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श्रीगंगानगर: भीषण गर्मी के बीच अघोषित बिजली कटौती से ग्रामीण त्रस्त, आक्रोश की लहर

श्रीगंगानगर, राजस्थान का वह सीमावर्ती जिला जो अपनी उपजाऊ भूमि और कठिन मौसम के लिए जाना जाता है, इस समय एक गंभीर बिजली संकट के मुहाने पर खड़ा है। 28 अप्रैल 2026 को, जब पारा आसमान छू रहा है, जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की भारी किल्लत ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। सरकार और बिजली विभाग (जोधपुर डिस्कॉम) के दावों के विपरीत, गांवों में हो रही घंटों की अघोषित कटौती ने ग्रामीणों के सब्र का बांध तोड़ दिया है।


भीषण गर्मी और अघोषित कटौती का कहर

अप्रैल के अंतिम सप्ताह में श्रीगंगानगर का तापमान 40-42 डिग्री सेल्सियस के आसपास मंडरा रहा है। ऐसे में बिजली ही एकमात्र सहारा है जो घरों को ठंडा रखने और पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद करती है। ग्रामीण क्षेत्रों से आ रही रिपोर्टों के अनुसार, दिन में 6 से 8 घंटे और रात के समय भी 3 से 4 घंटे तक बिजली गुल रहती है।

सबसे बड़ी समस्या यह है कि यह कटौती ‘अघोषित’ है। बिजली कब जाएगी और कब आएगी, इसका कोई निश्चित समय नहीं है। दोपहर की झुलसाती धूप में जब बुजुर्गों और बच्चों को पंखे या कूलर की सबसे ज्यादा जरूरत होती है, तभी बिजली गुल हो जाती है।

किसानों और पशुपालकों पर दोहरी मार

श्रीगंगानगर की अर्थव्यवस्था की रीढ़ यहाँ के किसान और पशुपालक हैं, और यह बिजली संकट सीधे तौर पर उनकी आजीविका पर प्रहार कर रहा है।

  1. कृषि कार्य में बाधा: हालांकि रबी की मुख्य फसलों की कटाई हो चुकी है, लेकिन जायद की फसलों और बागवानी (विशेषकर किन्नू के बागों) को इस समय नियमित सिंचाई की आवश्यकता होती है। बिजली न मिलने के कारण ट्यूबवेल नहीं चल पा रहे हैं, जिससे पौधों के सूखने का खतरा पैदा हो गया है।

  2. पशुपालन की चुनौतियां: भीषण गर्मी में दुधारू पशुओं को बार-बार पानी पिलाने और उन्हें ठंडे वातावरण में रखने की जरूरत होती है। बिजली कटौती के कारण वाटर टैंक नहीं भर पाते और फॉगर्स (Foggers) नहीं चल पाते, जिससे पशुओं के दूध देने की क्षमता कम हो रही है और वे बीमार पड़ रहे हैं।

  3. पेयजल संकट: गांवों में जलापूर्ति योजनाएं बिजली पर निर्भर हैं। बिजली गायब रहने से गांवों की डिग्गियों (जल भंडारण) से घरों तक पानी नहीं पहुँच पा रहा है, जिससे लोग इस तपती गर्मी में पानी की एक-एक बूंद के लिए तरस रहे हैं।


सड़कों पर उतरा ग्रामीणों का गुस्सा

बिजली की समस्या से परेशान होकर जिले के विभिन्न उपखंडों, जैसे पदमपुर, रायसिंहनगर और गजसिंहपुर के आसपास के गांवों में ग्रामीणों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। आज, 28 अप्रैल को कई स्थानों पर ग्रिड सब-स्टेशनों (GSS) के बाहर ग्रामीणों ने धरना दिया और विभाग के खिलाफ नारेबाजी की।

ग्रामीणों का आरोप है कि शहरों में तो बिजली की निर्बाध आपूर्ति की जा रही है, लेकिन गांवों के साथ सौतेला व्यवहार हो रहा है। कुछ स्थानों पर किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि अगले 48 घंटों में बिजली आपूर्ति में सुधार नहीं हुआ, तो वे जिला मुख्यालय पर बड़ा आंदोलन करेंगे और चक्का जाम करेंगे।

विभाग का पक्ष और तकनीकी कारण

बिजली विभाग के अधिकारियों का कहना है कि गर्मी बढ़ने के कारण लोड अचानक बढ़ गया है। ट्रांसफार्मरों के गर्म होकर फुंकने और लाइनों में तकनीकी खराबी आने के कारण यह कटौती करनी पड़ रही है। विभाग के अनुसार, मांग और आपूर्ति के बीच का अंतर बढ़ गया है, जिसे संतुलित करने के लिए ‘लोड शेडिंग’ अनिवार्य हो गई है।


निष्कर्ष और समाधान की आवश्यकता

श्रीगंगानगर जैसे संवेदनशील और कृषि प्रधान जिले में बिजली केवल एक सुविधा नहीं, बल्कि एक आवश्यकता है। सरकार को चाहिए कि वह ग्रामीण क्षेत्रों के लिए एक निश्चित बिजली शेड्यूल जारी करे और अघोषित कटौती पर लगाम लगाए। साथ ही, पुराने हो चुके बुनियादी ढांचे (जर्जर तार और ओवरलोडेड ट्रांसफार्मर) को बदलने की तत्काल आवश्यकता है।

यदि प्रशासन ने इस दिशा में जल्द ही ठोस कदम नहीं उठाए, तो यह जन-आक्रोश किसी बड़ी कानून-व्यवस्था की स्थिति को जन्म दे सकता है। ग्रामीण भारत को ‘डिजिटल’ बनाने के दावों के बीच, बुनियादी बिजली की यह कमी एक गंभीर चिंता का विषय है।


अपडेट: ग्रामीणों ने स्थानीय विधायकों और जनप्रतिनिधियों को भी ज्ञापन सौंपकर इस समस्या के स्थायी समाधान की मांग की है।

©️ श्री गंगानगर न्यूज़ ©️