
श्रीगंगानगर। राजस्थान के सीमावर्ती जिले श्रीगंगानगर में इन दिनों रबी सीजन अपनी पूरी रंगत पर है। ‘राजस्थान के अन्न भंडार’ के रूप में प्रसिद्ध यह जिला इस समय कृषि गतिविधियों का मुख्य केंद्र बना हुआ है। जिले के खेतों से लेकर मंडियों तक, हर तरफ गेहूं और सरसों की कटाई, थ्रेसिंग और उठान का कार्य युद्धस्तर पर चल रहा है। 22 अप्रैल तक की स्थिति के अनुसार, जिले में रबी फसलों की कटाई अब अपने अंतिम चरण में प्रवेश कर चुकी है।
मंडियों में आवक का अंबार: ‘पीले सोने’ से पटी चौकियां
श्रीगंगानगर की मुख्य अनाज मंडी के साथ-साथ केसरीसिंहपुर, पदमपुर, रायसिंहनगर और सादुलशहर जैसी प्रमुख मंडियों में फसलों की भारी आवक देखी जा रही है। सुबह होते ही ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की लंबी कतारें मंडी के मुख्य द्वारों पर लग जाती हैं।
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गेहूं की गुणवत्ता: कृषि विभाग के विशेषज्ञों का मानना है कि इस वर्ष मौसम की अनुकूलता के कारण गेहूं के दाने की चमक और वजन पिछले साल की तुलना में काफी बेहतर है।
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सरसों का उत्पादन: सरसों की कटाई लगभग पूरी हो चुकी है और मंडियों में इसकी आवक अपने चरम पर है। तेल मिलों की मांग के चलते सरसों के भावों में भी स्थिरता बनी हुई है, जिससे किसान उत्साहित हैं।
मंडी प्रबंधन और किसानों की चिंताएं: चुनौतियां बरकरार
भले ही उपज अच्छी हुई है, लेकिन व्यवस्थागत कमियों ने किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। मंडियों से जो प्रमुख समस्याएं निकलकर सामने आ रही हैं, वे निम्नलिखित हैं:
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बारदाना (बोरी) की किल्लत: कई केंद्रों पर सरकारी खरीद के लिए आवश्यक जूट के बोरों की कमी देखी जा रही है। किसानों का कहना है कि फसल मंडी में आने के बावजूद बारदाना न होने के कारण तुलाई में देरी हो रही है।
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उठाव की धीमी गति: तुलाई होने के बाद बोरियों का मंडियों से गोदामों तक उठान (Transportation) बेहद धीमा है। इसके परिणामस्वरूप मंडियों के ‘फड़’ (Platform) बोरियों से पूरी तरह भर गए हैं, जिससे नई आने वाली ट्रॉलियों को खाली करने के लिए जगह नहीं बच रही है।
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मौसम का डर: आसमान में छिटपुट बादलों की आवाजाही और बढ़ते तापमान के बीच किसानों को डर है कि यदि उठान में देरी हुई और अचानक बेमौसम बारिश या आंधी आ गई, तो उनकी खुले में पड़ी फसल बर्बाद हो सकती है।
प्रशासनिक सक्रियता और समाधान के प्रयास
कृषि विभाग और मंडी समिति के अधिकारियों का कहना है कि वे स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। जिला प्रशासन ने ठेकेदारों को उठान की गति तेज करने के कड़े निर्देश दिए हैं। विभाग के अनुसार, “उपज की गुणवत्ता इस बार अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप है, जो किसानों को बेहतर मूल्य दिलाने में सहायक होगी।”
व्यापारियों का कहना है कि यदि लेबर और ट्रांसपोर्टेशन की समस्या को अगले 48 घंटों में हल कर लिया जाता है, तो सीजन का समापन सुचारु रूप से हो सकेगा। फिलहाल, किसान अपनी छह महीने की मेहनत का फल समेटने के लिए तपती दोपहर में भी मंडी की खाक छानने को मजबूर हैं।
आगामी दिनों का अनुमान
आने वाले एक सप्ताह के भीतर गेहूं की आवक में और तेजी आने की उम्मीद है क्योंकि सीमावर्ती इलाकों की फसलें भी अब मंडियों की ओर रुख कर रही हैं। कृषि जानकारों का सुझाव है कि किसान अपनी फसल को अच्छी तरह सुखाकर ही मंडी लाएं ताकि उन्हें नमी के कारण कम दाम न झेलने पड़ें।
संक्षेप में: श्रीगंगानगर की मंडियां इस समय समृद्धि और संघर्ष का संगम बनी हुई हैं। जहाँ एक ओर बंपर पैदावार खुशहाली का संकेत है, वहीं दूसरी ओर प्रशासनिक और लॉजिस्टिक कमियां इस उत्सव में बाधा डाल रही हैं। यह समय जिले की अर्थव्यवस्था के लिए सबसे महत्वपूर्ण है।