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भीषण गर्मी का प्रकोप: श्रीगंगानगर में पारा 40°C के पार, लू के थपेड़ों ने थामी रफ्तार

श्रीगंगानगर। राजस्थान के उत्तरी छोर पर स्थित सीमावर्ती जिला श्रीगंगानगर अपनी विषम जलवायु के लिए जाना जाता है। यहाँ सर्दियाँ जितनी ठिठुरन भरी होती हैं, गर्मियाँ उतनी ही आग उगलती हैं। आज 29 अप्रैल को जिले में गर्मी ने अपने तीखे तेवर दिखाते हुए इस सीजन के सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए। सूर्य देव की तपिश और आसमान से बरसती आग ने जिले को भट्टी की तरह तपा दिया है।

तापमान का गणित और मौसम का मिजाज

आज श्रीगंगानगर का अधिकतम तापमान 40°C के आंकड़े को पार कर गया, जबकि न्यूनतम तापमान भी 27°C के आसपास दर्ज किया गया। सुबह 10 बजे के बाद से ही सूरज की किरणें चुभने लगी थीं और दोपहर होते-होते सड़कों पर सन्नाटा पसर गया। मौसम विभाग (IMD) की मानें तो यह महज शुरुआत है। आने वाले सप्ताह में पारा और ऊपर चढ़ने की संभावना है, जिससे लू (Heatwave) का प्रकोप और अधिक तीव्र हो जाएगा।

लू (Heatwave) की चेतावनी और आम जनजीवन

गर्म हवाओं के थपेड़ों ने लोगों का घर से निकलना मुहाल कर दिया है। दुपहिया वाहन चालकों के लिए सड़कों पर चलना किसी चुनौती से कम नहीं रहा। चेहरे को कपड़े से ढके बिना बाहर निकलना त्वचा को झुलसा देने वाला अनुभव साबित हो रहा है।

जनजीवन पर प्रभाव:

  1. बाजारों में सन्नाटा: दोपहर 12 बजे से शाम 5 बजे तक बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही न के बराबर रही। दुकानदार पंखों और कूलरों के सामने बैठे नजर आए।

  2. ठंडे पेय पदार्थों की मांग: लस्सी, गन्ने का रस, नींबू पानी और मटके के पानी की मांग में अचानक उछाल आया है। आइसक्रीम पार्लरों और जूस की दुकानों पर शाम के समय भारी भीड़ देखी जा रही है।

  3. पशु-पक्षियों का बुरा हाल: केवल इंसान ही नहीं, बल्कि बेजुबान पक्षी और पशु भी प्यास और गर्मी से बेहाल हैं। पेड़ों की छांव में बैठे पशु और पानी के कुंडों की तलाश करते पक्षी इस भीषण गर्मी की गवाही दे रहे हैं।

स्वास्थ्य विभाग की सलाह

चिकित्सकों ने इस भीषण गर्मी को देखते हुए विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। जिला अस्पताल के विशेषज्ञों का कहना है कि तापमान में अचानक हुई इस बढ़ोतरी से ‘हीट स्ट्रोक’ (लू लगना) का खतरा बढ़ गया है।

बचाव के उपाय:

  • पानी का सेवन: प्यास न लगने पर भी नियमित अंतराल में पानी पीते रहें। ओआरएस (ORS) या नींबू-पानी का उपयोग शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स बनाए रखने के लिए करें।

  • बाहर निकलने से बचें: दोपहर के समय, खासकर 12 से 4 बजे के बीच, यदि बहुत जरूरी न हो तो घर से बाहर न निकलें।

  • पहनावा: हल्के रंग के सूती कपड़े पहनें और सिर को टोपी, छाते या गमछे से ढककर रखें।

  • आहार: हल्का और सुपाच्य भोजन करें। तरबूज, खीरा और ककड़ी जैसे मौसमी फलों का सेवन बढ़ाएं।

कृषि और बिजली की स्थिति

गर्मी बढ़ने के साथ ही जिले में बिजली की खपत में भी रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की गई है। एसी और कूलर दिन-रात चलने के कारण ट्रांसफार्मरों पर लोड बढ़ गया है, जिससे कई इलाकों में घोषित और अघोषित बिजली कटौती की खबरें भी आ रही हैं। वहीं, किसान अपनी फसलों को लेकर चिंतित हैं, क्योंकि तेज गर्मी और शुष्क हवाएं मिट्टी की नमी को सोख रही हैं, जिससे सिंचाई की मांग बढ़ गई है।

निष्कर्ष

श्रीगंगानगर के लोगों के लिए गर्मी कोई नई बात नहीं है, लेकिन इस बार अप्रैल के अंत में ही पारा 40°C पार कर जाना भविष्य की चुनौतियों का संकेत है। मौसम विभाग का अनुमान है कि यदि पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय नहीं हुआ, तो मई के पहले पखवाड़े में पारा 45°C तक भी पहुंच सकता है। प्रशासन ने भी लोगों से अपील की है कि वे सावधानी बरतें और लू के लक्षणों को नजरअंदाज न करें।

यह गर्मी न केवल शारीरिक स्वास्थ्य बल्कि हमारी कार्यक्षमता और ऊर्जा संसाधनों पर भी भारी पड़ रही है। ऐसे में ‘बचाव ही उपचार है’ का मंत्र अपनाना ही सबसे बेहतर विकल्प है।

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