। इससे उन किसानों को भी फायदा मिल रहा है जो सरकारी मानकों की औपचारिकताओं से बचकर तुरंत नकद भुगतान चाहते हैं। मंडियों में किसानों की सुविधा के लिए पेयजल और छाया की व्यवस्था की गई है, ताकि इस तपते मौसम में उन्हें किसी परेशानी का सामना न करना पड़े।
उठाव और भुगतान प्रक्रिया को तेज करने के लिए विशेष टीमें
मंडी समिति के सचिव ने जानकारी देते हुए बताया कि जिला प्रशासन और विपणन बोर्ड के निर्देशों पर 31 मई को भी मंडियों में विशेष सतर्कता बरती जा रही है। चूंकि सीजन अब अंतिम दौर में है, इसलिए मंडियों में बची हुई जिंसों के जल्द उठान (Lifting) को प्राथमिकता दी जा रही है ताकि आगामी मानसूनी सीजन से पहले गोदामों और शेड को खाली व सुरक्षित किया जा सके।
प्रशासन द्वारा गठित विशेष टीमें लगातार मंडियों का दौरा कर रही हैं। इन टीमों का मुख्य काम दो स्तरों पर है:
-
व्यापारियों द्वारा समय पर उठान सुनिश्चित करना: ताकि मंडी परिसर में फसलों के ढेर न लगें और यातायात सुचारू रहे।
-
भुगतान प्रक्रिया की निगरानी: किसानों को उनकी फसल बेचने के बाद नियमानुसार तय समय सीमा के भीतर ऑनलाइन या बैंक खातों के माध्यम से भुगतान मिल सके, इसकी कड़ाई से मॉनिटरिंग की जा रही है। किसी भी तरह की गड़बड़ी या देरी की शिकायत पर तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
कुल मिलाकर, श्रीगंगानगर और सूरतगढ़ की मंडियों के लिए इस बार का रबी सीजन आर्थिक रूप से काफी सकारात्मक रहा है। बेहतर फसल प्रबंधन, अच्छी गुणवत्ता और स्थिर बाजारों के दम पर मई महीने का यह अंत किसानों और व्यापारियों दोनों के लिए मुनाफे की उम्मीदें लेकर आया है।