
मुंबई | 23 मार्च 2026
भारत की स्क्वैश सनसनी अनाहत सिंह ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वे न केवल भारतीय बल्कि विश्व स्क्वैश का भविष्य हैं। मुंबई के प्रतिष्ठित क्रिकेट क्लब ऑफ इंडिया (CCI) के कोर्ट पर आयोजित इंडियन ओपन स्क्वैश टूर्नामेंट के रोमांचक फाइनल में अनाहत ने अपना दबदबा कायम रखते हुए महिला एकल का खिताब जीत लिया है। 18 वर्ष की छोटी सी उम्र में लगातार दूसरी बार इस प्रतिष्ठित ट्रॉफी पर कब्जा जमाकर उन्होंने भारतीय खेल इतिहास में अपना नाम सुनहरे अक्षरों में दर्ज करा लिया है।
फाइनल का रोमांच: मिस्र की चुनौती को किया ध्वस्त
फाइनल मुकाबला बेहद कड़ा और रणनीतिक था। अनाहत के सामने विश्व स्क्वैश की महाशक्ति माने जाने वाले देश मिस्र की अनुभवी खिलाड़ी हाना मोअताज़ थीं। मैच की शुरुआत से ही दोनों खिलाड़ियों के बीच लंबी रैलियां देखने को मिलीं।
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पहला गेम: अनाहत ने अपनी फुर्ती और सटीक ड्रॉप शॉट्स के दम पर पहले गेम में बढ़त बनाई।
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वापसी की कोशिश: हाना ने दूसरे गेम में आक्रामक रुख अपनाते हुए वापसी की कोशिश की, लेकिन अनाहत के ‘बैकहैंड विनर्स’ का उनके पास कोई जवाब नहीं था।
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निर्णायक क्षण: अंततः, अनाहत ने मानसिक मजबूती दिखाते हुए यह मुकाबला सीधे सेटों में जीतकर घरेलू दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया।
लगातार दूसरी बार चैंपियन: एक दुर्लभ उपलब्धि
यह अनाहत की लगातार दूसरी इंडियन ओपन जीत है। पिछले साल भी उन्होंने इसी कोर्ट पर खिताबी जीत दर्ज की थी। किसी भी खिलाड़ी के लिए अपने खिताब की रक्षा करना (Title Defense) मनोवैज्ञानिक रूप से कठिन होता है, लेकिन अनाहत ने पूरे टूर्नामेंट में एक भी सेट नहीं गंवाया, जो उनकी फॉर्म और फिटनेस के उच्चतम स्तर को दर्शाता है।
विश्व रैंकिंग के शीर्ष 10 के करीब
इस जीत के साथ अनाहत सिंह को महत्वपूर्ण रैंकिंग अंक प्राप्त हुए हैं। वर्तमान में विश्व रैंकिंग के शीर्ष 20 में शामिल अनाहत अब टॉप-10 में जगह बनाने के बेहद करीब पहुंच गई हैं। यदि वे अपनी इस लय को बरकरार रखती हैं, तो वे पीएसए (PSA) वर्ल्ड टूर रैंकिंग में शीर्ष 10 में पहुंचने वाली सबसे कम उम्र की भारतीय महिला खिलाड़ी बन सकती हैं।
पुरुष वर्ग में अभय सिंह का परचम
भारत के लिए यह ‘दोहरी खुशी’ का दिन रहा। महिला वर्ग में अनाहत की जीत के साथ-साथ पुरुष एकल के फाइनल में भारत के अभय सिंह ने भी शानदार जीत दर्ज की। अभय ने फाइनल में अपनी बेहतरीन सर्विस और नेट प्ले के जरिए विपक्षी खिलाड़ी को पस्त किया। एक ही दिन में भारत के दो खिलाड़ियों का अंतरराष्ट्रीय स्तर के घरेलू टूर्नामेंट में चैंपियन बनना भारतीय स्क्वैश के स्वर्णिम युग की शुरुआत का संकेत है।
अनाहत सिंह: भविष्य की उम्मीद
14 साल की उम्र में राष्ट्रमंडल खेलों (Birmingham 2022) में सबसे कम उम्र की एथलीट के रूप में अपनी पहचान बनाने वाली अनाहत ने पिछले चार वर्षों में अभूतपूर्व प्रगति की है। उनके खेल में अब परिपक्वता और रणनीतिक गहराई साफ झलकती है। कोचों का मानना है कि अनाहत की तकनीक और कोर्ट कवरेज उन्हें आने वाले एशियाई खेलों और विश्व चैंपियनशिप के लिए स्वर्ण पदक का सबसे बड़ा दावेदार बनाती है।
निष्कर्ष: भारतीय स्क्वैश का नया चेहरा
मुंबई के दर्शकों ने खड़े होकर अनाहत का अभिवादन किया। मैच के बाद भावुक अनाहत ने कहा, “अपने देश में और अपने लोगों के सामने जीतना हमेशा खास होता है। यह ट्रॉफी मेरे कठिन परिश्रम और मेरे परिवार के समर्थन का परिणाम है।” अनाहत की यह जीत न केवल एक पदक है, बल्कि देश की हजारों युवा लड़कियों के लिए प्रेरणा है जो स्क्वैश जैसे कठिन खेल में अपना करियर बनाना चाहती हैं।