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श्रीगंगानगर: शिक्षा का उजियारा पहुँचाने की पहल; ‘प्रवेशोत्सव’ अभियान से चहकेंगे सरकारी स्कूल

श्रीगंगानगर | 

शिक्षा ही वह नींव है जिस पर भविष्य की बुलंद इमारत खड़ी होती है। इसी संकल्प के साथ श्रीगंगानगर जिले में नया शैक्षणिक सत्र शुरू होते ही शिक्षा विभाग ने अपने सबसे महत्वाकांक्षी अभियान “प्रवेशोत्सव-2026” को युद्ध स्तर पर शुरू कर दिया है। जिले के सरकारी स्कूलों में नामांकन बढ़ाने और ‘ड्रॉप-आउट’ (बीच में पढ़ाई छोड़ने वाले) बच्चों को वापस मुख्यधारा से जोड़ने के लिए विभाग ने विशेष रणनीति तैयार की है।

घर-घर दस्तक: शिक्षकों का अनूठा समर्पण

भीषण गर्मी की सुगबुगाहट के बीच, जिले के सरकारी स्कूलों के शिक्षकों की टोलियां सुबह-सुबह ही ग्रामीण और ढाणियों के क्षेत्रों में सक्रिय देखी जा सकती हैं। ये शिक्षक केवल कर्मचारी बनकर नहीं, बल्कि शिक्षा के दूत बनकर घर-घर जाकर अभिभावकों को जागरूक कर रहे हैं।

  • काउंसलिंग का दौर: शिक्षकों द्वारा उन परिवारों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है जो आर्थिक तंगी या जागरूकता की कमी के कारण अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेज रहे हैं।

  • बालिका शिक्षा पर जोर: “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” के नारे को चरितार्थ करते हुए बालिकाओं के नामांकन को प्राथमिकता दी जा रही है। शिक्षकों द्वारा अभिभावकों को बताया जा रहा है कि आज की बेटियां किसी भी क्षेत्र में बेटों से कम नहीं हैं।

सरकारी योजनाओं का ‘कवच’

नामांकन बढ़ाने के लिए विभाग केवल अपील ही नहीं कर रहा, बल्कि सरकार द्वारा दी जाने वाली सुविधाओं का पूरा खाका भी अभिभावकों के सामने रख रहा है। “प्रवेशोत्सव” के दौरान निम्नलिखित प्रमुख आकर्षणों पर जोर दिया जा रहा है:

  1. मुफ्त पाठ्यपुस्तकें और ड्रेस: स्कूल में प्रवेश लेते ही बच्चों को नि:शुल्क किताबें और यूनिफॉर्म के लिए सहायता राशि उपलब्ध कराई जा रही है।

  2. मिड-डे मील की गुणवत्ता: बच्चों के पोषण का ख्याल रखते हुए पौष्टिक भोजन और सप्ताह में निश्चित दिन दूध वितरण की योजना को और सुदृढ़ किया गया है।

  3. छात्रवृत्ति योजनाएं: अनुसूचित जाति, जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के साथ-साथ अल्पसंख्यक समुदाय के मेधावी छात्रों के लिए विभिन्न छात्रवृत्ति योजनाओं की जानकारी दी जा रही है।

  4. तकनीकी शिक्षा: अब सरकारी स्कूलों में भी स्मार्ट क्लासेज और कंप्यूटर लैब की सुविधा उपलब्ध है, जिससे ग्रामीण परिवेश के बच्चे भी डिजिटल इंडिया का हिस्सा बन सकें।

‘ड्रॉप-आउट’ मुक्त जिला बनाने का लक्ष्य

शिक्षा विभाग का मुख्य लक्ष्य उन बच्चों को खोजना है जिन्होंने प्राथमिक शिक्षा के बाद स्कूल छोड़ दिया या जो कभी स्कूल गए ही नहीं। श्रीगंगानगर के मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी (CDEO) के अनुसार, इस बार प्रत्येक ब्लॉक वार डेटा तैयार किया गया है। ईंट-भट्टों पर काम करने वाले मजदूरों के बच्चों और घुमंतू परिवारों के बच्चों के लिए विशेष “चलित विद्यालय” या नजदीकी केंद्रों पर नामांकन सुनिश्चित किया जा रहा है।

समुदाय की भागीदारी और बाल सभाएं

अभियान को केवल सरकारी कार्यक्रम न बनाकर जन-आंदोलन का रूप दिया जा रहा है। गांवों के सार्वजनिक स्थानों पर ‘बाल सभाओं’ का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें पूर्व छात्र जो अब सफल पदों पर हैं, वे अपने अनुभव साझा कर रहे हैं। इससे अभिभावकों में सरकारी स्कूलों के प्रति विश्वास बढ़ रहा है।

प्रशासनिक निगरानी

जिला प्रशासन ने सभी पीईईओ (PEEO) को निर्देश दिए हैं कि वे अपने क्षेत्र के प्रत्येक बच्चे का नामांकन सुनिश्चित करें। साप्ताहिक समीक्षा बैठकों के माध्यम से नामांकन के आंकड़ों की निगरानी की जा रही है। लक्ष्य यह है कि श्रीगंगानगर जिला शिक्षा के क्षेत्र में राजस्थान के अग्रणी जिलों में शुमार हो।

निष्कर्ष

“प्रवेशोत्सव” केवल एक अभियान नहीं, बल्कि उन हजारों बच्चों के सपनों को पंख देने की कोशिश है जो संसाधनों के अभाव में पीछे रह जाते हैं। श्रीगंगानगर के शिक्षकों का यह जोश और सरकार की कल्याणकारी नीतियां यदि इसी तरह साथ चलती रहीं, तो निश्चित ही जिले का कोई भी बच्चा शिक्षा के उजाले से वंचित नहीं रहेगा।


अपील: यदि आपके आस-पास कोई बच्चा स्कूल नहीं जा रहा है, तो उसकी सूचना नजदीकी सरकारी स्कूल में दें और एक उज्ज्वल भविष्य बनाने में मदद करें।

©️ श्री गंगानगर न्यूज़ ©️