
रायसिंहनगर (श्रीगंगानगर)। राजस्थान में भ्रष्टाचार के विरुद्ध शून्य सहिष्णुता (Zero Tolerance) की नीति के तहत भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने आज, 25 मार्च 2026, को एक और बड़ी सफलता हासिल की है। श्रीगंगानगर जिले के रायसिंहनगर कस्बे में तैनात क्षेत्रीय वन अधिकारी (Range Forest Officer – RFO) को एक परिवादी से 40,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया है। सरकारी तंत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार पर इस कड़े प्रहार से पूरे वन विभाग और प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है।
क्या है पूरा मामला?
मिली जानकारी के अनुसार, यह पूरी कार्रवाई एक परिवादी की शिकायत पर आधारित थी। परिवादी ने अपनी निजी भूमि या किसी व्यवसायिक प्रोजेक्ट के संबंध में वन विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) प्राप्त करने के लिए आवेदन किया था। नियमानुसार, यदि सभी दस्तावेज सही हों, तो विभाग को यह प्रमाण पत्र जारी करना होता है।
लेकिन, आरोपी रेंजर ने इस कानूनी प्रक्रिया को जटिल बताते हुए परिवादी को परेशान करना शुरू कर दिया। आरोप है कि एनओसी जारी करने की एवज में रेंजर ने मोटी रकम की मांग की। काफी मिन्नतों के बाद सौदा 40,000 रुपये पर तय हुआ। परिवादी रिश्वत नहीं देना चाहता था, इसलिए उसने श्रीगंगानगर एसीबी चौकी में इसकी गोपनीय शिकायत दर्ज कराई।
ACB का बिछाया जाल (The Trap)
शिकायत मिलते ही एसीबी के उच्चाधिकारियों ने इसका सत्यापन करवाया। सत्यापन के दौरान रिश्वत मांगे जाने की पुष्टि होने के बाद, आज सुबह जाल बिछाया गया (Trapping Procedure):
-
केमिकल युक्त नोट: एसीबी टीम ने परिवादी को पाउडर लगे हुए गुलाबी नोट दिए और रेंजर के पास भेजा।
-
रंगे हाथों गिरफ्तारी: जैसे ही रायसिंहनगर स्थित कार्यालय में रेंजर ने परिवादी से रिश्वत की राशि हाथ में ली और उसे अपनी दराज में रखा, पहले से ही बाहर तैनात एसीबी की टीम ने दबिश दे दी।
-
लाल हुए हाथ: जब रेंजर के हाथ धुलवाए गए, तो वे रसायनों के कारण गुलाबी हो गए, जो इस बात का पुख्ता प्रमाण था कि उसने रिश्वत के नोटों को छुआ था।
आरोपी के ठिकानों पर छापेमारी
गिरफ्तारी के तुरंत बाद एसीबी की विभिन्न टीमों ने आरोपी रेंजर के सरकारी आवास और अन्य संभावित ठिकानों पर भी तलाशी शुरू कर दी है। विभाग यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि क्या रेंजर के पास आय से अधिक संपत्ति (DA Case) भी है। मौके से कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और फाइलें जब्त की गई हैं, जिनकी जाँच देर रात तक जारी रहने की संभावना है।
विभाग में हड़कंप और प्रतिक्रिया
रायसिंहनगर वन विभाग कार्यालय में जैसे ही एसीबी की टीम घुसी, वहां मौजूद अन्य कर्मचारी और अधिकारी अपनी कुर्सियां छोड़कर खिसकते नजर आए। जिले के अन्य सरकारी विभागों में भी इस कार्रवाई की चर्चा जोरों पर है।
“भ्रष्टाचार किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि कोई भी लोक सेवक काम के बदले रिश्वत की मांग करता है, तो आमजन निर्भीक होकर एसीबी के टोल-फ्री नंबर 1064 पर सूचना दें। आपकी पहचान गुप्त रखी जाएगी।” — एसीबी के वरिष्ठ अधिकारी
कानूनी प्रक्रिया और सजा के प्रावधान
गिरफ्तार किए गए रेंजर के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। अब उसे विशेष भ्रष्टाचार निरोधक न्यायालय में पेश किया जाएगा, जहाँ से उसे न्यायिक अभिरक्षा या पुलिस रिमांड पर भेजा जा सकता है। दोषी सिद्ध होने पर इस अपराध में भारी जुर्माने के साथ-साथ कई वर्षों के कारावास का प्रावधान है।
निष्कर्ष
रायसिंहनगर की यह घटना इस बात का प्रमाण है कि भले ही भ्रष्टाचार की जड़ें गहरी हों, लेकिन सजग नागरिक और मुस्तैद प्रशासन मिलकर इसे उखाड़ सकते हैं। एनओसी के नाम पर जनता को परेशान करने वाले अधिकारियों के लिए यह कार्रवाई एक कड़ा सबक है। श्रीगंगानगर जिले में पिछले कुछ महीनों में एसीबी की यह तीसरी बड़ी कार्रवाई है, जो विभाग की सक्रियता को दर्शाती है।