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गर्मी का अलर्ट: मार्च में ही तपने लगा उत्तर भारत; स्वास्थ्य मंत्रालय ने ‘हीट वेव’ से बचाव के लिए जारी की नई एडवाइजरी

प्रस्तावना

साल 2026 में गर्मी ने अपने पुराने सभी रिकॉर्ड समय से पहले ही तोड़ना शुरू कर दिए हैं। मार्च के अंतिम पखवाड़े में ही राजस्थान, दिल्ली और उत्तर-पश्चिमी भारत के कई हिस्सों में तापमान सामान्य से 4-5 डिग्री सेल्सियस ऊपर दर्ज किया जा रहा है। बढ़ते पारे और गर्म हवाओं (Loo) के शुरुआती संकेतों को देखते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने एक व्यापक हेल्थ एडवाइजरी जारी की है। इस गाइडलाइन का मुख्य उद्देश्य नागरिकों को ‘हीट स्ट्रोक’ (Heat Stroke) और डिहाइड्रेशन जैसी गंभीर स्थितियों से बचाना है।


हीट वेव (Heat Wave) और शरीर पर इसका प्रभाव

जब तापमान सामान्य से काफी अधिक हो जाता है, तो शरीर अपनी प्राकृतिक शीतलन प्रणाली (sweating) के जरिए खुद को ठंडा नहीं रख पाता। इससे शरीर का आंतरिक तापमान तेजी से बढ़ने लगता है, जिसे ‘हीट स्ट्रोक’ या लू लगना कहते हैं। इसके शुरुआती लक्षणों में सिरदर्द, चक्कर आना, अत्यधिक प्यास लगना और मांसपेशियों में खिंचाव शामिल हैं।


स्वास्थ्य मंत्रालय की मुख्य गाइडलाइन्स

मंत्रालय ने बचाव के लिए तीन मुख्य स्तंभों पर ध्यान केंद्रित किया है:

1. हाइड्रेशन: पानी ही जीवन का आधार है

गर्मियों में शरीर से पसीने के रूप में भारी मात्रा में तरल पदार्थ निकल जाते हैं। मंत्रालय की सलाह है:

  • नियमित अंतराल पर पानी: प्यास न लगने पर भी दिन में कम से कम 3-4 लीटर पानी पिएं। अपने साथ हमेशा पानी की बोतल रखें।

  • ओआरएस (ORS) का उपयोग: घर में ओआरएस, लस्सी, छाछ और नारियल पानी का स्टॉक रखें। ये पेय शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स के संतुलन को बनाए रखते हैं।

  • क्या न पिएं: अत्यधिक कैफीन (चाय-कॉफी), शराब और बहुत अधिक चीनी वाले कोल्ड ड्रिंक्स से बचें, क्योंकि ये शरीर को और अधिक डिहाइड्रेट करते हैं।

2. खान-पान: प्रकृति के साथ तालमेल

गर्मियों में पाचन तंत्र संवेदनशील हो जाता है। डाइट में बदलाव करना अनिवार्य है:

  • ठंडी तासीर वाले फल: अपनी डाइट में तरबूज, खरबूजा, खीरा, ककड़ी और संतरा जैसे फलों को प्राथमिकता दें। इनमें पानी की मात्रा 90% से अधिक होती है।

  • हल्का भोजन: एक बार में भारी भोजन करने के बजाय छोटे-छोटे अंतराल पर हल्का और सुपाच्य भोजन करें। बासी भोजन से बचें क्योंकि गर्मी में खाना जल्दी खराब होता है, जिससे ‘फूड पॉइजनिंग’ का खतरा रहता है।

  • नींबू पानी और पुदीना: शिकंजी और पुदीने का शरबत न केवल ठंडक देते हैं बल्कि लू से लड़ने की क्षमता भी बढ़ाते हैं।

3. सावधानी: धूप से दूरी और सुरक्षा

दोपहर की धूप सबसे अधिक हानिकारक होती है। मंत्रालय ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं:

  • पीक ऑवर्स (12 PM – 3 PM): दोपहर 12 बजे से 3 बजे के बीच सीधी धूप में निकलने से पूरी तरह बचें। इस समय ‘अल्ट्रावॉयलेट’ किरणें और गर्मी अपने चरम पर होती हैं।

  • सही पहनावा: हल्के रंग के, ढीले और सूती कपड़े पहनें। सिंथेटिक कपड़े पसीने को नहीं सोखते और त्वचा संबंधी रोग पैदा कर सकते हैं।

  • बाहर निकलते समय: यदि बाहर निकलना अनिवार्य हो, तो छाता, टोपी (Hat) या तौलिये से सिर को ढकें और सनग्लासेस का उपयोग करें।


विशेष वर्गों के लिए अतिरिक्त सुरक्षा

मंत्रालय ने बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष सावधानी बरतने को कहा है। साथ ही, उन मजदूरों और फील्ड वर्कर्स के लिए नियोक्ताओं को निर्देश दिए हैं कि वे कार्यस्थल पर ठंडे पानी और छायादार जगह की व्यवस्था सुनिश्चित करें।

निष्कर्ष

गर्मी की यह आहट एक चेतावनी है कि हमें अपने लाइफस्टाइल में बदलाव करने की जरूरत है। स्वास्थ्य मंत्रालय की इन गाइडलाइन्स का पालन करना केवल एक सलाह नहीं, बल्कि सुरक्षित रहने का एकमात्र तरीका है। याद रखें, सावधानी ही उपचार से बेहतर है। यदि आपको या आपके आसपास किसी को तेज बुखार, बेहोशी या घबराहट महसूस हो, तो तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें।

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