
श्रीगंगानगर: राजस्थान के ‘अन्न भंडार’ कहे जाने वाले श्रीगंगानगर जिले में आज प्रकृति का एक ऐसा रूप देखने को मिला जिसने अन्नदाता की कमर तोड़ दी है। 9 अप्रैल की दोपहर के बाद अचानक बदले मौसम के मिजाज ने न केवल तापमान में गिरावट ला दी, बल्कि बेमौसम बारिश और भारी ओलावृष्टि ने खेतों में खड़ी और खलिहानों में पड़ी गेहूं की फसल को तहस-नहस कर दिया है।
फसलों की बर्बादी का मंजर
वर्तमान समय श्रीगंगानगर के किसानों के लिए सबसे महत्वपूर्ण होता है क्योंकि यह गेहूं और सरसों की कटाई व लावणी का समय है। पिछले कुछ दिनों से किसान अपनी मेहनत की कमाई को घर लाने की तैयारी में जुटे थे। लेकिन आज हुई मूसलाधार बारिश और चने के आकार के गिरे ओलों ने पूरी परिदृश्य को बदल दिया।
-
गेहूं की फसल को चोट: गेहूं की पकी हुई बालियां ओलों की मार झेल नहीं पाईं और जमीन पर बिछ गईं। ओलावृष्टि के कारण दाने बालियों से झड़कर जमीन पर गिर गए हैं, जिससे उत्पादन में भारी गिरावट आना तय है।
-
गुणवत्ता पर असर: कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि बारिश के कारण गेहूं के दाने का रंग काला पड़ सकता है और उसमें नमी बढ़ सकती है, जिससे मंडी में किसानों को सही दाम मिलने में कठिनाई होगी।
-
कटाई में बाधा: खेतों में पानी भर जाने के कारण कंबाइन हार्वेस्टर और अन्य मशीनें अब कई दिनों तक खेत में नहीं उतर सकेंगी, जिससे कटाई का काम पिछड़ जाएगा।
किसानों की बढ़ती चिंताएं
श्रीगंगानगर और आसपास के चक क्षेत्रों (जैसे पदमपुर, रायसिंहनगर और सादुलशहर) के किसानों के चेहरों पर मायूसी छाई हुई है। एक पीड़ित किसान का कहना है, “हमने साल भर खून-पसीना एक करके फसल पाली थी। जब उसे घर ले जाने का वक्त आया, तो कुदरत ने सब छीन लिया। अब न केवल अगली फसल के लिए बीज और खाद का संकट है, बल्कि कर्ज चुकाने की चिंता भी सता रही है।”
ओलावृष्टि न केवल वर्तमान फसल को नुकसान पहुँचाती है, बल्कि मिट्टी की नमी और तापमान के संतुलन को भी बिगाड़ देती है, जिससे आने वाली खरीफ की फसलों की तैयारी पर भी असर पड़ता है।
सरकार से गिरदावरी और मुआवजे की गुहार
इस प्राकृतिक आपदा के बाद जिले भर के किसान संगठनों ने सरकार और जिला प्रशासन के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की है। किसानों की मुख्य मांगें निम्नलिखित हैं:
-
विशेष गिरदावरी: प्रशासन तुरंत प्रभाव से पटवारियों और कृषि विभाग के अधिकारियों को खेतों में भेजकर नुकसान का सटीक आकलन (गिरदावरी) करवाए।
-
उचित मुआवजा: जिन किसानों की फसल 50% से अधिक खराब हुई है, उन्हें आपदा राहत कोष और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत तत्काल मुआवजा दिया जाए।
-
मंडी में रियायत: भीगी हुई फसल को मंडी में बेचने के दौरान नमी के नियमों में ढील दी जाए ताकि किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) मिल सके।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला कलेक्टर ने उपखंड अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करें। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि नुकसान की रिपोर्ट तैयार कर राज्य सरकार को भेजी जाएगी ताकि राहत कार्यों को गति दी जा सके। हालांकि, किसानों का कहना है कि कागजी कार्रवाई में होने वाली देरी अक्सर उनकी परेशानियों को बढ़ा देती है, इसलिए उन्हें “त्वरित सहायता” की आवश्यकता है।
निष्कर्ष
श्रीगंगानगर का किसान आज दोहरी मार झेल रहा है—एक तरफ बढ़ती लागत और दूसरी तरफ मौसम की बेरुखी। यदि समय रहते सरकार ने उचित कदम नहीं उठाए, तो इस सीमावर्ती जिले की अर्थव्यवस्था पर गहरा नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। आज की यह ओलावृष्टि केवल एक प्राकृतिक घटना नहीं, बल्कि हजारों परिवारों के आर्थिक भविष्य पर एक बड़ा प्रहार है। प्रशासन को चाहिए कि वह संवेदनशीलता दिखाते हुए अन्नदाता के इन घावों पर मरहम लगाए।