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श्रीगंगानगर जिला न्यायालय को आतंकी हमले की धमकी: सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद

श्रीगंगानगर। राजस्थान के सीमावर्ती जिले श्रीगंगानगर से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहाँ जिला एवं सत्र न्यायालय को बम से उड़ाने और आतंकी हमले की लिखित धमकी मिली है। डाक के माध्यम से प्राप्त इस संदिग्ध पत्र ने न केवल न्यायिक गलियारों में, बल्कि पूरे जिले के प्रशासनिक अमले में हड़कंप मचा दिया है। पत्र में स्पष्ट रूप से 25 मार्च की तारीख का उल्लेख करते हुए बड़े पैमाने पर तबाही मचाने की चेतावनी दी गई है।


घटना का विवरण और धमकी भरा पत्र

मिली जानकारी के अनुसार, यह पत्र साधारण डाक के जरिए न्यायालय परिसर पहुँचा था। जैसे ही संबंधित अधिकारियों ने पत्र की सामग्री को पढ़ा, तुरंत उच्चाधिकारियों को सूचित किया गया। पत्र में इस्तेमाल की गई भाषा बेहद आक्रामक है और उसमें आतंकी संगठनों के नाम का हवाला देते हुए न्यायालय परिसर को निशाना बनाने की बात कही गई है।

चूँकि श्रीगंगानगर एक भारत-पाक सीमा से सटा हुआ संवेदनशील जिला है, इसलिए प्रशासन ने इस धमकी को हल्के में न लेते हुए इसे ‘हाई अलर्ट’ की श्रेणी में रखा है। खुफिया एजेंसियों (IB और CID) को भी इस मामले की जानकारी साझा कर दी गई है ताकि पत्र के मूल स्रोत और भेजने वाले की पहचान की जा सके।

न्यायालय परिसर में ‘किलेबंदी’ जैसी सुरक्षा

धमकी मिलने के बाद आज सुबह से ही न्यायालय परिसर के दृश्य पूरी तरह बदले हुए नजर आए। पुलिस प्रशासन ने परिसर को एक छावनी में तब्दील कर दिया है:

  • सघन तलाशी अभियान: पुलिस की डॉग स्क्वायड (Dog Squad) और बम निरोधक दस्ते (BDDS) ने कोर्ट के हर कमरे, गलियारे, पार्किंग क्षेत्र और झाड़ियों की गहनता से जाँच की है।

  • एंट्री प्वाइंट्स पर पहरा: न्यायालय के मुख्य द्वारों पर अतिरिक्त पुलिस जाब्ता तैनात किया गया है। अब केवल पहचान पत्र दिखाने और सुरक्षा जाँच से गुजरने के बाद ही वकीलों, कर्मचारियों और परिवादियों को प्रवेश दिया जा रहा है।

  • CCTV निगरानी: कंट्रोल रूम से सीसीटीवी कैमरों के जरिए हर संदिग्ध गतिविधि पर नजर रखी जा रही है। संदिग्ध पाए जाने वाले किसी भी लावारिस बैग या वाहन को तुरंत जब्त करने के निर्देश दिए गए हैं।

वकीलों और आम जन में भय का माहौल

इस घटना के बाद वकीलों और मुकदमों के सिलसिले में आए लोगों में डर देखा जा रहा है। बार एसोसिएशन के सदस्यों ने भी प्रशासन से स्थायी सुरक्षा पुख्ता करने की मांग की है। हालांकि, न्यायिक कार्य पूरी तरह ठप नहीं किया गया है, लेकिन लोगों की आवाजाही सामान्य दिनों की तुलना में कम देखी गई है। पुलिस अधिकारियों ने आम जनता से अपील की है कि वे घबराएं नहीं, बल्कि सतर्क रहें और किसी भी संदिग्ध व्यक्ति या वस्तु की सूचना तुरंत पुलिस को दें।

जाँच का दायरा और पुलिस का बयान

जिला पुलिस अधीक्षक के अनुसार, प्राथमिक दृष्टि में यह किसी असामाजिक तत्व की शरारत भी हो सकती है, जिसका उद्देश्य भय पैदा करना हो, लेकिन सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं किया जा सकता। पुलिस अब उस पोस्ट ऑफिस का पता लगा रही है जहाँ से यह पत्र पोस्ट किया गया था। पत्र पर लगे डाक टिकट और लिखावट की फॉरेंसिक जाँच भी करवाई जा रही है।

“हमारी टीमें पूरी तरह मुस्तैद हैं। कोर्ट परिसर और आसपास के संवेदनशील इलाकों में गश्त बढ़ा दी गई है। हम पत्र की सत्यता की जाँच कर रहे हैं और जल्द ही इसके पीछे के मास्टरमाइंड को बेनकाब करेंगे।” — स्थानीय पुलिस अधिकारी

निष्कर्ष

सीमावर्ती जिला होने के नाते श्रीगंगानगर हमेशा से सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर रहता है। कोर्ट जैसे महत्वपूर्ण स्थान को धमकी मिलना न्याय व्यवस्था को चुनौती देने जैसा है। प्रशासन के लिए चुनौती यह है कि वे बिना दहशत फैलाए इस खतरे को टालें और दोषियों को सलाखों के पीछे पहुँचाएँ।

©️ श्री गंगानगर न्यूज़ ©️