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श्रीगंगानगर में भीषण गर्मी और ‘रेड अलर्ट’ लू का सितम: पारा 45 डिग्री के पार, सड़कों पर पसरा सन्नाटा, प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह मुस्तैद

श्रीगंगानगर। मई महीने के आखिरी दिन उत्तर भारत सहित सीमावर्ती जिले श्रीगंगानगर के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम साबित नहीं हो रहे हैं। इस समय पूरे क्षेत्र में सूर्यदेव का रौद्र रूप देखने को मिल रहा है, और आसमान से लगातार अंगारे बरस रहे हैं। भीषण गर्मी और जानलेवा लू (Heat Wave) का प्रकोप अपने चरम पर पहुंच चुका है, जिसने आम जनजीवन को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया है।

लगातार बढ़ते तापमान के कारण स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को हाई अलर्ट पर रहना पड़ रहा है। अस्पतालों से लेकर सार्वजनिक स्थानों तक गर्मी से बचाव के पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं।

आसमान से बरस रही आग, 45 डिग्री के पार पहुंचा पारा

श्रीगंगानगर हमेशा से अपनी चरम मौसमी परिस्थितियों के लिए जाना जाता रहा है, लेकिन इस बार मई के अंतिम सप्ताह ने पिछले कई रिकॉर्ड्स को चुनौती दे दी है। जिले का अधिकतम तापमान लगातार 45 डिग्री सेल्सियस से लेकर 47 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ है। सुबह नौ बजते ही धूप की तपिश इतनी तेज हो जाती है कि त्वचा झुलसने लगती है।

दोपहर के समय चलने वाली गर्म और शुष्क हवाओं (लू) ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। स्थिति यह है कि दोपहर 12 बजे से लेकर शाम 4 बजे तक शहर के मुख्य बाजारों, चौराहों और सड़कों पर पूरी तरह सन्नाटा पसर जाता है। लोग केवल बेहद जरूरी या आपातकालीन काम होने पर ही पूरी तरह से चेहरा और शरीर ढककर बाहर निकल रहे हैं।

प्रशासन की ‘कड़क’ एडवाइजरी: दोपहर में बाहर निकलने से बचें

बढ़ते खतरे को देखते हुए जिला कलेक्टर और स्थानीय प्रशासन ने आमजन की सुरक्षा के लिए एक विस्तृत स्वास्थ्य और सुरक्षा एडवाइजरी (Health Advisory) जारी की है। प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे मौसम की इस गंभीरता को समझें और लापरवाही न बरतें।

  • दोपहर में आवाजाही पर रोक की सलाह: आमजन को सख्त हिदायत दी गई है कि दोपहर 12:00 बजे से शाम 4:00 बजे के बीच, जब सूरज की किरणें और लू का प्रभाव सबसे घातक होता है, बिना किसी अनिवार्य कारण के घरों या दफ्तरों से बाहर न निकलें।

  • हाइड्रेशन पर विशेष ध्यान: एडवाइजरी में कहा गया है कि प्यास न लगने पर भी लगातार पानी पीते रहें। शरीर में पानी और नमक की कमी को रोकने के लिए ओआरएस (ORS) घोल, नींबू पानी, छाछ, लस्सी, नारियल पानी और आम पन्ना जैसे तरल पदार्थों का अधिक से अधिक सेवन करें।

  • सूती और हल्के कपड़े: बाहर निकलते समय हमेशा हल्के रंग के, ढीले और सूती कपड़े पहनने, सिर को सूती कपड़े या टोपी से ढकने और धूप के चश्मे का प्रयोग करने की सलाह दी गई है।

चिकित्सा विभाग अलर्ट: अस्पतालों में बने ‘हीट स्ट्रोक’ स्पेशल वार्ड

गर्मी के इस जानलेवा मौसम में सबसे बड़ा दबाव स्वास्थ्य सेवाओं पर है। लू की चपेट में आने से उल्टी-दस्त, तेज बुखार, चक्कर आना और डिहाइड्रेशन के मरीजों की संख्या में अचानक भारी इजाफा हुआ है। इसे देखते हुए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) के निर्देश पर जिला अस्पताल समेत सभी सामुदायिक (CHC) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) को चौबीसों घंटे अलर्ट मोड पर रखा गया है।

राजकीय जिला अस्पताल में ‘हीट स्ट्रोक’ (लू लगना) से पीड़ित मरीजों के त्वरित इलाज के लिए विशेष ‘हीट स्ट्रोक वार्ड’ स्थापित किए गए हैं। इन वार्डों में एयर कंडीशनर (AC) और कूलर्स की विशेष व्यवस्था की गई है ताकि मरीजों के शरीर के तापमान को तुरंत नियंत्रित किया जा सके। इसके साथ ही, अस्पतालों में जीवन रक्षक दवाओं, ओआरएस पैकेट्स और ड्रिप (IV Fluids) का पर्याप्त स्टॉक सुनिश्चित किया गया है। डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ को निर्देश दिए गए हैं कि आपातकालीन स्थिति में किसी भी मरीज के इलाज में देरी न हो।

बेजुबान पक्षियों और पशुओं के लिए भी संकट

यह भीषण गर्मी न केवल इंसानों के लिए, बल्कि क्षेत्र के मवेशियों, आवारा पशुओं और बेजुबान पक्षियों के लिए भी काल साबित हो रही है। पानी के स्रोत सूखने के कारण पशु-पक्षी पानी के लिए भटक रहे हैं। स्थानीय सामाजिक संस्थाओं और पर्यावरण प्रेमियों ने नागरिकों से अपील की है कि वे अपनी छतों, छज्जों और कूनों में पक्षियों के लिए परिंडे बांधें और उनमें नियमित रूप से पानी भरें। साथ ही, घरों के बाहर आवारा गायों और कुत्तों के लिए पानी की खेलियां या टब रखने की गुजारिश की गई है।

मौसम विभाग के अनुसार, फिलहाल आगामी कुछ दिनों तक इस भीषण गर्मी और लू से राहत मिलने की कोई उम्मीद नहीं है। पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय न होने के कारण शुष्क हवाएं ऐसे ही चलती रहेंगी, जिससे आने वाले दिनों में पारा और ऊपर चढ़ सकता है। प्रशासन ने नागरिकों से धैर्य रखने और सुरक्षित रहने की अपील की है।

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