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सीमा पर सुरक्षा बलों की सर्जिकल स्ट्राइक: श्रीकरणपुर में ड्रोन वाली साजिश नाकाम, 60 करोड़ की हेरोइन बरामद

श्रीकरणपुर (श्रीगंगानगर): भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा पर स्थित श्रीगंगानगर जिले के श्रीकरणपुर क्षेत्र में सुरक्षा एजेंसियों ने नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाइयों में से एक को अंजाम दिया है। सीमा पार बैठे तस्करों और भारतीय क्षेत्र के स्थानीय नेटवर्क के नापाक इरादों को ध्वस्त करते हुए सीमा सुरक्षा बल (BSF) और राजस्थान पुलिस ने एक संयुक्त ऑपरेशन में 12.167 किलोग्राम उच्च गुणवत्ता वाली हेरोइन जब्त की है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस खेप की कीमत लगभग 60 करोड़ रुपये बताई जा रही है।

ड्रोन की गूंज और मुस्तैद सुरक्षा बल

घटनाक्रम की शुरुआत देर रात हुई जब सीमा पर तैनात BSF के जवानों ने सीमा पार से एक संदिग्ध ड्रोन की आवाज सुनी। आधुनिक तकनीक से लैस यह ड्रोन पाकिस्तानी सीमा से भारतीय क्षेत्र में घुसपैठ कर रहा था। जवानों ने तुरंत मोर्चा संभाला और इलाके की घेराबंदी शुरू कर दी। घने अंधेरे का फायदा उठाकर तस्करों ने ड्रोन के जरिए पैकेट गिराए और ड्रोन वापस सीमा पार उड़ गया।

BSF ने इस सूचना को तुरंत स्थानीय पुलिस और खुफिया एजेंसियों के साथ साझा किया। इसके बाद शुरू हुआ एक व्यापक ‘कॉम्बिंग ऑपरेशन’, जिसमें पुलिस और सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया।

ऑपरेशन की सफलता: 12 किलो से ज्यादा हेरोइन बरामद

सर्च ऑपरेशन के दौरान सुरक्षा बलों को सीमा के पास स्थित खेतों से पीले रंग के टेप में लिपटे हुए कई संदिग्ध पैकेट मिले। जब इन पैकेटों की बारीकी से जांच की गई, तो उनमें सफेद पाउडर मिला, जिसे जांच किट के जरिए हेरोइन (नार्कोटिक्स) होने की पुष्टि की गई। वजन करने पर यह मात्रा 12.167 किलोग्राम निकली।

नार्कोटिक्स विशेषज्ञों के अनुसार, इतनी बड़ी मात्रा में हेरोइन की बरामदगी यह संकेत देती है कि सीमा पार से एक बड़े नेटवर्क को सक्रिय करने की कोशिश की जा रही थी। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस ड्रग्स की शुद्धता बहुत अधिक है, जिससे इसकी कीमत करोड़ों में पहुंच गई है।

स्थानीय तस्करों का नेटवर्क ध्वस्त: 4 गिरफ्तार

केवल ड्रग्स बरामद करना ही पुलिस की उपलब्धि नहीं रही, बल्कि इस बार पुलिस ने उस स्थानीय नेटवर्क पर भी वार किया है जो खेप लेने के लिए मौके पर मौजूद था। श्रीकरणपुर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इलाके की नाकाबंदी की और संदिग्ध वाहनों की जांच शुरू की।

इस दौरान 4 स्थानीय तस्करों को गिरफ्तार किया गया है, जो इस खेप की डिलीवरी लेने के लिए सीमावर्ती क्षेत्र में छिपे हुए थे। प्रारंभिक पूछताछ में सामने आया है कि ये तस्कर पिछले कुछ समय से पाकिस्तानी हैंडलर्स के संपर्क में थे और उन्हें इस खेप को पंजाब और दिल्ली के बाजारों तक पहुंचाना था।

सुरक्षा चुनौतियों का नया चेहरा: ‘ड्रोन वॉरफेयर’

यह कार्रवाई इस बात की पुष्टि करती है कि अब पारंपरिक तस्करी की जगह ड्रोन तकनीक ने ले ली है। श्रीगंगानगर जिले की लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा पर पिछले कुछ महीनों में ड्रोन की गतिविधियां बढ़ी हैं। सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह एक बड़ी चुनौती है क्योंकि ये ड्रोन कम ऊंचाई पर उड़ते हैं और रडार की नजर से बच निकलते हैं।

हालांकि, राजस्थान पुलिस और BSF का बेहतर समन्वय (Coordination) अब तस्करों पर भारी पड़ रहा है। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि पकड़े गए आरोपियों से गहन पूछताछ की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस रैकेट के तार और कहां-कहां जुड़े हैं।

निष्कर्ष और समाज पर असर

श्रीकरणपुर में हुई यह कार्रवाई केवल एक जब्ती नहीं है, बल्कि यह उन हजारों युवाओं की जिंदगी बचाने जैसा है जो इस “सफेद जहर” की चपेट में आ सकते थे। सीमावर्ती जिलों में नशे का बढ़ता कारोबार एक गंभीर सामाजिक चिंता का विषय है। सुरक्षा बलों की इस मुस्तैदी ने स्पष्ट संदेश दिया है कि भारत की सीमाओं पर परिंदा भी पर नहीं मार सकता।

स्थानीय ग्रामीणों से भी अपील की गई है कि वे किसी भी संदिग्ध गतिविधि या रात के समय आसमान में उड़ने वाले अनजान यंत्रों की जानकारी तुरंत पुलिस को दें। इस बड़ी कामयाबी से तस्करों के हौसले पस्त हुए हैं, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां अभी भी हाई अलर्ट पर हैं।

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