
श्रीगंगानगर। राजस्थान के सीमावर्ती जिले श्रीगंगानगर के श्रीकरनपुर थाना क्षेत्र से एक बेहद हृदयविदारक घटना सामने आई है। यहाँ चक 49-एफ में एक 17 वर्षीय किशोर की खेत में बनी पानी की डिग्गी में डूबने से असामयिक मृत्यु हो गई। इस घटना ने न केवल पीड़ित परिवार को झकझोर कर रख दिया है, बल्कि पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई है।
घटना का विवरण: कैसे हुआ हादसा?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, सोमवार शाम करीब 5:00 बजे 17 वर्षीय हेतराम नायक, जो कि चक 49-एफ का निवासी था, अपने खेत पर काम कर रहा था। गर्मी के इस मौसम में प्यास बुझाने या घरेलू कार्य के लिए वह खेत में बनी पक्की डिग्गी से पानी निकालने गया था। प्रत्यक्षदर्शियों और पुलिस की प्रारंभिक जांच के अनुसार, पानी निकालते समय अचानक किशोर का पैर फिसल गया।
डिग्गी की गहराई अधिक होने और किनारों पर फिसलन होने के कारण हेतराम खुद को संभाल नहीं पाया और सीधे गहरे पानी में जा गिरा। चूंकि उस समय आस-पास कोई अन्य व्यक्ति मौजूद नहीं था जो उसे तत्काल बाहर निकाल सके, किशोर पानी के भीतर संघर्ष करते हुए डूब गया।
बचाव कार्य और शिनाख्त
काफी देर तक जब हेतराम वापस नहीं लौटा, तो परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की। जब वे डिग्गी के पास पहुंचे, तो उन्हें अनहोनी की आशंका हुई। ग्रामीणों की मदद से काफी मशक्कत के बाद हेतराम को पानी से बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक उसकी सांसें थम चुकी थीं। आनन-फानन में उसे स्थानीय चिकित्सा केंद्र ले जाया गया, जहाँ चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
घटना की सूचना मिलते ही श्रीकरनपुर थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया। आज, यानी मंगलवार को पुलिस ने कानूनी प्रक्रियाओं को पूरा करते हुए शव का पोस्टमार्टम करवाया और अंतिम संस्कार के लिए परिजनों को सौंप दिया।
गांव में मातम और सुरक्षा पर सवाल
हेतराम अपने परिवार का लाडला था और अभी उसकी पूरी उम्र सामने पड़ी थी। उसकी मौत की खबर जैसे ही गांव में फैली, मृतक के घर पर ढांढस बंधाने वालों की भीड़ लग गई। माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल है।
यह घटना एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में खेतों में बनी डिग्गी और कुंडों की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े करती है। श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ जिलों में सिंचाई और पेयजल के लिए खेतों में बड़ी डिग्गियां बनाने का चलन है। अक्सर इन डिग्गियों के किनारे खुले होते हैं और उन पर कोई सुरक्षा घेरा (बाड़ या जाली) नहीं होता।
खेतों में डिग्गी दुर्घटनाओं से बचाव के लिए जरूरी सावधानियां
ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए कृषि विशेषज्ञों और प्रशासन द्वारा समय-समय पर कुछ सुझाव दिए जाते हैं, जिनका पालन करना अनिवार्य है:
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सुरक्षा घेरा (Fencing): खेत की हर डिग्गी के चारों ओर कम से कम 4 से 5 फीट ऊंची कटीली तारों या लोहे की जाली की बाड़ लगानी चाहिए ताकि कोई अचानक या अंधेरे में उसमें न गिरे।
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सीढ़ियों और रस्सियों की व्यवस्था: डिग्गी के भीतर एक कोने में लोहे की सीढ़ी या मोटी रस्सियां बांधकर रखनी चाहिए, ताकि यदि कोई गलती से गिर जाए, तो वह उसे पकड़कर बाहर निकल सके।
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अकेले न जाएं: बच्चों और किशोरों को सख्त हिदायत दी जानी चाहिए कि वे कभी भी अकेले डिग्गी के पास न जाएं, खासकर पानी निकालते समय।
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चेतावनी बोर्ड: गहरे पानी के पास चेतावनी के संकेत लगाने चाहिए ताकि आगंतुक सावधान रहें।
निष्कर्ष
हेतराम की मृत्यु एक व्यक्तिगत क्षति होने के साथ-साथ समाज के लिए एक चेतावनी भी है। पुलिस ने फिलहाल मर्ग दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। प्रशासन ने भी ग्रामीणों से अपील की है कि वे अपने खेतों में बनी जल संरचनाओं को सुरक्षित कवर करें ताकि भविष्य में किसी और मासूम की जान न जाए।
आज मंगलवार शाम को गमगीन माहौल में हेतराम का अंतिम संस्कार कर दिया गया। पूरा गांव इस समय स्तब्ध है और प्रशासन से मांग कर रहा है कि पीड़ित परिवार को उचित आर्थिक सहायता प्रदान की जाए।