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नशे के खिलाफ बड़ी स्ट्राइक: भारत-पाक सीमा पर सप्लाई से पहले नशीली दवाइयों की बड़ी खेप जब्त, दो शातिर तस्कर गिरफ्तार

क्राइम रिपोर्टर, श्री गंगानगर

23 मई, 2026

श्री गंगानगर। सीमावर्ती जिले में युवाओं की रगों में धीमा जहर घोलने वाले ड्रग नेटवर्क के खिलाफ श्री गंगानगर जिला पुलिस ने 23 मई को एक और बड़ी और निर्णायक कार्रवाई को अंजाम दिया है। जिला पुलिस अधीक्षक (SP) के निर्देशन में चलाए जा रहे ‘नशा मुक्ति और धरपकड़ विशेष अभियान’ के तहत पुलिस ने एक संदिग्ध कार से अवैध नशीली दवाइयों की बहुत बड़ी खेप बरामद करने में सफलता हासिल की है। इस कार्रवाई के दौरान मौके से दो शातिर अंतरराज्यीय तस्करों को दबोचा गया है। बरामद की गई नशीली गोलियों और कैप्सूलों की बाजार में कीमत लाखों रुपये आंकी जा रही है।

सख्त नाकाबंदी के दौरान हत्थे चढ़े तस्कर

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, मुखबिर के जरिए सूचना मिली थी कि पंजाब और बाहरी इलाकों से नशे की एक बड़ी खेप लग्जरी कार के जरिए जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में खपाने के लिए लाई जा रही है। सूचना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस की विशेष टीम (DST) और स्थानीय थाना पुलिस ने मुख्य राजमार्गों और संपर्क मार्गों पर तत्काल प्रभाव से कड़ी नाकाबंदी शुरू कर दी।

इसी दौरान एक तेज रफ्तार कार नाके के पास आती दिखाई दी। पुलिस को देखकर कार चालक ने गाड़ी को मोड़कर भागने का प्रयास किया, लेकिन मुस्तैद पुलिस जाब्ते ने घेराबंदी करते हुए कार को बीच सड़क पर ही रुकवा लिया। जब कार की गहनता से तलाशी ली गई, तो गाड़ी के गुप्त हिस्सों और डिग्गी में छिपाकर रखी गई हजारों की संख्या में प्रतिबंधित नशीली गोलियां (Tramadol) और नशीले कैप्सूल बरामद हुए। पुलिस ने दवाओं को जब्त कर कार सवार दोनों आरोपियों को मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया।

भारत-पाक सीमा के नजदीकी गांवों में होनी थी डिलीवरी

शुरुआती पुलिस पूछताछ में बेहद चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। गिरफ्तार किए गए तस्करों ने कबूल किया है कि नशे की यह पूरी खेप भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा (Indo-Pak Border) से सटे नजदीकी गांवों और ढाणियों में सप्लाई की जानी थी। सीमावर्ती इलाकों के युवाओं को निशाना बनाने के लिए इस बड़ी खेप को छोटे-छोटे पैडलर्स (स्थानीय सप्लायर्स) तक पहुंचाया जाना था।

थानाधिकारी का आधिकारिक बयान:

“यह एक बड़ा सिंडिकेट है जो सीमावर्ती इलाकों के सीधे-साधे युवाओं को नशे की लत का शिकार बना रहा है। पकड़े गए तस्कर महज कूरियर का काम कर रहे थे। इनका मुख्य उद्देश्य बॉर्डर बेल्ट में सक्रिय स्थानीय एजेंटों तक माल पहुंचाना था, जहां इस समय नशे की मांग बढ़ने की सूचनाएं मिल रही थीं।”

बैकवर्ड और फॉरवर्ड लिंकेज खंगालने में जुटी पुलिस

पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट (NDPS Act) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क के ‘बैकवर्ड और फॉरवर्ड लिंकेज’ (यानी माल कहाँ से लाया गया और आगे किसे बेचा जाना था) को पूरी तरह ध्वस्त करने में जुटी है।

पुलिस जांच के मुख्य बिंदु:

  • सप्लाई सोर्स: यह नशीली दवाइयाँ किस फैक्ट्री या थोक डीलर से अवैध रूप से खरीदी गईं?

  • फंडिंग नेटवर्क: इस अवैध कारोबार के पीछे किसका पैसा लगा है और लेन-देन के लिए किन बैंक खातों या डिजिटल माध्यमों का उपयोग किया गया?

  • स्थानीय मददगार: सीमावर्ती गांवों में ऐसे कौन से डीलर और रसूखदार लोग हैं, जो इन तस्करों को पनाह देते हैं और वितरण का काम संभालते हैं?

जिला पुलिस अधीक्षक ने साफ किया है कि नशे के इस काले कारोबार में शामिल किसी भी अपराधी को बख्शा नहीं जाएगा। आरोपियों को अदालत में पेश कर रिमांड पर लिया जाएगा, जिसके बाद इस रैकेट से जुड़े कई और बड़े नामों का खुलासा होने की पूरी उम्मीद है।

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