
श्रीगंगानगर। राजस्थान के प्रमुख कृषि प्रधान जिलों में शुमार श्रीगंगानगर की मुख्य अनाज मंडी में इन दिनों रबी सीजन की फसलों की आवक अपने अंतिम दौर में पहुंच चुकी है। आज यानी 26 मई को नेशनल कमोडिटी एंड डेरिवेटिव्स एक्सचेंज (NCDEX) और स्थानीय हाजिर बाजार (Spot Market) से प्राप्त ताजा आंकड़ों के अनुसार, मंडी में ‘जौ’ (Barley) के भावों में एक खास स्थिरता और हल्की मजबूती का रुख देखा गया है।
लंबे समय से उतार-चढ़ाव के दौर से गुजर रहे जौ के बाजार को अब एक मजबूत आधार मिलता हुआ दिखाई दे रहा है। आज श्रीगंगानगर अनाज मंडी में जौ का व्यापार औसतन ₹2,200 प्रति क्विंटल के आसपास दर्ज किया गया। बाजार के जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में स्टॉकहोल्डर्स और औद्योगिक मांग के चलते कीमतों में और सुधार देखने को मिल सकता है।
आवक में कमी और मांग में सुधार से कीमतों को मिला सहारा
रबी सीजन 2026 की शुरुआत में जहां मंडियों में जौ की बंपर आवक देखने को मिल रही थी, वहीं अब मई के अंतिम सप्ताह तक आते-आते खेतों से माल लगभग साफ हो चुका है। किसान अब अपनी रबी फसलों की बची-खुची ढेरियाँ (बची हुई आवक) लेकर ही मंडी पहुंच रहे हैं।
बाजार विश्लेषकों के अनुसार, इस समय जौ की कीमतों में स्थिरता आने के पीछे दो मुख्य कारण हैं:
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सीमित आवक: मंडियों में दैनिक आवक का ग्राफ धीरे-धीरे नीचे गिर रहा है, जिससे बाजार में बिकवाली का दबाव कम हुआ है।
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मजबूत औद्योगिक मांग: माल्ट निर्माताओं, बीयर इंडस्ट्रीज और पशु आहार (कैटल फीड) बनाने वाली कंपनियों की ओर से अच्छी क्वालिटी के जौ की लगातार लिवाली (खरीदारी) की जा रही है।
यही वजह है कि NCDEX के वायदा कारोबार के सकारात्मक संकेतों के बीच स्थानीय स्तर पर भी जौ के भाव ₹2,150 से लेकर ₹2,250 प्रति क्विंटल के दायरे में मजबूती से टिके हुए हैं।
व्यापारियों का आकलन: “इस साल जौ का उत्पादन पिछले वर्ष के मुकाबले थोड़ा कम आंका गया है। वर्तमान में जो भाव ₹2,200 के आसपास चल रहे हैं, वे किसानों के लिए बहुत ज्यादा मुनाफे वाले तो नहीं हैं, लेकिन बाजार के पिछले मंदी के दौर को देखते हुए संतोषजनक कहे जा सकते हैं।”
चिलचिलाती धूप में भी मंडी पहुंच रहे किसान
श्रीगंगानगर में इस समय पारा 47 डिग्री सेल्सियस के पार चल रहा है और आसमान से आग बरस रही है। इस भीषण गर्मी और हीटवेव के बावजूद किसान अपनी उपज को बेचने के लिए ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में जौ, गेहूं और सरसों की बची हुई फसल लेकर अलसुबह ही मंडी प्रांगण में पहुंच रहे हैं। किसान चाहते हैं कि मानसून के आगमन और आगामी खरीफ सीजन (नरमा, ग्वार और मूंग) की बिजाई से पहले वे अपनी पुरानी फसल का निपटारा कर लें, ताकि अगली फसल के लिए खाद, बीज और नकदी का इंतजाम समय पर किया जा सके।
मंडी समिति के अधिकारियों के मुताबिक, हालांकि मुख्य सीजन जैसी भीड़ अब नहीं है, फिर भी सुबह के वक्त जौ और गेहूं के ढेरों की नीलामी सुचारू रूप से चल रही है। दोपहर की तेज धूप और लू के थपेड़ों से बचने के लिए ज्यादातर व्यापारिक सौदे सुबह 11 बजे से पहले ही निपटाए जा रहे हैं।
भविष्य का क्या है अनुमान? क्या बढ़ेंगे जौ के दाम?
कमोडिटी एक्सपर्ट्स और श्रीगंगानगर कच्चा आढ़तिया संघ के वरिष्ठ सदस्यों का मानना है कि जून महीने के मध्य तक जौ के बाजार में तेजी का रुख बन सकता है। चूंकि अब अधिकांश फसल किसानों के हाथों से निकलकर मिलर्स और बड़े स्टॉकिस्टों के गोदामों में पहुंच चुकी है, इसलिए बाजार में अब सप्लाई टाइट (सीमित) होगी।
यदि आने वाले दिनों में वैश्विक बाजारों में भी चारे और माल्ट की मांग में इजाफा होता है, तो स्थानीय मंडियों में जौ के भाव ₹2,350 से ₹2,400 प्रति क्विंटल के स्तर को भी छू सकते हैं। हालांकि, शॉर्ट-टर्म में भाव ₹2,200 के इसी दायरे के आसपास स्थिर बने रहने की पूरी उम्मीद है। किसानों को सलाह दी जा रही है कि जिनके पास रोकने की क्षमता है, वे थोड़ा रुक-रुक कर माल निकालें, जबकि जरूरत वाले किसान मौजूदा स्थिर भावों का लाभ उठा सकते हैं।