
श्रीगंगानगर। राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (RBSE) के 12वीं कक्षा के परिणाम आज घोषित हुए। हजारों घरों में खुशियां मनाई गईं, मिठाइयां बंटीं और ढोल-नगाड़े बजे। लेकिन श्रीगंगानगर के एक घर में सन्नाटा पसरा है, जहाँ आंखों में गर्व तो है, पर गालों पर बहते आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे। यह कहानी है 7 KN स्कूल की मेधावी छात्रा निकिता की, जिसने बोर्ड परीक्षा में 93.80% अंक हासिल कर पूरे जिले का मान बढ़ाया, लेकिन अपनी इस शानदार सफलता को देखने के लिए वह आज इस दुनिया में नहीं है।
अस्पताल के बिस्तर से लड़ी दोहरी जंग
निकिता एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखती थी, लेकिन उसके सपने बहुत ऊंचे थे। जब बोर्ड परीक्षाएं नजदीक थीं, तभी वह गंभीर रूप से बीमार पड़ गई। जांच में पता चला कि उसे पीलिया (Jaundice) है। डॉक्टरों ने आराम की सलाह दी, लेकिन निकिता के सिर पर अपनी पढ़ाई और माता-पिता के सपनों को पूरा करने का जुनून सवार था।
परिजन बताते हैं कि बीमारी के कारण शरीर में जान नहीं थी, तेज बुखार और कमजोरी थी, लेकिन निकिता ने हार नहीं मानी। उसने अस्पताल के बिस्तर पर बैठकर पढ़ाई की और वहीं से एम्बुलेंस और विशेष अनुमति के जरिए परीक्षा केंद्र तक पहुंची। उसने हर पेपर पूरी शिद्दत के साथ दिया, मानो उसे पता हो कि यह उसकी मेहनत का आखिरी प्रमाण पत्र होने वाला है।
20 मार्च: जब थम गईं सांसें
परीक्षाएं समाप्त होने के बाद निकिता की तबीयत और बिगड़ गई। उसे इलाज के लिए भर्ती कराया गया, लेकिन संक्रमण उसके शरीर में काफी फैल चुका था। नियति को कुछ और ही मंजूर था। जिस बेटी ने कलम की ताकत से बीमारी को मात देने की कोशिश की थी, वह जिंदगी की जंग हार गई। 20 मार्च को इलाज के दौरान निकिता का निधन हो गया। पूरे गांव और स्कूल में शोक की लहर दौड़ गई। एक होनहार छात्रा का जाना न केवल परिवार, बल्कि पूरे समाज के लिए एक बड़ी क्षति थी।
नतीजों ने बढ़ाया मान, पर दी गहरी टीस
आज जब बोर्ड ने परिणाम जारी किए, तो निकिता के रोल नंबर के आगे 93.80% और ‘First Division’ लिखा आया। आर्ट्स संकाय में इतने बेहतरीन अंक लाना उसकी कुशाग्र बुद्धि का प्रमाण था। स्कूल के शिक्षकों को उम्मीद थी कि निकिता मेरिट में आएगी, और उसने अपनी मेहनत से यह साबित भी कर दिया।
जैसे ही यह खबर उसके घर पहुंची, उसके माता-पिता सुबक पड़े। निकिता के पिता ने रुंधे गले से कहा, “मेरी बेटी ने कर दिखाया, उसने अपना वादा निभाया। वह हमेशा कहती थी कि वह टॉप करेगी, लेकिन हमें क्या पता था कि वह अपनी सफलता देखने के लिए हमारे पास नहीं होगी।”
स्कूल और समाज में प्रेरणा बनी निकिता
7 KN स्कूल के प्रधानाचार्य और शिक्षकों ने निकिता को याद करते हुए कहा कि वह स्कूल की सबसे अनुशासित और होनहार छात्राओं में से एक थी। उसकी मेहनत आज के युवाओं के लिए एक मिसाल है कि परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, अगर संकल्प मजबूत हो तो लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।
मुख्य बिंदु जो निकिता को बनाते हैं खास:
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अदम्य साहस: गंभीर बीमारी के बावजूद एक भी पेपर नहीं छोड़ा।
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सादगी और समर्पण: सीमित संसाधनों के बावजूद जिले के टॉप स्कोरर्स में जगह बनाई।
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प्रेरणा: उसकी कहानी आज उन छात्रों के लिए सबक है जो छोटी मुश्किलों से घबराकर पढ़ाई छोड़ देते हैं।
एक अधूरा सपना
निकिता पढ़-लिखकर प्रशासनिक सेवाओं में जाना चाहती थी ताकि वह अपने क्षेत्र की सेवा कर सके। आज उसके अंक तालिका पर दर्ज ‘डिस्टिंक्शन’ के अंक चीख-चीख कर उसकी काबिलियत बयां कर रहे हैं। श्रीगंगानगर का यह परिणाम हमेशा याद रखा जाएगा—एक ऐसी बेटी के लिए जिसने मौत के साये में रहकर भी सफलता का इतिहास लिखा।
निकिता आज हमारे बीच नहीं है, लेकिन उसकी यह ‘अधूरी जीत’ हमेशा जीवित रहेगी। वह उन सभी के लिए एक मार्गदर्शक बनी रहेगी जो विपरीत परिस्थितियों में भी मुस्कुराकर लड़ना जानते हैं। जिला प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी निकिता के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की है और उसकी मेहनत को सलाम किया है।