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श्रीगंगानगर में मौसम का मिजाज बदला: आंधी और ओलावृष्टि का ‘येलो अलर्ट’, पक कर तैयार फसलों पर संकट के बादल

श्रीगंगानगर। उत्तर भारत में सक्रिय हुए नए पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के कारण राजस्थान के सीमावर्ती जिले श्रीगंगानगर और आसपास के क्षेत्रों में मौसम ने एक बार फिर करवट ले ली है। मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने आज, 2 अप्रैल 2026 को श्रीगंगानगर सहित पूरे बीकानेर संभाग के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। विभाग की चेतावनी ने विशेष रूप से किसानों की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि इस समय रबी की फसलें कटाई के अंतिम चरण में हैं।

तेज हवाएं और मेघगर्जन: अगले 48 घंटे भारी

मौसम विभाग के अनुसार, आज शाम से ही आसमान में बादलों की आवाजाही शुरू हो जाएगी। विभाग ने अनुमान जताया है कि आज रात और कल (3 अप्रैल) के दौरान क्षेत्र में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से धूलभरी आंधी चल सकती है। इसके साथ ही गरज-चमक (Thunderstorm) के साथ हल्की से मध्यम दर्जे की बारिश होने की पूरी संभावना है।

वायुमंडल के ऊपरी स्तरों में नमी और तापमान के उतार-चढ़ाव के कारण ओलावृष्टि (Hailstorm) की भी आशंका जताई गई है। श्रीगंगानगर के कुछ ग्रामीण इलाकों (जैसे रायसिंहनगर, पदमपुर और सादुलशहर) में ओले गिरने की संभावना अधिक है, जो इस समय खेती के लिए सबसे बड़ा खतरा माना जा रहा है।

किसानों की बढ़ी धड़कनें: फसलों पर ‘कुदरत की मार’ का डर

अप्रैल का महीना किसानों के लिए सबसे महत्वपूर्ण होता है। श्रीगंगानगर की मुख्य फसलें—गेहूं, सरसों और चना—इस समय खेतों में पककर तैयार खड़ी हैं या कटाई के बाद खलिहानों में रखी हैं।

  1. गेहूं की फसल: तेज हवाओं के साथ बारिश होने पर गेहूं की फसल आड़ी गिर जाती है, जिससे दाना काला पड़ने और वजन कम होने का खतरा रहता है।

  2. सरसों और चना: जिन किसानों ने सरसों की कटाई कर ली है और फसल खुले आसमान के नीचे पड़ी है, उनके लिए बारिश और ओले भारी आर्थिक नुकसान का कारण बन सकते हैं।

  3. मण्डियों में माल: श्रीगंगानगर अनाज मण्डी में भी भारी मात्रा में फसल पहुंच रही है। यदि समय रहते तिरपाल या ढकने की व्यवस्था नहीं की गई, तो खुले में पड़ी उपज भीग सकती है।

प्रशासन और कृषि विभाग की सलाह

मौसम के बदलते मिजाज को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और कृषि विभाग ने किसानों के लिए एडवाइजरी जारी की है:

  • फसल सुरक्षा: कटी हुई फसलों को सुरक्षित स्थानों पर रखें या तिरपाल से अच्छी तरह ढक दें।

  • सिंचाई रोकें: आने वाले दो दिनों तक फसलों में सिंचाई न करें, क्योंकि तेज हवाओं में गीली जमीन होने पर फसल जल्दी गिर जाती है।

  • कीटनाशक का प्रयोग: आंधी और बारिश के दौरान किसी भी प्रकार के कीटनाशक का छिड़काव न करें।

  • अनाज मण्डियां: मण्डी समितियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे किसानों की उपज को भीगने से बचाने के लिए उचित शेड और तिरपाल का प्रबंधन सुनिश्चित करें।

आम जनजीवन पर प्रभाव

आंधी के कारण बिजली आपूर्ति बाधित होने का खतरा भी बना रहता है। बिजली निगम ने भी अपने तकनीकी कर्मचारियों को अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए हैं ताकि तेज हवाओं से तार टूटने या फॉल्ट होने पर तुरंत ठीक किया जा सके। वाहन चालकों को भी धूलभरी आंधी के दौरान विजिबिलिटी कम होने के कारण सावधानी से वाहन चलाने की सलाह दी गई है।

तापमान में आएगी गिरावट

हालांकि इस आंधी और बारिश से गर्मी से थोड़ी राहत मिलेगी। पिछले कुछ दिनों से बढ़ रहे तापमान में 3 से 5 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की जा सकती है, जिससे सुबह और रात के समय हल्की ठंडक का अहसास होगा।

निष्कर्ष: कुदरत का यह बदलता रूप जहां आम लोगों को गर्मी से निजात देगा, वहीं ‘अन्नदाता’ के लिए यह परीक्षा की घड़ी है। मौसम विभाग का कहना है कि 4 अप्रैल के बाद मौसम एक बार फिर शुष्क होना शुरू होगा और आसमान साफ हो जाएगा। तब तक सभी को सतर्क रहने की आवश्यकता है।


मौसम अपडेट मुख्य बिंदु:

  • अलर्ट टाइप: येलो अलर्ट (सतर्क रहें)।

  • हवा की गति: 40-50 किमी/घंटा।

  • मुख्य खतरा: ओलावृष्टि और तेज आंधी।

  • प्रभावित क्षेत्र: श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, बीकानेर और अनूपगढ़ जिले।

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