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श्रीविजयनगर में नई ऑनलाइन गेहूं खरीद व्यवस्था का विरोध: किसानों और प्रशासन के बीच बढ़ता तनाव

श्रीगंगानगर/श्रीविजयनगर: राजस्थान के अन्न भंडार कहे जाने वाले श्रीगंगानगर जिले के श्रीविजयनगर उपखंड में इन दिनों गेहूं की सरकारी खरीद को लेकर माहौल गरमाया हुआ है। सरकार द्वारा लागू की गई नई ऑनलाइन पंजीयन व्यवस्था और ‘स्लॉट सिस्टम’ के विरोध में किसानों का धैर्य जवाब दे गया है। अखिल भारतीय किसान सभा के बैनर तले सैकड़ों किसानों और स्थानीय व्यापारियों ने उपखंड मुख्यालय पर जोरदार प्रदर्शन किया और व्यवस्था में तत्काल सुधार की मांग की।


विरोध का मुख्य कारण: जटिल डिजिटल प्रक्रिया

किसानों के विरोध का सबसे बड़ा कारण पोर्टल की जटिलता और जनआधार कार्ड की अनिवार्यता है। प्रदर्शनकारी किसानों का कहना है कि नई व्यवस्था ग्रामीण वास्तविकता से कोसों दूर है।

  • जनआधार की अनिवार्यता: किसानों का आरोप है कि सरकार ने फसल बेचने के लिए जनआधार कार्ड को अनिवार्य कर दिया है। जिले के कई परिवारों में जमीन बुजुर्गों या महिलाओं के नाम पर है, जिनके जनआधार कार्ड में मोबाइल नंबर अपडेट नहीं हैं या बायोमेट्रिक मिलान में तकनीकी दिक्कतें आ रही हैं। इस कारण वे अपना पंजीकरण नहीं करा पा रहे हैं।

  • स्लॉट सिस्टम की विफलता: नई व्यवस्था के तहत किसानों को ऑनलाइन स्लॉट बुक करना होता है कि वे किस दिन अपनी फसल मंडी लाएंगे। किसानों का कहना है कि सर्वर डाउन होने के कारण स्लॉट बुक नहीं हो रहे हैं। पकी हुई फसल खेतों में खड़ी है और मौसम विभाग ने आंधी-बारिश का अलर्ट जारी कर रखा है, ऐसे में स्लॉट के इंतजार में किसान अपनी साल भर की मेहनत को बर्बाद होते नहीं देख सकते।

व्यापारियों और किसानों का साझा मोर्चा

इस आंदोलन की खास बात यह है कि इसमें केवल किसान ही नहीं, बल्कि मंडी के व्यापारी भी शामिल हैं। व्यापारियों का तर्क है कि नई व्यवस्था से मंडियों में आवक प्रभावित हो रही है और कागजी औपचारिकताएं इतनी बढ़ गई हैं कि सामान्य व्यापार करना मुश्किल हो गया है। अखिल भारतीय किसान सभा के पदाधिकारियों ने संबोधन में कहा कि सरकार “डिजिटल इंडिया” के नाम पर उन किसानों को परेशान कर रही है जिनके पास न तो स्मार्ट फोन है और न ही इंटरनेट की अच्छी सुविधा।


पुरानी ‘गिरदावरी’ व्यवस्था की मांग

किसानों की प्रमुख मांग है कि सरकार तत्काल प्रभाव से इस ऑनलाइन पोर्टल की अनिवार्यता को समाप्त करे और पुरानी ‘मैनुअल गिरदावरी’ व्यवस्था को बहाल करे। पुरानी व्यवस्था में पटवारी द्वारा जारी गिरदावरी के आधार पर किसान आसानी से अपनी फसल बेच लेते थे। किसानों का कहना है कि जब तक तकनीकी खामियां दूर नहीं होतीं, तब तक वैकल्पिक व्यवस्था दी जानी चाहिए ताकि मंडियों में खरीद सुचारू रूप से शुरू हो सके।

प्रशासन का रुख और संभावित संकट

प्रदर्शन के दौरान किसानों ने उपखंड अधिकारी (SDM) को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। प्रशासन का कहना है कि यह व्यवस्था पारदर्शिता लाने और बिचौलियों को रोकने के लिए बनाई गई है। हालांकि, अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि तकनीकी समस्याओं को उच्च स्तर पर अवगत कराया जाएगा।

आने वाले खतरे:

  1. फसल बर्बादी: यदि खरीद में देरी हुई, तो बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से किसानों को भारी आर्थिक नुकसान होगा।

  2. आंदोलन का विस्तार: किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि अगले दो दिनों में उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो वे चक्का जाम करेंगे और मंडियों में बेमियादी हड़ताल शुरू कर देंगे।

निष्कर्ष

श्रीविजयनगर का यह विरोध प्रदर्शन इस बात का प्रतीक है कि किसी भी तकनीकी सुधार को लागू करने से पहले जमीनी स्तर की तैयारी और किसानों की साक्षरता का ध्यान रखना कितना अनिवार्य है। वर्तमान में किसान दोहरी मार झेल रहा है—एक तरफ प्रकृति का डर और दूसरी तरफ सिस्टम की पेचीदगियां। अब गेंद सरकार के पाले में है कि वह तकनीक और परंपरा के बीच कैसे संतुलन बिठाती है।

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