
श्रीगंगानगर। राजस्थान का श्रीगंगानगर जिला, जो अपनी अंतरराष्ट्रीय सीमा के माध्यम से सीधे पाकिस्तान से सटा हुआ है, वर्तमान में सुरक्षा के लिहाज से अत्यंत संवेदनशील और सतर्क मोड पर है। हाल के दिनों में सीमा पार से बढ़ती संदिग्ध गतिविधियों और विशेष रूप से ड्रोन (Drone) के माध्यम से तस्करी के बढ़ते प्रयासों को देखते हुए, सीमा सुरक्षा बल (BSF) और राजस्थान पुलिस ने संयुक्त रूप से सुरक्षा घेरे को अभेद्य बना दिया है।
28 मार्च को जिला मुख्यालय और सीमावर्ती चौकियों से मिली जानकारी के अनुसार, सुरक्षा एजेंसियों ने ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाते हुए अंतरराष्ट्रीय सीमा पर निगरानी का स्तर कई गुना बढ़ा दिया है।
ड्रोन: सीमा पार से नई और बड़ी चुनौती
पिछले कुछ महीनों में पंजाब और राजस्थान के सीमावर्ती इलाकों में पाकिस्तानी ड्रोन की घुसपैठ में इजाफा हुआ है। इन ड्रोनों का उपयोग न केवल मादक पदार्थों (हेरोइन) की तस्करी के लिए किया जा रहा है, बल्कि हथियारों की खेप भेजने की आशंका भी बनी रहती है।
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एंटी-ड्रोन तकनीक का उपयोग: BSF ने श्रीगंगानगर सेक्टर में आधुनिक एंटी-ड्रोन सिस्टम और सेंसर्स तैनात किए हैं, जो रात के अंधेरे में भी ड्रोन की आवाज और उसकी लोकेशन को ट्रैक करने में सक्षम हैं।
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सर्च ऑपरेशन: संदिग्ध ड्रोन मूवमेंट की सूचना मिलते ही संबंधित इलाकों में तुरंत सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है ताकि सीमा पार से गिराई गई किसी भी सामग्री को तस्करों के हाथ लगने से पहले जब्त किया जा सके।
रात की गश्त और संयुक्त नाकाबंदी
सीमा पर तैनात जवानों के अलावा, स्थानीय पुलिस ने भी अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। सीमा से सटे गांवों और संपर्क सड़कों पर पुलिस ने चेक-पोस्ट (नाके) स्थापित किए हैं।
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गहन जांच: रात के समय सीमावर्ती क्षेत्रों में घूमने वाले वाहनों की गहन तलाशी ली जा रही है। संदिग्ध व्यक्तियों से पूछताछ की जा रही है और उनके पहचान पत्रों का सत्यापन किया जा रहा है।
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संयुक्त गश्त: BSF और राजस्थान पुलिस की टीमें उन कच्चे रास्तों और नहरों के किनारे गश्त कर रही हैं, जिनका उपयोग तस्कर अक्सर छिपने या माल की डिलीवरी के लिए करते हैं।
जिला प्रशासन और ‘ग्राम रक्षक’ की भूमिका
श्रीगंगानगर जिला प्रशासन ने सीमावर्ती गांवों के निवासियों के साथ निरंतर संवाद बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन का मानना है कि सीमा पर रहने वाले ग्रामीण सुरक्षा बलों की ‘आंख और कान’ हैं।
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ग्रामीणों को निर्देश: प्रशासन ने साफ किया है कि यदि किसी भी ग्रामीण को आसमान में कोई संदिग्ध रोशनी दिखाई दे, ड्रोन जैसी आवाज सुनाई दे या गांव में कोई अपरिचित व्यक्ति संदिग्ध हालत में दिखे, तो उसकी सूचना तुरंत नजदीकी पुलिस थाने या BSF चौकी को दें।
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जागरूकता बैठकें: पुलिस अधिकारियों द्वारा सीमावर्ती गांवों में जन-सहभागिता बैठकें आयोजित की जा रही हैं, जिसमें लोगों को नशे के कारोबार के खिलाफ एकजुट होने और राष्ट्रीय सुरक्षा में योगदान देने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
खेती और सुरक्षा के बीच समन्वय
चूंकि वर्तमान में रबी फसलों की कटाई का समय है, इसलिए कई किसान तारबंदी के पास स्थित अपने खेतों में देर रात तक या सुबह जल्दी काम करते हैं। सुरक्षा बलों ने किसानों के लिए विशेष गाइडलाइन्स जारी की हैं:
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तारबंदी (Fence) के नजदीक जाने वाले किसानों को अपने पहचान पत्र साथ रखना अनिवार्य है।
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संदिग्ध वस्तुओं को हाथ न लगाने और तुरंत अधिकारियों को सूचित करने की हिदायत दी गई है।
निष्कर्ष
श्रीगंगानगर की सुरक्षा केवल एक सीमा का पहरा नहीं, बल्कि देश की अखंडता का सवाल है। BSF की जांबाजी और स्थानीय पुलिस के सहयोग ने सीमावर्ती क्षेत्र में एक ऐसा सुरक्षा तंत्र विकसित किया है जिसे भेदना दुश्मनों के लिए नामुमकिन है। तकनीकी निगरानी और जन-जागरूकता के इस मेल ने श्रीगंगानगर को तस्करी और घुसपैठ के खिलाफ एक मजबूत ढाल बना दिया है।