
श्रीगंगानगर। राजस्थान के ‘अन्न भंडार’ कहे जाने वाले श्रीगंगानगर जिले के किसानों के लिए आज, 25 मार्च 2026, का दिन बड़ी राहत लेकर आया है। राज्य सरकार की नोडल एजेंसी राजफेड (RAJFED) द्वारा रबी विपणन सीजन 2026-27 के तहत सरसों और चना की न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर आधिकारिक खरीद प्रक्रिया आज से शुरू कर दी गई है। मंडियों में जिंसों की आवक और तुलाई का काम शुरू होते ही कृषि विपणन क्षेत्र में हलचल तेज हो गई है।
खरीद केंद्रों का जाल और प्रशासनिक तैयारी
जिले के विशाल भौगोलिक क्षेत्र और भारी उत्पादन को देखते हुए प्रशासन ने पुख्ता इंतजाम किए हैं। श्रीगंगानगर जिले में कुल 57 खरीद केंद्र स्थापित किए गए हैं। इन केंद्रों का चयन इस प्रकार किया गया है कि किसानों को अपनी उपज लेकर लंबी दूरी तय न करनी पड़े।
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प्रमुख केंद्र: श्रीगंगानगर मुख्य मंडी के अलावा रायसिंहनगर, पदमपुर, घड़साना, अनूपगढ़ और सूरतगढ़ जैसी प्रमुख मंडियों में विशेष तौल कांटे लगाए गए हैं।
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व्यवस्थाएं: केंद्रों पर छाया, पानी और बारदाने (बोरियों) की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की गई है ताकि तपती धूप में किसानों को असुविधा न हो।
MSP का गणित: बाजार भाव बनाम सरकारी दर
इस वर्ष केंद्र और राज्य सरकार ने किसानों की लागत और लाभ को ध्यान में रखते हुए आकर्षक समर्थन मूल्य निर्धारित किया है।
| फसल | MSP (प्रति क्विंटल) | अधिकतम खरीद सीमा |
| सरसों | 6200 रुपये | 40 क्विंटल प्रति किसान |
| चना | 5875 रुपये | 40 क्विंटल प्रति किसान |
वर्तमान में खुले बाजार (ओपन मार्केट) में उतार-चढ़ाव की स्थिति बनी हुई है, ऐसे में सरकारी खरीद शुरू होने से बाजार में भी भाव स्थिर होने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि 6200 रुपये का भाव सरसों उत्पादकों के लिए एक “सुरक्षा कवच” की तरह काम करेगा।
पंजीकरण और खरीद की प्रक्रिया
खरीद प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए सरकार ने ऑनलाइन पंजीकरण को अनिवार्य किया है।
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बायोमेट्रिक सत्यापन: केंद्रों पर फर्जीवाड़े को रोकने के लिए किसान का बायोमेट्रिक सत्यापन किया जा रहा है।
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गिरदावरी रिपोर्ट: पटवारी द्वारा जारी ऑनलाइन गिरदावरी के आधार पर ही फसल की तुलाई की जा रही है।
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सीमा: एक किसान से एक दिन में अधिकतम 40 क्विंटल फसल ही खरीदी जा रही है। यदि किसी किसान के पास अधिक उत्पादन है, तो उसे दोबारा स्लॉट आवंटित किया जाएगा।
भुगतान की तकनीक: सीधा खाते में पैसा
इस बार की सबसे बड़ी विशेषता ‘डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर’ (DBT) की गति है। राजफेड ने दावा किया है कि फसल की तुलाई और पोर्टल पर एंट्री होने के 48 से 72 घंटों के भीतर भुगतान सीधे किसान के जन-आधार से जुड़े बैंक खाते में जमा कर दिया जाएगा। इससे बिचौलियों और आढ़तियों पर निर्भरता खत्म होगी।
किसानों की चुनौतियाँ और मौसम का डर
जहाँ एक ओर खरीद शुरू होने की खुशी है, वहीं दूसरी ओर आसमान में छाए बादलों ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। श्रीगंगानगर के कई इलाकों में हल्की बूंदाबांदी की संभावना जताई गई है। ऐसे में खुले में पड़ी फसल को भीगने से बचाना बड़ी चुनौती है। मंडी समितियों ने तिरपाल की व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं ताकि किसानों की मेहनत पर पानी न फिरे।
“पिछले साल बाजार भाव कम होने से हमें नुकसान हुआ था, लेकिन इस बार 6200 रुपये का भाव मिलने से उम्मीद जगी है। बस पोर्टल सुचारू रूप से चले और भुगतान समय पर हो जाए।” — रामसिंह, स्थानीय किसान (रायसिंहनगर)
निष्कर्ष
श्रीगंगानगर की अर्थव्यवस्था पूरी तरह कृषि पर टिकी है। सरसों और चना की यह खरीद न केवल ग्रामीण क्षेत्रों में नकदी का प्रवाह (Cash Flow) बढ़ाएगी, बल्कि आगामी खरीफ सीजन की तैयारियों के लिए किसानों को आर्थिक संबल भी प्रदान करेगी। आने वाले दिनों में आवक बढ़ने के साथ केंद्रों पर भीड़ बढ़ने की संभावना है, जिसके लिए अतिरिक्त पुलिस और प्रशासनिक जाब्ता तैनात किया गया है।