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अलर्ट: कोरोना का नया वेरिएंट ‘Cicada’ और बच्चों पर इसका असर—क्या है सच्चाई?

नई दिल्ली/जिनेवा। दुनिया अभी पूरी तरह से कोविड-19 के साये से बाहर नहीं निकली है कि वायरस के एक नए सब-वेरिएंट ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है। ओमिक्रोन परिवार के इस नए सदस्य, BA.3.2, को वैज्ञानिकों ने ‘Cicada’ (सिकाडा) नाम दिया है। हालिया हफ्तों में वैश्विक स्तर पर और भारत के कुछ हिस्सों में इसके मामलों में हल्की बढ़ोतरी देखी गई है। इस वेरिएंट की सबसे खास और चिंताजनक बात यह है कि यह विशेष रूप से बच्चों और किशोरों को प्रभावित करता नजर आ रहा है।

‘Cicada’ वेरिएंट के असामान्य लक्षण: बच्चों में क्या देखें?

आमतौर पर कोरोना के पिछले वेरिएंट्स में बुखार, खांसी और स्वाद का जाना मुख्य लक्षण थे। लेकिन ‘Cicada’ वेरिएंट बच्चों में कुछ अलग और असामान्य लक्षण दिखा रहा है, जिन्हें पहचानना माता-पिता के लिए बेहद जरूरी है:

  1. अत्यधिक थकान (Extreme Fatigue): बच्चे बिना किसी भारी खेलकूद के भी बहुत जल्दी थक रहे हैं। वे दिन भर सुस्त महसूस करते हैं और उनमें ऊर्जा की भारी कमी देखी जा रही है।

  2. श्वसन संबंधी विशिष्ट समस्याएं: नाक बहने के अलावा, बच्चों में ‘क्रुप’ (Croup) जैसी स्थिति देखी जा रही है, जिसमें सूखी और तेज आवाज वाली खांसी (Barking Cough) होती है।

  3. पेट संबंधी विकार: कई मामलों में बच्चों को उल्टी, दस्त और पेट में ऐंठन की शिकायत हो रही है, जिसे अक्सर सामान्य ‘फूड पॉइजनिंग’ समझ लिया जाता है।

  4. त्वचा पर हल्के चकत्ते: कुछ बच्चों के हाथों और पैरों की उंगलियों पर लाल रंग के हल्के चकत्ते (Rashes) भी देखे गए हैं।

राहत की खबर: पैनिक होने की जरूरत नहीं

स्वास्थ्य विशेषज्ञों और शुरुआती डेटा ने एक बड़ी राहत भी दी है। ‘Cicada’ वेरिएंट भले ही तेजी से फैल रहा हो, लेकिन यह घातक (Lethal) नहीं पाया गया है।

  • अस्पताल में भर्ती होने की दर कम: अभी तक प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, इस वेरिएंट से संक्रमित होने वाले बच्चों में गंभीर बीमारी के लक्षण नहीं मिले हैं। ऑक्सीजन की कमी या वेंटिलेटर की आवश्यकता वाले मामले बहुत ही कम (नगण्य) हैं।

  • त्वरित रिकवरी: अधिकांश बच्चे 3 से 5 दिनों के भीतर घरेलू उपचार और आराम से पूरी तरह स्वस्थ हो रहे हैं।

विशेषज्ञों और डॉक्टरों की सलाह

स्वास्थ्य मंत्रालय और बाल रोग विशेषज्ञों (Pediatricians) ने माता-पिता के लिए कुछ जरूरी गाइडलाइंस जारी की हैं:

  • निगरानी (Monitoring): यदि आपके बच्चे को अचानक बहुत अधिक थकान महसूस हो रही है या उसे सांस लेने में हल्की भी तकलीफ है, तो उसे तुरंत डॉक्टर को दिखाएं। इसे सामान्य मौसमी वायरल बुखार समझकर नजरअंदाज न करें।

  • टीकाकरण (Vaccination): जिन बच्चों का टीकाकरण (Booster Dose) अभी तक अधूरा है, उन्हें जल्द से जल्द वैक्सीन लगवाएं। डेटा साबित करता है कि टीका लगवा चुके बच्चों में ‘Cicada’ के लक्षण बहुत ही मामूली रह जाते हैं।

  • हाइजीन और मास्क: स्कूल या सार्वजनिक स्थानों पर बच्चों को मास्क पहनने और बार-बार हाथ धोने की आदत को फिर से याद दिलाना जरूरी है।

  • पोषक आहार: बच्चों की इम्यूनिटी (रोग प्रतिरोधक क्षमता) बढ़ाने के लिए उन्हें ताजे फल, सब्जियां और पर्याप्त पानी दें।

प्रशासनिक सतर्कता

श्रीगंगानगर सहित देश के विभिन्न जिलों के स्वास्थ्य विभागों को अलर्ट कर दिया गया है। अस्पतालों में ‘पीडियाट्रिक वार्ड’ (बच्चों के वार्ड) को तैयार रखने और रैंडम सैंपलिंग बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि वायरस का रूप बदलना (Mutation) एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, और ‘सिकाडा’ उसी का एक हिस्सा है।

निष्कर्ष

सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है। ‘Cicada’ वेरिएंट से डरने की जरूरत नहीं है, बल्कि जागरूक रहने की आवश्यकता है। बच्चों के स्वास्थ्य में आने वाले किसी भी छोटे बदलाव पर ध्यान देकर हम इस नए वेरिएंट को फैलने से रोक सकते हैं। याद रखें, एक जिम्मेदार नागरिक के तौर पर टीकाकरण और स्वच्छता ही हमारी सबसे बड़ी ढाल है।


नोट: यदि आपके बच्चे को सांस लेने में कठिनाई या लगातार तेज बुखार है, तो तुरंत अपने नजदीकी सरकारी अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें। हेल्पलाइन नंबर 1075 पर भी कॉल की जा सकती है।

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