
राजस्थान का सीमावर्ती जिला श्रीगंगानगर, जो पिछले कई दिनों से भीषण गर्मी और झुलसाने वाली लू (Heatwave) की चपेट में था, वहां अचानक मौसम ने एक ऐसा यू-टर्न लिया है जिसकी उम्मीद खुद स्थानीय निवासियों को भी नहीं थी। शनिवार और रविवार (31 मई) को इलाके में आए एक भयानक रेतीले बवंडर (Dust Storm) ने पूरे परिदृश्य को बदल कर रख दिया। पिछले एक सप्ताह से देश के सबसे गर्म शहरों की सूची में शीर्ष पर चल रहे इस शहर को प्रकृति के इस बदले मिजाज से भीषण गर्मी से बड़ी राहत मिली है। तापमान में अचानक आई 10°C की भारी गिरावट ने झुलसते हुए लोगों को सुकून की सांस लेने का मौका दिया है।
पश्चिमी विक्षोभ का असर: दिन में छा गया रात जैसा अंधेरा
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस अचानक आए बदलाव के पीछे उत्तर-पश्चिम भारत में सक्रिय हुआ एक नया और बेहद शक्तिशाली पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) है। इस मौसमी सिस्टम के कारण थार रेगिस्तान की सूखी और रेतीली हवाओं ने चक्रवाती रूप ले लिया। 31 मई की दोपहर होते-होते आसमान का रंग पूरी तरह बदल गया।
देखते ही देखते 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज धूलभरी आंधी और रेतीला बवंडर शहर की तरफ बढ़ा। यह बवंडर इतना विशाल और घना था कि इसने पूरे श्रीगंगानगर और आसपास के ग्रामीण इलाकों को अपनी आगोश में ले लिया। दोपहर के दो बजे ही चारों तरफ ऐसा गहरा अंधेरा छा गया मानो रात हो गई हो। सड़कों पर चल रहे वाहनों को अपनी हेडलाइट्स जलानी पड़ीं और दृश्यता (Visibility) घटकर शून्य के करीब पहुंच गई। दुकानों और मकानों में धूल की मोटी परतें जम गईं, और तेज हवाओं के कारण कई जगहों पर होर्डिंग्स और पेड़ों की टहनियां टूट कर गिर गईं।
झुलसाने वाली लू से मिली बड़ी राहत
इस रेतीले अंधड़ के शांत होने के बाद आसमान में काले बादलों का डेरा जम गया और जिले के कई हिस्सों में हल्की बूंदाबांदी और गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ीं। भले ही इस आंधी-तूफान के कारण जनजीवन कुछ समय के लिए थम सा गया, लेकिन इसने पिछले कई दिनों से चल रही जानलेवा और भीषण लू से लोगों को बहुत बड़ी राहत पहुंचाई।
इस सप्ताह की शुरुआत में श्रीगंगानगर का अधिकतम तापमान रिकॉर्ड तोड़ 48.2°C तक जा पहुंचा था, जिसने पिछले कई सालों के रिकॉर्ड को ध्वस्त कर दिया था। दोपहर के समय सूरज की किरणें आग की तरह बरस रही थीं, जिससे बाजार पूरी तरह सूने हो जाते थे और लोग घरों में कैद रहने को मजबूर थे। लेकिन 31 मई को आए इस रेतीले बवंडर और बूंदाबांदी के बाद हवाओं में घुली ठंडक ने पारे को सीधे 10 डिग्री सेल्सियस तक नीचे गिरा दिया, जिससे मौसम काफी सुहावना हो गया।
कृषि और आम जनजीवन पर प्रभाव
मौसम के इस यू-टर्न का असर स्थानीय जनजीवन और खेती-किसानी पर भी देखने को मिल रहा है। जहां एक तरफ आम जनता ने घरों से बाहर निकलकर इस ठंडी हवा का आनंद लिया और कई दिनों बाद पार्कों और बाजारों में चहल-पहल देखी गई, वहीं ग्रामीण इलाकों के किसानों के लिए यह आंधी मिली-जुली प्रतिक्रिया लेकर आई।
नरमा (कपास) की अगेती बिजाई कर चुके किसानों के खेतों में तेज आंधी के कारण धूल जमने और रेतीली हवाओं से कोमल पौधों को मामूली नुकसान की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, तापमान कम होने से जमीन में नमी लंबे समय तक टिकी रहेगी, जो आने वाले समय में फसलों के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है।
आगे कैसा रहेगा मिजाज?
मौसम केंद्र जयपुर ने श्रीगंगानगर सहित पूरे बीकानेर संभाग के लिए ‘येलो अलर्ट’ जारी रखा है। मौसम विभाग का अनुमान है कि इस पश्चिमी विक्षोभ का असर अगले 24 से 48 घंटों तक बना रह सकता है। इस दौरान रुक-रुक कर धूलभरी आंधी चलने, आकाशीय बिजली चमकने और कहीं-कहीं ओलावृष्टि के साथ हल्की से मध्यम बारिश होने की पूरी संभावना है। प्रशासन ने भी आम लोगों को आंधी-तूफान के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहने और बिजली के खंभों व पेड़ों के नीचे खड़े न होने की सलाह दी है। कुल मिलाकर, मई महीने का अंत श्रीगंगानगर के लोगों के लिए तपिश से छुटकारे और एक बड़ी राहत के पैगाम के साथ हुआ है।