
श्रीगंगानगर। सरहदी जिले श्रीगंगानगर में कानून व्यवस्था को चुनौती देने वाले असामाजिक तत्वों और गैंगस्टर नेटवर्क के खिलाफ स्थानीय पुलिस ने आज एक बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक की है। पंजाब और हरियाणा की सीमा से सटे इस संवेदनशील जिले में पुलिस ने कुख्यात लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े चार सक्रिय गुर्गों को दबोचकर एक बड़ी संभावित वारदात को टाल दिया है। यह कार्रवाई न केवल अपराध जगत के लिए एक कड़ा संदेश है, बल्कि आम जनमानस में पुलिस के प्रति विश्वास बहाली की दिशा में भी एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
गुप्त सूचना और घेराबंदी: कैसे चढ़े हत्थे?
पुलिस अधीक्षक (SP) के निर्देशन में गठित विशेष टीम और तकनीकी शाखा (Cyber Cell) पिछले कुछ दिनों से संदिग्ध नंबरों और सोशल मीडिया गतिविधियों पर नजर रख रही थी। पुलिस को पुख्ता मुखबिर से सूचना मिली थी कि लॉरेंस गैंग के कुछ गुर्गे श्रीगंगानगर शहर और आसपास के ग्रामीण इलाकों में किसी सनसनीखेज वारदात को अंजाम देने के लिए एकत्रित हुए हैं।
सूचना मिलते ही पुलिस ने जिले के प्रवेश द्वारों और संदिग्ध ठिकानों पर नाकाबंदी सख्त कर दी। देर रात एक गुप्त ठिकाने पर छापेमारी के दौरान पुलिस ने घेराबंदी कर इन चार आरोपियों को धर दबोचा। पुलिस की अचानक कार्रवाई से आरोपियों को संभलने या जवाबी फायरिंग का मौका तक नहीं मिला।
हथियारों का जखीरा: विदेशी पिस्टल और कारतूस बरामद
गिरफ्तार किए गए आरोपियों की तलाशी लेने पर पुलिस के भी कान खड़े हो गए। इनके पास से दो अत्याधुनिक विदेशी पिस्टल और 27 जिंदा कारतूस बरामद किए गए हैं। प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि ये हथियार अत्याधुनिक हैं और इन्हें सीमा पार या अंतरराज्यीय तस्करी के जरिए गैंग तक पहुंचाया गया था। इतनी बड़ी मात्रा में गोला-बारूद की मौजूदगी इस बात का स्पष्ट संकेत है कि ये अपराधी किसी सामान्य लूटपाट के इरादे से नहीं, बल्कि किसी हाई-प्रोफाइल व्यक्ति को निशाना बनाने या गैंगवार की मंशा से आए थे।
लॉरेंस गैंग का कनेक्शन और नेटवर्क
गिरफ्तार किए गए चारों युवक लॉरेंस बिश्नोई और गोल्डी बराड़ सिंडिकेट के ‘स्लीपर सेल’ की तरह काम कर रहे थे। पुलिस सूत्रों के अनुसार, ये आरोपी सीधे तौर पर गैंग के बड़े हैंडलर्स के संपर्क में थे, जो विदेशों या जेलों से इन्हें दिशा-निर्देश दे रहे थे। इनका मुख्य काम गैंग के लिए रंगदारी (Extortion) वसूलना, व्यापारियों को धमकाना और हथियारों की सुरक्षित लॉजिस्टिक्स सप्लाई सुनिश्चित करना था।
इन गुर्गों की गिरफ्तारी से पुलिस को उम्मीद है कि जिले में सक्रिय ‘रंगदारी नेटवर्क’ की कमर टूटेगी। श्रीगंगानगर के व्यापारियों और रसूखदार लोगों को पिछले कुछ समय से धमकी भरे कॉल आने की शिकायतें मिल रही थीं, जिनका सिरा इन्हीं आरोपियों से जुड़ा होने की आशंका है।
आगे की कार्रवाई: रिमांड और पूछताछ
फिलहाल, पुलिस ने चारों आरोपियों के खिलाफ आर्म्स एक्ट और विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। इन्हें कोर्ट में पेश कर पुलिस रिमांड पर लिया जाएगा। पुलिस पूछताछ के दौरान निम्नलिखित बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित करेगी:
-
इनका अगला टारगेट (Target) कौन था?
-
विदेशी पिस्टल की सप्लाई का मूल स्रोत क्या है?
-
जिले में इनके और कौन-कौन से मददगार या ‘लोकल सपोर्ट’ मौजूद हैं?
-
गैंग के सोशल मीडिया ग्रुप्स और इनके डिजिटल फुटप्रिंट्स की जांच।
पुलिस का सख्त संदेश
इस सफल ऑपरेशन के बाद पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि जिले में शांति भंग करने वाले किसी भी गैंग या अपराधी को बख्शा नहीं जाएगा। श्रीगंगानगर पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि यदि किसी भी व्यक्ति को धमकी भरे कॉल आते हैं या किसी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी मिलती है, तो वे तुरंत पुलिस को सूचित करें। आपकी पहचान गुप्त रखी जाएगी।
इस कार्रवाई ने यह साबित कर दिया है कि भले ही अपराधी तकनीक और आधुनिक हथियारों का सहारा ले रहे हों, लेकिन राजस्थान पुलिस की सतर्कता और सटीक सूचना तंत्र उनसे दो कदम आगे है। आज की यह गिरफ्तारी लॉरेंस गैंग के स्थानीय नेटवर्क के लिए एक बहुत बड़ा झटका है।