
श्रीगंगानगर। राजस्थान के सीमावर्ती जिले श्रीगंगानगर के रावला मंडी क्षेत्र से आज एक हृदय विदारक घटना सामने आई है। डंडी रोड पर स्थित एक टायर पंचर की दुकान में लगी भीषण आग ने न केवल एक गरीब परिवार की आजीविका को राख कर दिया, बल्कि इस हादसे में एक मासूम जान भी संकट में पड़ गई। यह घटना एक बार फिर इस बात की याद दिलाती है कि छोटी सी असावधानी किस कदर बड़े विनाश का कारण बन सकती है।
घटना का विवरण: कैसे शुरू हुई तबाही
मिली जानकारी के अनुसार, रावला मंडी के डंडी रोड पर स्थित एक छोटी सी पंचर की दुकान में रोज की तरह सुबह का कामकाज शुरू हुआ था। दुकान मालिक, जो अपनी धार्मिक आस्था के लिए जाने जाते हैं, दुकान खोलने के बाद नियमित रूप से पूजा-अर्चना कर रहे थे। पूजा के दौरान उन्होंने धूप-दीप जलाने के लिए माचिस की तीली जलाई।
प्रत्यक्षदर्शियों और पुलिस की प्रारंभिक जांच के अनुसार, पूजा करने के बाद जब उन्होंने जलती हुई माचिस की तीली को बुझाकर नीचे फेंका, तो वह तीली पूरी तरह बुझी नहीं थी। दुर्भाग्यवश, फर्श पर पहले से ही पेट्रोल या कोई अन्य ज्वलनशील पदार्थ बिखरा हुआ था। जैसे ही जलती हुई तीली उस पेट्रोल के संपर्क में आई, आग की एक लपट उठी।
देखते ही देखते विकराल हुआ मंजर
दुकान में भारी मात्रा में पुराने टायर, रबड़ के ट्यूब, ग्रीस और तेल जैसे अत्यंत ज्वलनशील पदार्थ रखे हुए थे। पेट्रोल से शुरू हुई आग ने पलक झपकते ही इन सामानों को अपनी चपेट में ले लिया। टायरों के जलने से निकलने वाले काले और जहरीले धुएं ने पूरे इलाके को अपनी आगोश में ले लिया, जिससे आसपास के लोगों में भगदड़ मच गई।
दुकान मालिक ने अपने स्तर पर आग बुझाने का प्रयास किया, लेकिन आग की लपटें इतनी तेज थीं कि कुछ ही मिनटों में दुकान की छत और दीवारों को झुलसाने लगीं। इस अफरा-तफरी के बीच, दुकान के अंदर मौजूद मालिक का बेटा आग की चपेट में आ गया। लपटों के बीच से उसे निकालते समय वह गंभीर रूप से झुलस गया। आनन-फानन में स्थानीय लोगों ने उसे निजी वाहन से नजदीकी अस्पताल पहुंचाया, जहां उसकी स्थिति नाजुक बताई जा रही है।
स्थानीय सहयोग और बचाव कार्य
आग की भयावहता को देखते हुए डंडी रोड पर यातायात थम गया। स्थानीय दुकानदारों और निवासियों ने मानवता का परिचय देते हुए तुरंत राहत कार्य शुरू किया। चूंकि रावला मंडी जैसे कस्बों में फायर ब्रिगेड की गाड़ियां पहुंचने में समय लगता है, इसलिए ग्रामीणों ने तुरंत निजी पानी के टैंकरों को फोन किया।
करीब 4 से 5 पानी के टैंकर मौके पर पहुंचे। स्थानीय युवाओं ने अपनी जान जोखिम में डालकर दुकान के आसपास की अन्य दुकानों को खाली करवाया ताकि आग आगे न फैले। लगभग दो घंटे की कड़ी मशक्कत और दर्जनों टैंकर पानी के छिड़काव के बाद आग पर काबू पाया जा सका। हालांकि, तब तक दुकान में रखा सारा सामान, मशीनें और मालिक की मेहनत की कमाई राख के ढेर में बदल चुकी थी।
प्रशासन और सुरक्षा पर सवाल
इस घटना ने क्षेत्र में अग्नि सुरक्षा मानकों और आपातकालीन सेवाओं की उपलब्धता पर फिर से सवाल खड़े कर दिए हैं।
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ज्वलनशील पदार्थों का असुरक्षित भंडारण: छोटी दुकानों में पेट्रोल और तेल का फर्श पर खुला रहना किसी बम की तरह है।
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फायर ब्रिगेड की दूरी: श्रीगंगानगर के दूरदराज के क्षेत्रों में आग लगने पर जिला मुख्यालय या नजदीकी बड़े केंद्र से दमकल आने में घंटों लग जाते हैं, जिससे नुकसान की संभावना बढ़ जाती है।
निष्कर्ष: सावधानी ही बचाव है
रावला मंडी की यह घटना एक सबक है। पूजा-पाठ या किसी भी अन्य गतिविधि के दौरान जब आसपास ज्वलनशील पदार्थ हों, तो अतिरिक्त सतर्कता बरतनी चाहिए। एक बुझी हुई माचिस की तीली अगर सही ढंग से नष्ट नहीं की जाती, तो वह न केवल संपत्ति बल्कि अपनों की जान के लिए भी खतरा बन सकती है। फिलहाल, पुलिस इस मामले की विस्तृत जांच कर रही है और प्रशासन से पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता दिलाने की मांग की जा रही है।