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श्रीगंगानगर रेलवे स्टेशन पर खुशियों की दस्तक: 5 जोड़ी ट्रेनों को मिला ‘स्थायी’ दर्जा, अब सफर होगा सस्ता और सुगम

श्रीगंगानगर। सरहदी जिले श्रीगंगानगर के रेल यात्रियों के लिए आज उत्तर पश्चिम रेलवे (NWR) से एक बड़ी और राहत भरी खबर आई है। लंबे समय से ‘स्पेशल’ टैग के साथ चल रही जिले की 5 प्रमुख पैसेंजर ट्रेनों को रेलवे बोर्ड ने अब स्थायी (Regular) करने की मंजूरी दे दी है। इस फैसले के साथ ही इन ट्रेनों के संचालन में अनिश्चितता खत्म हो गई है और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अब यात्रियों की जेब पर पड़ने वाला ‘स्पेशल किराए’ का अतिरिक्त बोझ भी पूरी तरह समाप्त हो जाएगा।


‘स्पेशल’ से ‘रेगुलर’ होने का सीधा लाभ: सस्ता किराया

कोरोना काल के बाद से रेलवे ने कई पैसेंजर ट्रेनों को ‘स्पेशल’ या ‘होली-दिवाली स्पेशल’ के नाम पर चलाया था। इन ट्रेनों में यात्रा करने के लिए यात्रियों को सामान्य मेल-एक्सप्रेस या पैसेंजर ट्रेनों की तुलना में 1.3 से 1.5 गुना अधिक किराया देना पड़ रहा था।

अब स्थायी दर्जा मिलने के बाद:

  • अतिरिक्त शुल्क की समाप्ति: ‘स्पेशल’ श्रेणी का सरचार्ज अब नहीं लगेगा।

  • सामान्य किराया लागू: श्रीगंगानगर से हनुमानगढ़, सूरतगढ़ और बठिंडा जैसे रूटों पर चलने वाली इन ट्रेनों में अब आम आदमी न्यूनतम किराए पर सफर कर सकेगा।

  • मासिक सीजन टिकट (MST): इन ट्रेनों में एमएसटी धारकों को भी अब नियमित ट्रेनों वाली सुविधाएं और रियायतें मिल सकेंगी।

इन 5 ट्रेनों की बदली किस्मत: जारी हुए नए नंबर

रेलवे प्रशासन ने इन ट्रेनों के लिए नए नियमित नंबर (Regular Numbers) भी जारी कर दिए हैं। अब ये ट्रेनें रेलवे के स्थाई टाइम-टेबल का हिस्सा बन गई हैं। इनमें मुख्य रूप से श्रीगंगानगर से सुबह और शाम के समय चलने वाली वे गाड़ियाँ शामिल हैं, जिनका उपयोग दैनिक यात्री (सरकारी कर्मचारी, दूध विक्रेता और छात्र) सबसे अधिक करते हैं।

नोट: नए नंबरों की सूची अब रेलवे के पूछताछ काउंटर और ‘नेशनल ट्रेन इंक्वायरी सिस्टम’ (NTES) पर भी अपडेट कर दी गई है।

दैनिक यात्रियों और व्यापारियों को बड़ी राहत

श्रीगंगानगर एक कृषि प्रधान और व्यापारिक केंद्र है। यहाँ से प्रतिदिन हजारों की संख्या में लोग कामकाज के सिलसिले में आसपास के कस्बों जैसे सादुलशहर, हनुमानगढ़, पीलीबंगा और सूरतगढ़ जाते हैं।

  1. बजट अनुकूल यात्रा: मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए यह फैसला किसी बड़ी सौगात से कम नहीं है। अब परिवार के साथ यात्रा करना काफी सस्ता हो जाएगा।

  2. नियमित अंतराल: स्थायी दर्जा मिलने का मतलब है कि अब इन ट्रेनों के फेरे रद्द होने की संभावना कम होगी, जिससे यात्री अपने काम की योजना बेहतर तरीके से बना सकेंगे।

  3. कनेक्टिविटी में सुधार: इन ट्रेनों के नियमित होने से श्रीगंगानगर की फीडर कनेक्टिविटी मजबूत होगी, जिससे लंबी दूरी की एक्सप्रेस ट्रेनों को पकड़ने वाले यात्रियों को भी सुविधा होगी।

रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर में भी होगा सुधार

जब किसी ट्रेन को स्थायी दर्जा दिया जाता है, तो उसके रखरखाव (Maintenance) और सुविधाओं के लिए अलग से बजट आवंटित होता है। अब इन ट्रेनों के कोचों की साफ-सफाई, प्रकाश व्यवस्था और सुरक्षा पर रेलवे अधिक ध्यान दे सकेगा। स्थानीय रेल यात्री संघर्ष समितियों ने इस निर्णय का स्वागत किया है और इसे लंबे समय से चल रही मांग की जीत बताया है।

निष्कर्ष: सुगम होगा सीमावर्ती जिले का सफर

श्रीगंगानगर जैसे दूरस्थ जिले के लिए रेल सेवा ही जीवनरेखा है। 5 ट्रेनों का एक साथ नियमित होना और किराए में कमी आना, क्षेत्र के आर्थिक विकास को भी गति देगा। अब यात्री बिना किसी अतिरिक्त वित्तीय दबाव के अपनी यात्रा का आनंद ले सकेंगे। रेलवे का यह कदम न केवल राजस्व के वितरण को संतुलित करेगा, बल्कि सार्वजनिक परिवहन के प्रति लोगों का विश्वास भी बढ़ाएगा।

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