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श्रीगंगानगर: पदमपुर रोड पर कुदरत का कहर, चलती कार पर गिरा भारी पेड़; हादसे में दो की मौत, तीन घायल

श्रीगंगानगर। राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले से एक हृदयविदारक समाचार सामने आया है। पदमपुर मार्ग पर शनिवार, 4 अप्रैल को एक ऐसी अनहोनी हुई जिसने हंसते-खेलते परिवार की खुशियों को मातम में बदल दिया। एक चलती कार पर अचानक सड़क किनारे खड़े पुराने पेड़ की भारी-भरकम टहनी गिर गई, जिससे कार अनियंत्रित होकर पलट गई। इस दर्दनाक हादसे में दो व्यक्तियों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक मासूम बच्ची सहित परिवार के तीन अन्य सदस्य गंभीर रूप से घायल हो गए।

हादसे का घटनाक्रम: पलक झपकते ही मची चीख-पुकार

जानकारी के अनुसार, यह हादसा दोपहर के समय पदमपुर रोड पर हुआ। कार सवार परिवार श्रीगंगानगर शहर की ओर आ रहा था। चश्मदीदों के मुताबिक, कार अपनी सामान्य गति पर थी, तभी अचानक सड़क किनारे खड़े एक विशाल पेड़ की सूखी और भारी टहनी टूटकर सीधे कार की छत पर जा गिरी। टहनी इतनी भारी थी कि कार का अगला हिस्सा पूरी तरह पिचक गया और चालक का संतुलन बिगड़ गया।

संतुलन खोने के बाद कार सड़क से नीचे उतरकर दो-तीन बार पलटी और एक बिजली के खंभे से जा टकराई। हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई। आसपास के खेतों में काम कर रहे लोग और वहां से गुजर रहे राहगीर तुरंत मदद के लिए दौड़े।

बचाव कार्य और राहत

हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और एम्बुलेंस मौके पर पहुंची। कार की स्थिति इतनी खराब थी कि उसमें फंसे लोगों को निकालने के लिए कटर का इस्तेमाल करना पड़ा। ग्रामीणों और पुलिस ने मिलकर घायलों को बाहर निकाला।

  • मृतकों की शिनाख्त: हादसे में कार चला रहे व्यक्ति और उसके पास वाली सीट पर बैठे एक बुजुर्ग की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई।

  • घायलों की स्थिति: कार के पीछे की सीट पर बैठी एक महिला, एक पुरुष और लगभग 5 वर्षीय बच्ची गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें तत्काल जिला अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया है। डॉक्टरों के अनुसार, महिला और बच्ची की हालत नाजुक बनी हुई है और उन्हें आईसीयू (ICU) में शिफ्ट किया गया है।

प्रशासनिक लापरवाही पर उठे सवाल

इस हादसे ने एक बार फिर वन विभाग और सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि पदमपुर रोड और जिले के अन्य मुख्य मार्गों पर ऐसे दर्जनों पेड़ हैं जो काफी पुराने और खोखले हो चुके हैं।

  • सूखी टहनियों का खतरा: ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने कई बार प्रशासन को इन खतरनाक पेड़ों और लटकी हुई सूखी टहनियों के बारे में सूचित किया था, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया।

  • सुरक्षा की अनदेखी: हर साल मानसून और अंधड़ के मौसम से पहले इन पेड़ों की छंटाई होनी चाहिए, लेकिन विभागीय सुस्ती के कारण आज दो लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी।

जांच और मुआवजा

घटनास्थल पर पहुंचे पुलिस अधिकारियों ने बताया कि शवों को पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी में रखवा दिया गया है और परिजनों को सूचित कर दिया गया है। पुलिस मामले की गहनता से जांच कर रही है कि क्या टहनी गिरने का कारण केवल पेड़ का पुराना होना था या कोई अन्य तकनीकी वजह रही।

जिला प्रशासन की ओर से मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की गई है और मुख्यमंत्री सहायता कोष से उचित मुआवजा दिलाने का आश्वासन दिया गया है। वहीं, स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि जिले भर के सभी मुख्य मार्गों पर सर्वे करवाकर खतरनाक पेड़ों को तुरंत हटाया जाए ताकि भविष्य में ऐसे हादसों को रोका जा सके।

निष्कर्ष

यह हादसा एक चेतावनी है कि बुनियादी ढांचे के रखरखाव में छोटी सी लापरवाही कितनी बड़ी मानवीय त्रासदी का कारण बन सकती है। श्रीगंगानगर का पदमपुर रोड, जो जिले की लाइफलाइन माना जाता है, आज खून से सराबोर दिखा। सड़क सुरक्षा केवल ट्रैफिक नियमों के पालन तक सीमित नहीं है, बल्कि सड़क के किनारों की सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। आज के इस हादसे ने पूरे जिले को झकझोर कर रख दिया है।

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