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श्रीगंगानगर में पानी-बिजली की किल्लत पर प्रशासन सख्त, मॉनिटरिंग के लिए बनीं विशेष टीमें

श्रीगंगानगर। सीमावर्ती जिले श्रीगंगानगर में मई के महीने में रिकॉर्ड तोड़ गर्मी और लू के थपेड़ों ने आम जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। इस भीषण गर्मी के बीच शहर के विभिन्न वार्डों और कॉलोनियों से अघोषित बिजली कटौती और पेयजल किल्लत की लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं। आम जनता को हो रही इस भारी परेशानी को देखते हुए जिला प्रशासन अब पूरी तरह से एक्शन मोड में आ गया है।

जिला कलेक्टर ने विद्युत विभाग (जोधपुर डिस्कॉम) और जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) के उच्च अधिकारियों के साथ एक आपातकालीन समीक्षा बैठक की। बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए गए कि आमजन को इस तपन में बिजली और पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरसना न पड़े। इसके लिए प्रशासन ने एक व्यापक रणनीति तैयार की है, जिसके तहत शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक कड़ी निगरानी रखी जाएगी।

बिजली ग्रिड्स और जलापूर्ति की निगरानी के लिए विशेष टीमों का गठन

प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने और व्यवस्थाओं को सुचारू बनाने के लिए विशेष उड़नदस्तों (फ्लाइंग स्क्वाड) और मॉनिटरिंग टीमों का गठन किया है। इन टीमों में प्रशासनिक अधिकारियों के साथ-साथ बिजली और पानी विभाग के तकनीकी इंजीनियरों को शामिल किया गया है।

  • बिजली ग्रिड्स की लाइव मॉनिटरिंग: ये टीमें प्रमुख बिजली ग्रिड्स और सब-स्टेशनों का औचक निरीक्षण करेंगी ताकि ओवरलोडिंग के कारण होने वाले ट्रिपिंग और फॉल्ट को समय रहते ठीक किया जा सके। अघोषित और बिना सूचना के की जाने वाली कटौती पर पूरी तरह रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं।

  • पेयजल आपूर्ति का शेड्यूल: जिन क्षेत्रों में पानी का प्रेशर कम है या दूषित पानी की शिकायत है, वहां पीएचईडी की टीमें मौके पर जाकर सुधार करेंगी। नहरों से मिलने वाले पानी के कोटे और शहरी डिस्ट्रीब्यूशन लाइनों की रोजाना समीक्षा की जाएगी।

अवैध बूस्टर (टुल्लू पंप) लगाने वालों की अब खैर नहीं

शहर में पानी की किल्लत का एक बड़ा कारण कुछ नागरिकों द्वारा मुख्य सप्लाई लाइन में सीधे हैवी बूस्टर या टुल्लू पंप लगाना भी है। इस अवैध गतिविधि के कारण पाइपलाइन का सारा प्रेशर खींच लिया जाता है, जिससे टेल-एंड (लाइन के आखिरी छोर) पर स्थित घरों तक पानी की एक बूंद भी नहीं पहुंच पाती।

कलेक्टर का कड़ा रुख: “संकट के इस दौर में पानी की चोरी और बर्बादी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जो लोग अपने स्वार्थ के लिए अवैध बूस्टर पंप का इस्तेमाल कर रहे हैं, उनके खिलाफ बिना किसी रियायत के सीधे कानूनी कार्रवाई की जाए।”

प्रशासन द्वारा गठित विशेष टीमें अब सुबह और शाम को पानी की सप्लाई के समय विभिन्न मोहल्लों में औचक छापेमारी करेंगी। यदि किसी भी घर में मुख्य लाइन से सीधे मोटर जुड़ी हुई पाई गई, तो न केवल उस मोटर को तुरंत जब्त किया जाएगा, बल्कि संबंधित मकान मालिक के खिलाफ पानी चोरी का मामला दर्ज कर भारी जुर्माना भी वसूला जाएगा।

पानी की बर्बादी रोकने के लिए जारी हुईं गाइडलाइंस

प्रशासन ने पेयजल के दुरुपयोग को रोकने के लिए आम जनता से भी सहयोग की अपील की है और कुछ सख्त गाइडलाइंस जारी की हैं:

प्रतिबंधित गतिविधियां वैकल्पिक उपाय / निर्देश
पीने के पानी से गाड़ियां धोना सूती कपड़े या बाल्टी के पानी का उपयोग करें
आंगन, सड़कों या रास्तों पर पानी का छिड़काव केवल रीसायकल या वेस्ट पानी का ही प्रयोग करें
पौधों और बगीचों में पाइप से सींचना सुबह या शाम को सीमित मात्रा में पानी दें
वाटर टैंक ओवरफ्लो होना छतों पर बने टैंकों में ऑटो-कट अलार्म लगाएं

कंट्रोल रूम स्थापित, 24 घंटे दर्ज होंगी शिकायतें

नागरिकों की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए जिला मुख्यालय पर एक केंद्रीय नियंत्रण कक्ष (कंट्रोल रूम) स्थापित किया गया है। यह कंट्रोल रूम 24 घंटे चालू रहेगा, जहां पानी की लाइन फूटने, गंदा पानी आने, ट्रांसफार्मर जलने या लंबे समय तक बिजली गुल रहने की शिकायतें दर्ज कराई जा सकती हैं।

शिकायत मिलते ही संबंधित क्षेत्र की क्विक रिस्पांस टीम (QRT) को मौके पर भेजा जाएगा। प्रशासन का लक्ष्य है कि पेयजल से जुड़ी किसी भी समस्या का समाधान अधिकतम 3 से 4 घंटे के भीतर और बिजली फॉल्ट का समाधान 1 से 2 घंटे के भीतर सुनिश्चित किया जाए। भीषण गर्मी के इस दौर में प्रशासन की यह मुस्तैदी निश्चित रूप से श्रीगंगानगर के नागरिकों के लिए एक बड़ी राहत साबित होगी।

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