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श्रीगंगानगर: विधायक सेवा केंद्र बना अखाड़ा, सुलह वार्ता में जमकर चले लात-घूंसे

श्रीगंगानगर: शहर के विधायक सेवा केंद्र में आज उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब एक संवेदनशील मुद्दे पर बुलाई गई शांति बैठक अचानक हंगामे और मारपीट में तब्दील हो गई। शहर के एक रिहायशी इलाके में पुरानी चारदीवारी हटाने के विवाद को लेकर बुलाई गई यह सुलह वार्ता बिना किसी नतीजे के समाप्त हुई और स्थिति इतनी बिगड़ गई कि पुलिस को लाठियां भांजकर भीड़ को तितर-बितर करना पड़ा।


विवाद की जड़: वर्षों पुरानी चारदीवारी

यह पूरा मामला शहर के एक घनी आबादी वाले वार्ड से जुड़ा है, जहाँ एक सार्वजनिक रास्ते या निजी जमीन (दावे के अनुसार) पर बनी चारदीवारी को लेकर दो पक्षों के बीच पिछले कई वर्षों से कानूनी और सामाजिक विवाद चल रहा है। एक पक्ष का कहना है कि यह दीवार अवैध है और मोहल्ले के रास्ते को रोकती है, जबकि दूसरा पक्ष इसे अपनी पैतृक संपत्ति का हिस्सा बता रहा है। प्रशासन द्वारा कई बार नोटिस दिए जाने के बावजूद मामला सुलझ नहीं पा रहा था।

शांति की उम्मीद के साथ शुरू हुई बैठक

विवाद को सामाजिक स्तर पर निपटाने के लिए स्थानीय विधायक और कुछ गणमान्य नागरिकों की पहल पर आज दोपहर विधायक सेवा केंद्र में एक बैठक तय की गई थी। बैठक में दोनों पक्षों के लगभग 20-25 मुख्य लोग शामिल हुए थे। शुरुआत में वार्ता शांतिपूर्ण ढंग से शुरू हुई और दस्तावेजों पर चर्चा की गई। विधायक की मौजूदगी में प्रयास किया जा रहा था कि बीच का कोई रास्ता निकाला जाए ताकि मोहल्ले में आपसी भाईचारा बना रहे।


दलीलों से शुरू हुआ विवाद और फिर हंगामा

बैठक के लगभग आधे घंटे बीतने के बाद, जब एक पक्ष ने दीवार हटाने की बात पर सख्त रुख अपनाया, तो दूसरे पक्ष के लोग आक्रोशित हो गए। बहस की शुरुआत तीखी नोकझोंक से हुई, लेकिन जल्द ही मर्यादा की सीमाएं टूट गईं। विधायक सेवा केंद्र के भीतर ही दोनों पक्षों के लोग आमने-सामने आ गए और एक-दूसरे के खिलाफ नारेबाजी करने लगे।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, देखते ही देखते बात गाली-गलौज तक पहुँच गई और कुछ ही पलों में दोनों पक्षों के युवाओं के बीच धक्का-मुक्की और हाथापाई शुरू हो गई। कार्यालय के भीतर रखी कुर्सियां और मेज इधर-उधर फेंक दी गईं। विधायक और उनके निजी स्टाफ ने बीच-बचाव की कोशिश की, लेकिन आक्रोशित भीड़ को शांत करना मुश्किल हो गया।

पुलिस का हस्तक्षेप और लाठीचार्ज

विधायक सेवा केंद्र में हंगामे की सूचना मिलते ही पास के थाने से भारी पुलिस बल मौके पर पहुँचा। पुलिस अधिकारियों ने शुरुआत में समझाइश की कोशिश की, लेकिन जब केंद्र के बाहर समर्थकों की भीड़ जुटने लगी और पथराव की आशंका बढ़ी, तो पुलिस ने सख्त रुख अपनाया। पुलिस को परिसर खाली कराने के लिए हल्का बल प्रयोग (लाठीचार्ज) करना पड़ा। लगभग एक घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद विधायक सेवा केंद्र और उसके आसपास के इलाके को खाली कराया गया।


प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की प्रतिक्रिया

इस घटना के बाद विधायक ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि, “लोकतंत्र में संवाद ही समस्याओं का समाधान है, लेकिन आज की घटना ने साबित कर दिया कि कुछ असामाजिक तत्व शांति नहीं चाहते। हम केवल निष्पक्ष रूप से समाधान ढूंढने का प्रयास कर रहे थे।”

वहीं, पुलिस प्रशासन ने दोनों पक्षों के उपद्रवियों को चिह्नित कर लिया है। पुलिस अधीक्षक कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, शांति भंग करने और सरकारी कार्य में बाधा डालने के आरोप में कुछ लोगों को हिरासत में लिया गया है। इलाके में तनाव को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।

निष्कर्ष: समाधान की जगह बढ़ी दूरियां

आज की इस घटना ने चारदीवारी के विवाद को और अधिक पेचीदा बना दिया है। जो मामला आपसी बातचीत से सुलझ सकता था, वह अब पुलिस केस और मुकदमों में उलझ गया है। शहर के बुद्धिजीवियों का मानना है कि इस तरह के संवेदनशील मामलों में प्रशासन को अधिक सावधानी बरतनी चाहिए थी और बैठक स्थल पर पहले से पर्याप्त सुरक्षा बल तैनात होना चाहिए था।

फिलहाल, विधायक सेवा केंद्र के आसपास सुरक्षा कड़ी है और प्रशासन अब इस मामले को कानूनी रूप से हल करने की तैयारी कर रहा है।

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