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श्रीगंगानगर में जन समस्याओं को लेकर आक्रोश: अवैध टोल और अतिक्रमण के खिलाफ कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

श्रीगंगानगर। सरहदी जिले श्रीगंगानगर में जनहित के मुद्दों को लेकर राजनीतिक और सामाजिक संगठनों ने लामबंदी शुरू कर दी है। आज 15 अप्रैल को अखिल भारतीय खेत एवं ग्रामीण मजदूर यूनियन, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) और अन्य जन संगठनों ने संयुक्त रूप से जिला कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया और मुख्यमंत्री के नाम जिला कलेक्टर को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि इन ज्वलंत समस्याओं का समाधान शीघ्र नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में उग्र आंदोलन किया जाएगा।


1. श्रीगंगानगर-पदमपुर मार्ग: ‘अवैध’ टोल वसूली का मुद्दा

ज्ञापन में सबसे प्रमुख मुद्दा श्रीगंगानगर-पदमपुर मार्ग पर स्थित टोल प्लाजा का उठाया गया है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि इस मार्ग पर टोल वसूली की निर्धारित अवधि वर्ष 2024 में ही समाप्त हो चुकी है। बावजूद इसके, संबंधित कंपनी द्वारा आम जनता से जबरन टोल वसूला जा रहा है।

संगठनों का कहना है कि अवधि समाप्त होने के बाद टोल वसूली न केवल अनैतिक है, बल्कि कानूनी रूप से भी गलत है। इस मार्ग से प्रतिदिन हजारों की संख्या में किसान, मजदूर और व्यापारी गुजरते हैं, जिन पर यह अतिरिक्त वित्तीय बोझ डाला जा रहा है। ज्ञापन में मांग की गई है कि:

  • इस टोल प्लाजा को तुरंत प्रभाव से हटाया जाए

  • अब तक अवैध रूप से वसूले गए पैसे का हिसाब सार्वजनिक किया जाए।

  • मार्ग की जर्जर हालत को सुधारने के लिए पीडब्ल्यूडी (PWD) द्वारा मरम्मत कार्य शुरू किया जाए।

2. गेहूं की सरकारी खरीद और MSP की चुनौती

वर्तमान में रबी की फसल का सीजन चरम पर है। ऐसे में किसान और मजदूर संगठनों ने गेहूं की सरकारी खरीद (MSP) में हो रही देरी और अव्यवस्थाओं पर गहरा रोष व्यक्त किया है। ज्ञापन में कहा गया है कि कई केंद्रों पर बारदाने की कमी और तुलाई में देरी के कारण किसानों को मंडियों में रातें गुजारनी पड़ रही हैं।

माकपा नेताओं ने मांग की है कि:

  • न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर गेहूं की शत-प्रतिशत खरीद सुनिश्चित की जाए।

  • खरीद केंद्रों की संख्या बढ़ाई जाए ताकि सीमावर्ती क्षेत्रों के किसानों को दूर न जाना पड़े।

  • भुगतान प्रक्रिया में तेजी लाई जाए ताकि किसानों को फसल बेचने के 48 घंटों के भीतर पैसा मिल सके।

3. नेहरानगर और सद्भावनानगर: अतिक्रमण और मास्टर प्लान की मांग

शहर के विकास और बुनियादी ढांचे को लेकर भी ज्ञापन में तीखे सवाल उठाए गए हैं। संगठनों ने आरोप लगाया कि नेहरानगर और सद्भावनानगर जैसे क्षेत्रों में रसूखदारों द्वारा बड़े पैमाने पर सरकारी भूमि पर अतिक्रमण किया गया है।

इस अतिक्रमण के कारण:

  • नगर परिषद के मास्टर प्लान के अनुसार सड़कों का निर्माण नहीं हो पा रहा है।

  • नालियों और जल निकासी की व्यवस्था ठप पड़ी है, जिससे मामूली बारिश में भी क्षेत्र जलमग्न हो जाता है।

  • आम नागरिकों को संकरी गलियों और गंदगी के बीच रहने को मजबूर होना पड़ रहा है।

संगठनों की मांग है कि जिला प्रशासन एक विशेष अभियान चलाकर इन क्षेत्रों से अवैध कब्जे हटाए और मास्टर प्लान के अनुरूप चौड़ी सड़कों और पक्के नालों का निर्माण सुनिश्चित करे।

प्रशासन का आश्वासन और संगठनों की चेतावनी

ज्ञापन सौंपने के दौरान मजदूर यूनियन के नेताओं ने संबोधित करते हुए कहा कि प्रशासन केवल फाइलों में विकास की बातें कर रहा है, जबकि धरातल पर आम आदमी टोल माफिया और अतिक्रमणकारियों से त्रस्त है। जिला कलेक्टर की अनुपस्थिति में संबंधित अधिकारी ने ज्ञापन स्वीकार किया और आश्वासन दिया कि मांगों पर उचित कार्यवाही के लिए फाइल संबंधित विभागों को भेजी जाएगी।

हालांकि, अखिल भारतीय खेत एवं ग्रामीण मजदूर यूनियन ने स्पष्ट किया कि यदि एक सप्ताह के भीतर टोल वसूली बंद नहीं हुई और सरकारी खरीद में सुधार नहीं हुआ, तो वे जिला मुख्यालय का घेराव करेंगे और चक्का जाम जैसी कार्रवाई के लिए मजबूर होंगे।


निष्कर्ष

आज का यह विरोध प्रदर्शन इस बात का संकेत है कि श्रीगंगानगर में बुनियादी सुविधाओं और भ्रष्टाचार को लेकर जनता में गहरा असंतोष है। अब गेंद प्रशासन के पाले में है कि वह इन मांगों पर कितनी गंभीरता से कदम उठाता है। विशेष रूप से पदमपुर मार्ग का टोल जिला प्रशासन के लिए एक बड़ी परीक्षा साबित होगा।

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