
श्रीगंगानगर/अनूपगढ़: राजस्थान के सीमावर्ती जिले श्रीगंगानगर के अनूपगढ़ कस्बे से एक ऐसी हृदयविदारक खबर सामने आई है, जिसने न केवल एक परिवार को उजाड़ दिया, बल्कि पूरे क्षेत्र के लोगों की रूह कंपा दी है। सोमवार की सुबह, जो हर रोज की तरह सामान्य उम्मीदों के साथ शुरू हुई थी, देखते ही देखते एक मातम भरे सन्नाटे में बदल गई। अनूपगढ़ के वार्ड नंबर 34 में बिजली की एक छोटी सी लापरवाही ने एक मां और उसकी तीन साल की मासूम बेटी को मौत की आगोश में सुला दिया।
घटना का घटनाक्रम: एक पल की चूक और भारी कीमत
जानकारी के अनुसार, घटना सोमवार सुबह की है जब घर में दैनिक कार्यों की तैयारी चल रही थी। वार्ड नंबर 34 की निवासी 34 वर्षीय सरोज अपने घर के कामों में व्यस्त थी। सुबह के समय पानी गर्म करने के लिए बाल्टी में बिजली की इमर्शन रॉड (Electric Heating Rod) लगाई गई थी। अक्सर घरों में इस्तेमाल होने वाला यह उपकरण कितना घातक हो सकता है, इसका अंदाजा शायद उस वक्त किसी को नहीं था।
बताया जा रहा है कि सरोज की 3 साल की मासूम बेटी, दिव्यांशी, खेलते-खेलते अचानक उस बाल्टी के पास पहुँच गई जिसमें रॉड लगी हुई थी। अबोध बच्ची को खतरे का आभास नहीं था और उसने खेल-खेल में अपना हाथ पानी की बाल्टी में डाल दिया। बाल्टी में करंट दौड़ रहा था, जिसकी चपेट में आते ही मासूम दिव्यांशी बुरी तरह झुलसने लगी और तड़पने लगी।
ममता की पुकार और आत्मबलिदान
जैसे ही सरोज की नजर अपनी तड़पती हुई बच्ची पर पड़ी, उसकी ममता जाग उठी। एक मां के लिए अपनी आंखों के सामने अपनी संतान को संकट में देखना असहनीय होता है। बिना अपनी जान की परवाह किए और बिना यह सोचे कि बिजली का प्रवाह कितना शक्तिशाली हो सकता है, सरोज अपनी बेटी को बचाने के लिए उसकी ओर झपटी। जैसे ही उसने दिव्यांशी को पकड़कर खींचने की कोशिश की, बिजली के जोरदार झटके ने उसे भी अपनी चपेट में ले लिया।
करंट इतना शक्तिशाली था कि मां-बेटी दोनों बाल्टी के पास ही अचेत होकर गिर पड़े। घर के अन्य सदस्यों और पड़ोसियों को जब इस बात का पता चला, तो तुरंत बिजली का स्विच बंद किया गया और आनन-फानन में दोनों को अनूपगढ़ के राजकीय अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में डॉक्टरों ने प्राथमिक जांच के बाद दोनों को मृत घोषित कर दिया।
अस्पताल का मंजर और क्षेत्र में शोक
जैसे ही डॉक्टरों ने मां-बेटी की मौत की पुष्टि की, अस्पताल परिसर चीख-पुकार से गूंज उठा। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। वार्ड नंबर 34 के निवासी और अनूपगढ़ के स्थानीय लोग बड़ी संख्या में अस्पताल के बाहर जमा हो गए। हर किसी की आंखों में आंसू थे और जुबान पर सिर्फ एक ही बात थी कि “काश, वह रॉड थोड़ी सावधानी से रखी होती।”
पुलिस प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और शवों का पोस्टमार्टम करवाकर उन्हें परिजनों को सौंप दिया। सोमवार शाम को जब मां-बेटी की अर्थियां एक साथ उठीं, तो पूरे कस्बे की आंखें नम थीं।
एक गंभीर चेतावनी: बिजली के उपकरणों से सुरक्षा
यह घटना केवल एक हादसा नहीं, बल्कि उन हजारों परिवारों के लिए एक गंभीर चेतावनी है जो बिजली के उपकरणों का इस्तेमाल करते समय लापरवाही बरतते हैं। विशेषकर सर्दियों या सुबह के समय पानी गर्म करने वाली रॉड का उपयोग करते समय निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना अनिवार्य है:
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बच्चों की पहुंच से दूर: बिजली के बोर्ड और पानी की बाल्टी हमेशा ऐसी ऊंचाई या स्थान पर होनी चाहिए जहां छोटे बच्चे न पहुंच सकें।
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स्विच बंद करना न भूलें: बाल्टी में हाथ डालने या पानी चेक करने से पहले हमेशा प्लग को सॉकेट से बाहर निकाल देना चाहिए।
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अर्थिंग की जांच: घरों में बिजली की वायरिंग और अर्थिंग (Earthing) की नियमित जांच करवानी चाहिए ताकि शॉर्ट सर्किट या करंट फैलने का खतरा न रहे।
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प्लास्टिक की बाल्टी का प्रयोग: हमेशा इंसुलेटेड या अच्छी गुणवत्ता वाली प्लास्टिक की बाल्टी का ही उपयोग करें।
अनूपगढ़ की इस दुखद घटना ने एक हंसते-खेलते परिवार को कभी न भरने वाला जख्म दिया है। सरोज ने अपनी बेटी को बचाने के चक्कर में अपनी जान दे दी, जो मां के निस्वार्थ प्रेम का सबसे बड़ा उदाहरण है, लेकिन इस प्रेम की कीमत बहुत बड़ी चुकानी पड़ी। प्रशासन और जागरूक नागरिकों का यही कर्तव्य है कि वे ऐसी घटनाओं से सीख लें और सुरक्षा मानकों के प्रति सजग रहें।