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श्रीगंगानगर के लिए बड़ी सौगात: बठिंडा-लालगढ़ रेल लाइन दोहरीकरण को केंद्र की मंजूरी; विकास को लगेंगे पंख

श्रीगंगानगर। सीमावर्ती जिले श्रीगंगानगर के बुनियादी ढांचे और परिवहन के क्षेत्र में आज एक ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया है। केंद्र सरकार और रेल मंत्रालय ने क्षेत्र की लंबे समय से चली आ रही मांग को स्वीकार करते हुए बठिंडा-लालगढ़ (बीकानेर) रेल लाइन के दोहरीकरण (Double Tracking) परियोजना को औपचारिक रूप से हरी झंडी दे दी है। यह परियोजना न केवल श्रीगंगानगर बल्कि पूरे उत्तर-पश्चिमी राजस्थान के आर्थिक और सामाजिक परिदृश्य को बदलने वाली साबित होगी।

परियोजना का महत्व और विस्तार

बठिंडा से लालगढ़ तक की यह रेल लाइन उत्तर रेलवे और उत्तर-पश्चिम रेलवे के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी है। वर्तमान में यह सिंगल ट्रैक (एकल लाइन) होने के कारण ट्रेनों के आवागमन में काफी समय लगता है। एक ट्रेन को गुजारने के लिए दूसरी ट्रेन को अक्सर क्रॉसिंग के लिए स्टेशनों पर घंटों इंतजार करना पड़ता है।

दोहरीकरण परियोजना के तहत लगभग 200 किलोमीटर से अधिक लंबे इस रेल खंड पर समानांतर दूसरी पटरी बिछाई जाएगी। इसके साथ ही ट्रैक के विद्युतीकरण और आधुनिक सिग्नलिंग प्रणाली को भी अपडेट किया जाएगा। इस परियोजना पर करोड़ों रुपये का निवेश होने का अनुमान है, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे।

श्रीगंगानगर को मिलने वाले मुख्य लाभ

इस रेल लाइन के दोहरीकरण से श्रीगंगानगर के निवासियों और व्यापारियों को कई प्रत्यक्ष लाभ मिलेंगे:

  1. समय की बचत और ट्रेनों की गति: दोहरीकरण के बाद क्रॉसिंग का झंझट खत्म हो जाएगा, जिससे ट्रेनों की औसत गति बढ़ेगी। श्रीगंगानगर से बीकानेर और श्रीगंगानगर से बठिंडा/दिल्ली की यात्रा के समय में कम से कम 1.5 से 2 घंटे की कमी आने की उम्मीद है।

  2. नई ट्रेनों का संचालन: वर्तमान में ट्रैक क्षमता (Track Capacity) फुल होने के कारण नई ट्रेनें शुरू करना मुश्किल था। ट्रैक डबल होने के बाद दक्षिण भारत और लंबी दूरी की नई सुपरफास्ट ट्रेनें श्रीगंगानगर से शुरू की जा सकेंगी।

  3. मालवहन और व्यापार में वृद्धि: श्रीगंगानगर एक बड़ा कृषि केंद्र है। यहाँ से अनाज, किन्नू और अन्य फसलों का निर्यात पूरे देश में होता है। रेल लाइन डबल होने से मालगाड़ियों (Goods Trains) की आवाजाही सुगम होगी, जिससे व्यापारियों की लागत घटेगी और रसद आपूर्ति (Logistics) तेज होगी।

पंजाब और राजस्थान के बीच मजबूत कनेक्टिविटी

यह रेल खंड पंजाब के महत्वपूर्ण जंक्शन बठिंडा को राजस्थान के बीकानेर (लालगढ़) से जोड़ता है। श्रीगंगानगर इस मार्ग का एक प्रमुख केंद्र है। दोहरीकरण से पंजाब और राजस्थान के बीच व्यापारिक और सांस्कृतिक संबंध और गहरे होंगे। विशेषकर श्रीगंगानगर के उन हजारों विद्यार्थियों और मरीजों के लिए यह बड़ी राहत है जो शिक्षा के लिए पंजाब या इलाज के लिए बीकानेर/बीकानेर के पीबीएम अस्पताल जाते हैं।

सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण कदम

भारत-पाकिस्तान सीमा के करीब होने के कारण श्रीगंगानगर और बीकानेर सामरिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण जिले हैं। सैन्य साजो-सामान और जवानों के आवागमन के लिए रेलवे सबसे सुरक्षित और तेज माध्यम है। रेल लाइन का दोहरीकरण होने से आपात स्थिति में भारतीय सेना की पहुंच और रसद आपूर्ति की क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी। यह रक्षा मंत्रालय के रणनीतिक दृष्टिकोण से भी एक अनिवार्य आवश्यकता थी।

जनप्रतिनिधियों और जनता की प्रतिक्रिया

इस घोषणा के बाद श्रीगंगानगर में खुशी का माहौल है। स्थानीय व्यापारिक संगठनों और रेल उपयोगकर्ता समितियों ने इसे केंद्र सरकार का एक दूरदर्शी कदम बताया है।

“यह केवल पटरी बिछाना नहीं है, बल्कि श्रीगंगानगर की प्रगति की नई पटरी तैयार करना है। वर्षों से हम इस दोहरीकरण की प्रतीक्षा कर रहे थे ताकि हमारा जिला देश के मुख्य रेल नेटवर्क से मजबूती से जुड़ सके।” — स्थानीय व्यापार मंडल प्रतिनिधि

अगले चरण और समय सीमा

मंजूरी मिलने के बाद अब रेलवे प्रशासन जल्द ही इस परियोजना के लिए निविदा (Tender) प्रक्रिया शुरू करेगा। भूमि अधिग्रहण (जहाँ आवश्यक हो) और सर्वे का काम पहले ही प्राथमिक चरणों में है। उम्मीद की जा रही है कि अगले कुछ महीनों में धरातल पर काम शुरू हो जाएगा।

निष्कर्ष

बठिंडा-लालगढ़ रेल लाइन का दोहरीकरण श्रीगंगानगर के भविष्य के लिए एक ‘गेम चेंजर’ साबित होगा। बेहतर कनेक्टिविटी से न केवल यात्रा सुगम होगी, बल्कि इससे क्षेत्र में औद्योगिक निवेश की संभावनाएं भी बढ़ेंगी। यह परियोजना विकसित राजस्थान और विकसित भारत के संकल्प को साकार करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

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