🢀
एशियाई कुश्ती चैंपियनशिप: बिश्केक में भारतीय पहलवानों का जलवा, 17 पदकों के साथ लहराया तिरंगा

बिश्केक (किर्गिस्तान): किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित एशियाई कुश्ती चैंपियनशिप 2026 का समापन भारतीय दल के लिए बेहद गौरवशाली रहा। भारतीय पहलवानों ने अपनी ताकत, तकनीक और जज्बे का लोहा मनवाते हुए इस प्रतिष्ठित महाद्वीपीय प्रतियोगिता में कुल 17 पदक अपने नाम किए। प्रतियोगिता के अंतिम दिन भारत की झोली में दो रजत और एक कांस्य पदक आए, जिससे पदक तालिका में भारत की स्थिति और मजबूत हुई।

हालांकि भारतीय प्रशंसक अंतिम दिन स्वर्ण पदक की उम्मीद लगाए बैठे थे, लेकिन अंतरराष्ट्रीय मंच पर 17 पदक जीतना भारतीय कुश्ती के भविष्य के लिए एक सुखद संकेत है।


अमन सहरावत का संघर्ष: स्वर्ण से चूके, पर जीता दिल

प्रतियोगिता के अंतिम दिन सभी की निगाहें टोक्यो ओलंपिक के उभरते सितारे और देश की बड़ी उम्मीद अमन सहरावत पर टिकी थीं। 57 किलोग्राम फ्रीस्टाइल वर्ग में अमन ने शुरुआत से ही आक्रामक खेल दिखाया। उन्होंने क्वार्टर फाइनल और सेमीफाइनल में अपने प्रतिद्वंद्वियों को तकनीकी श्रेष्ठता के आधार पर हराकर फाइनल में प्रवेश किया।

  • फाइनल मुकाबला: फाइनल में अमन का सामना किर्गिस्तान के स्थानीय पहलवान से था। घरेलू दर्शकों के भारी शोर के बीच अमन ने शुरुआती बढ़त बनाई, लेकिन अंतिम मिनटों में विपक्षी पहलवान ने शानदार ‘लेग अटैक’ करते हुए अंक जुटा लिए।

  • परिणाम: कड़े मुकाबले के बाद अमन को रजत पदक से संतोष करना पड़ा। भले ही वे स्वर्ण पदक से चूक गए, लेकिन उनकी रक्षात्मक तकनीक और फुर्ती ने खेल विशेषज्ञों को प्रभावित किया।

अंतिम दिन का लेखा-जोखा: 2 रजत और 1 कांस्य

अमन सहरावत के अलावा, भारत के एक अन्य युवा पहलवान ने भी फ्रीस्टाइल वर्ग में रजत पदक हासिल किया। वहीं, 74 किलोग्राम भार वर्ग में भारतीय पहलवान ने अपनी मेहनत के दम पर कांस्य पदक जीतकर अभियान का शानदार अंत किया।

अंतिम दिन के इन तीन पदकों ने भारत की कुल पदक संख्या को 17 तक पहुंचा दिया, जिसमें फ्रीस्टाइल, ग्रीको-रोमन और महिला कुश्ती तीनों वर्गों का योगदान शामिल है।

महिला पहलवानों का दबदबा

इस चैंपियनशिप की सबसे बड़ी उपलब्धि भारतीय महिला पहलवानों का प्रदर्शन रहा। महिला वर्ग में भारत ने न केवल पदक जीते, बल्कि जापान और ईरान जैसी कुश्ती की महाशक्तियों को कड़ी टक्कर दी। विनेश फोगाट और अंतिम पंघाल (यदि वे खेल रही थीं) जैसे नामों के मार्गदर्शन में युवा महिला पहलवानों ने एशियाई मंच पर अपनी नई पहचान बनाई।

17 पदकों का महत्व: आगामी पेरिस ओलंपिक की तैयारी

यह चैंपियनशिप केवल एक पदक जीतने का मंच नहीं थी, बल्कि यह आगामी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं, विशेषकर ओलंपिक क्वालीफायर के लिए एक महत्वपूर्ण टेस्ट था।

  • तकनीकी सुधार: भारतीय कोचों के अनुसार, पहलवानों ने ‘ग्राउंड रेसलिंग’ और ‘काउंटर अटैक’ में काफी सुधार किया है।

  • युवा प्रतिभा: 17 पदकों में से अधिकांश पदक उन युवाओं ने जीते हैं जो पहली या दूसरी बार एशियाई चैंपियनशिप में हिस्सा ले रहे थे। यह भारतीय कुश्ती में ‘बेंच स्ट्रेंथ’ की मजबूती को दर्शाता है।

चुनौतियां और सबक

भले ही भारत ने 17 पदक जीते, लेकिन स्वर्ण पदकों की संख्या कम होना आत्ममंथन का विषय है। फाइनल मुकाबलों में अंतिम क्षणों में अंक गंवाना एक ऐसी कमजोरी रही जिसे आने वाले शिविरों में सुधारना होगा।

“हमारे पहलवानों ने बिश्केक की कठिन परिस्थितियों में शानदार संघर्ष किया। 17 पदक जीतना बड़ी उपलब्धि है, लेकिन हमारा लक्ष्य इन पदकों के रंग को स्वर्ण में बदलना है। अमन और अन्य युवाओं ने जो अनुभव यहाँ हासिल किया है, वह ओलंपिक क्वालीफायर में काम आएगा।” — मुख्य कोच, भारतीय कुश्ती दल

निष्कर्ष

बिश्केक में भारतीय राष्ट्रगान की धुन और पोडियम पर तिरंगे की मौजूदगी ने साबित कर दिया कि एशिया में भारत अब भी कुश्ती की एक बड़ी शक्ति है। 17 पदकों के साथ अभियान का समापन करना भारतीय खेल प्रेमियों के लिए 15 अप्रैल का सबसे बड़ा उपहार है। अब इन पहलवानों का अगला पड़ाव विश्व स्तर की रैंकिंग सीरीज और ओलंपिक कोटा हासिल करना होगा।


पदक तालिका पर एक नजर (भारतीय दल):

  • कुल पदक: 17

  • अंतिम दिन का प्रदर्शन: 2 रजत, 1 कांस्य

  • मुख्य सितारा: अमन सहरावत (57 किलो, रजत)

  • आयोजन स्थल: बिश्केक, किर्गिस्तान

©️ श्री गंगानगर न्यूज़ ©️