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श्रीगंगानगर की दोहरी मार: महँगा ईंधन और प्यासा कंठ — जनता का फूटा गुस्सा

भूमिका: सीमावर्ती जिले की अनसुनी चुनौतियां

राजस्थान का उत्तरी छोर, श्रीगंगानगर, इन दिनों भीषण गर्मी के साथ-साथ प्रशासनिक और आर्थिक विसंगतियों की आग में झुलस रहा है। एक तरफ आसमान से बरसती आग और $44.5^\circ \text{C}$ का तापमान है, तो दूसरी तरफ बुनियादी सुविधाओं—पानी, बिजली और किफायती ईंधन—के लिए संघर्ष। आज जिले के विभिन्न संगठनों और आम नागरिकों ने इन मुद्दों को लेकर कलेक्ट्रेट और तहसील मुख्यालयों पर प्रदर्शन किया।


1. पेट्रोल-डीजल: ‘पड़ोस में सस्ता, यहाँ महँगा’ का दर्द

श्रीगंगानगर के निवासियों के लिए सबसे बड़ी टीस पेट्रोल और डीजल की कीमतें हैं। वर्तमान में यहाँ पेट्रोल की कीमत ₹106 प्रति लीटर के पार बनी हुई है।

  • पड़ोसी राज्यों से तुलना: जिले की सीमा पंजाब और हरियाणा से लगती है, जहाँ ईंधन काफी सस्ता है। यहाँ तक कि राजस्थान के अन्य शहरों (जैसे जयपुर या बीकानेर) की तुलना में भी श्रीगंगानगर में वैट (VAT) और ट्रांसपोर्टेशन चार्जेस के नाम पर कीमतें अधिक हैं।

  • अर्थव्यवस्था पर असर: खेती प्रधान जिला होने के कारण ट्रैक्टरों और कृषि उपकरणों में भारी मात्रा में डीजल की खपत होती है। महँगे ईंधन ने किसानों की लागत बढ़ा दी है, जिससे उनकी आय पर सीधा प्रहार हो रहा है।


2. गहराता पेयजल संकट: बूंद-बूंद को तरसते गांव

जैसे-जैसे पारा चढ़ रहा है, जिले के ग्रामीण इलाकों में पानी की हाहाकार मच गई है। इंदिरा गांधी नहर परियोजना और गंगनहर पर निर्भर इस क्षेत्र में ‘बंदी’ और ‘लो-प्रेशर’ की समस्या ने विकराल रूप ले लिया है।

  • दूर-दराज की ढाणियाँ: सूरतगढ़, अनूपगढ़ और रायसिंहनगर के सीमावर्ती गांवों में स्थिति सबसे खराब है। महिलाएं कई किलोमीटर दूर से पानी लाने को मजबूर हैं।

  • टैंकर माफिया का बोलबाला: सरकारी सप्लाई ठप होने का फायदा उठाकर निजी टैंकर संचालक मनमाने दाम वसूल रहे हैं। एक टैंकर की कीमत ₹800 से ₹1200 तक पहुंच गई है, जो एक गरीब ग्रामीण के लिए असहनीय है।


3. सोलर योजना और बिजली पर ‘करंट’ मारता रोष

राज्य सरकार की ‘फ्री बिजली’ और ‘पीएम सूर्य घर’ जैसी योजनाओं को लेकर भी उपभोक्ताओं में असंतोष है।

  • सोलर कनेक्शन का विवाद: उपभोक्ताओं का आरोप है कि सोलर पैनल लगाने के बाद उन्हें मिलने वाली सब्सिडी और नेट-मीटरिंग के लाभ में देरी हो रही है। साथ ही, सोलर से मिलने वाली ‘कम यूनिट्स’ के कारण उनके पुराने बिलों में कोई खास रियायत नहीं मिल रही है।

  • घोषित कटौती: भीषण गर्मी में बिना पूर्व सूचना के होने वाली बिजली कटौती ने लोगों के सब्र का बांध तोड़ दिया है। शहरी क्षेत्रों में वोल्टेज की फ्लक्चुएशन से बिजली के उपकरण फुंक रहे हैं।


4. विरोध प्रदर्शन और ज्ञापन की राजनीति

आज संयुक्त संघर्ष समिति और विभिन्न नागरिक मंचों ने इन समस्याओं को लेकर विरोध प्रदर्शन किया।

  • कलेक्टर को ज्ञापन: प्रदर्शनकारियों ने जिला कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। उनकी प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं:

    1. श्रीगंगानगर में पेट्रोल-डीजल पर लगने वाले अतिरिक्त अधिभार को कम कर इसे राज्य के अन्य जिलों के बराबर लाया जाए।

    2. नहरों में पानी की नियमित बारी सुनिश्चित की जाए और टेल (अंतिम छोर) तक पानी पहुँचाया जाए।

    3. बिजली बिलों में विसंगतियों को दूर कर सोलर उपभोक्ताओं को उचित क्रेडिट दिया जाए।


5. क्या कहता है प्रशासन?

जिला प्रशासन का कहना है कि पेट्रोल की कीमतें बाजार और तेल कंपनियों की पॉलिसी पर निर्भर हैं, फिर भी रिपोर्ट सरकार को भेजी गई है। वहीं, पानी की समस्या के लिए नहरों में पानी की आवक बढ़ाने हेतु पंजाब सिंचाई विभाग से संपर्क किया जा रहा है।

निष्कर्ष: समाधान की प्रतीक्षा

श्रीगंगानगर की जनता का यह विरोध केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि अस्तित्व की लड़ाई है। ₹106 का पेट्रोल और सूखते गले के बीच आम आदमी पिस रहा है। यदि समय रहते इन मूलभूत समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में यह जन-आक्रोश और उग्र रूप धारण कर सकता है। प्रशासन को चाहिए कि वह ‘फ्री योजनाओं’ के विज्ञापनों से इतर धरातल पर पानी और बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित करे।


जनता की आवाज़: “हमें मुफ्त की रेवड़ियाँ नहीं, बल्कि उचित दाम पर पेट्रोल और घरों में नियमित पीने का पानी चाहिए।” — स्थानीय निवासी, गोल बाजार।

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