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चक 6 जैड ए में संघर्ष तेज: बारिश में भी जारी रहा डंपिंग पॉइंट का विरोध

श्रीगंगानगर। श्रीगंगानगर जिले के चक 6 जैड ए में नगर परिषद द्वारा प्रस्तावित डंपिंग पॉइंट (ठोस कचरा संग्रहण केंद्र) को लेकर शुरू हुआ विवाद अब एक बड़े जन-आंदोलन का रूप ले चुका है। आज इस विरोध प्रदर्शन का छठा दिन था। कुदरत के बदलते मिजाज और दोपहर में हुई मूसलाधार बारिश के बावजूद, ग्रामीणों और किसानों के हौसले पस्त नहीं हुए। धरना स्थल पर बैठे बुजुर्गों, युवाओं और महिलाओं ने साफ कर दिया है कि जब तक प्रशासन इस परियोजना को रद्द नहीं करता, उनका आंदोलन जारी रहेगा।

बारिश और ओलावृष्टि के बीच डटे रहे ग्रामीण

आज श्रीगंगानगर में मौसम काफी खराब रहा। दोपहर में तेज मेघगर्जन के साथ बारिश और ओलावृष्टि शुरू हो गई, जिससे सामान्य जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। लेकिन चक 6 जैड ए के धरना स्थल पर मंजर कुछ और ही था। ग्रामीण तिरपालों के नीचे छिपने के बजाय नारेबाजी करते रहे। किसानों का कहना है कि उनकी फसलें पहले ही मौसम की मार झेल रही हैं, और अब प्रशासन उनके स्वास्थ्य और जमीन को ‘कचरा घर’ बनाकर बर्बाद करना चाहता है।

विरोध का मुख्य कारण: स्वास्थ्य और कृषि पर संकट

ग्रामीणों और किसान नेताओं का तर्क है कि डंपिंग पॉइंट के लिए चुनी गई जगह पूरी तरह से गलत है। उनके मुख्य आरोप निम्नलिखित हैं:

  1. पर्यावरणीय प्रदूषण: कचरा केंद्र बनने से निकलने वाली जहरीली गैसें और दुर्गंध आसपास के कई किलोमीटर के क्षेत्र को प्रदूषित कर देगी।

  2. भूजल पर प्रभाव: कचरे से रिसने वाला दूषित पानी (Leachate) जमीन के अंदर जाकर भूजल को जहरीला बना देगा, जिससे खेती और पीने का पानी असुरक्षित हो जाएगा।

  3. स्वास्थ्य संबंधी खतरे: रिहायशी इलाके के पास कचरा होने से अस्थमा, चर्म रोग और संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ जाएगा।

  4. कृषि भूमि की बर्बादी: श्रीगंगानगर एक कृषि प्रधान जिला है। उपजाऊ जमीन के बीचों-बीच कचरा संग्रहण केंद्र बनाने से आसपास के खेतों की मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित होगी।

प्रशासन की FIR और ग्रामीणों का पलटवार

आंदोलन को दबाने के लिए प्रशासन द्वारा कुछ आंदोलनकारियों और किसानों पर FIR (प्रथम सूचना रिपोर्ट) दर्ज की गई है। ग्रामीणों ने इस कार्रवाई की कड़े शब्दों में निंदा की है। किसान नेताओं का कहना है कि प्रशासन अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए दमनकारी नीति अपना रहा है और यह FIR पूरी तरह से “राजनीति से प्रेरित” है। उन्होंने चेतावनी दी है कि पुलिसिया कार्रवाई से ग्रामीण डरने वाले नहीं हैं, बल्कि यह आग में घी डालने का काम करेगी।

नगर परिषद और प्रशासन का पक्ष

दूसरी ओर, नगर परिषद प्रशासन का तर्क है कि शहर के कचरे के निस्तारण के लिए एक स्थायी जगह की सख्त जरूरत है। अधिकारियों के अनुसार, यह केवल एक कचरा डिपो नहीं बल्कि एक आधुनिक सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट होगा, जिससे प्रदूषण कम होगा। हालांकि, ग्रामीण इस दावे को खोखला बता रहे हैं। उनका कहना है कि अगर यह इतना ही सुरक्षित है, तो इसे किसी बंजर या गैर-उपजाऊ भूमि पर क्यों नहीं बनाया जा रहा?

सामाजिक और राजनीतिक समर्थन

आंदोलन को अब जिले के अन्य किसान संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का भी समर्थन मिलने लगा है। धरना स्थल पर आज कई जनप्रतिनिधि भी पहुंचे और ग्रामीणों की मांगों को जायज ठहराया। आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया है कि यदि आगामी 48 घंटों में प्रशासन ने कोई ठोस सकारात्मक कदम नहीं उठाया, तो वे कलेक्ट्रेट का घेराव करेंगे और चक्का जाम जैसी सख्त कार्रवाई की जाएगी।

निष्कर्ष: समाधान की दरकार

चक 6 जैड ए का यह विवाद अब केवल कचरे का नहीं, बल्कि किसानों के अस्तित्व और उनके अधिकारों की लड़ाई बन गया है। एक तरफ शहर की स्वच्छता का सवाल है, तो दूसरी तरफ ग्रामीणों के स्वास्थ्य और कृषि का। प्रशासन को चाहिए कि वह बलपूर्वक योजना थोपने के बजाय ग्रामीणों के साथ संवाद स्थापित करे और किसी वैकल्पिक स्थान पर विचार करे, ताकि विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बना रहे।


आंदोलन की अपडेट: ग्रामीणों ने तय किया है कि कल से भूख हड़ताल की भी शुरुआत की जा सकती है यदि प्रशासन का रवैया नहीं बदला।

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