
श्रीगंगानगर। राजस्थान के ‘अन्न भंडार’ कहे जाने वाले श्रीगंगानगर जिले के किसानों के लिए आज का दिन एक नई उम्मीद की किरण लेकर आया है। राज्य सरकार और सहकारिता विभाग ने जिले की 65 ग्राम सेवा सहकारी समितियों (GSS) में ‘कस्टम हायरिंग सेंटर’ (CHC) स्थापित करने की महत्वपूर्ण मंजूरी प्रदान की है। यह निर्णय न केवल जिले के कृषि परिदृश्य को आधुनिक बनाएगा, बल्कि उन छोटे और सीमांत किसानों की आर्थिक कमर को भी मजबूती देगा जो महंगे कृषि यंत्र खरीदने में असमर्थ थे।
क्या है कस्टम हायरिंग सेंटर (CHC)?
सरल शब्दों में कहें तो कस्टम हायरिंग सेंटर खेती की मशीनों का एक ‘बैंक’ या ‘रेंटल हब’ है। अक्सर देखा जाता है कि आधुनिक खेती के लिए ट्रैक्टर, लेजर लैंड लेवलर, कंबाइन हार्वेस्टर, रोटावेटर और ड्रोन जैसे यंत्र बेहद जरूरी हैं, लेकिन इनकी कीमत लाखों में होती है। एक सामान्य किसान के लिए इन्हें खरीदना मुमकिन नहीं होता।
इन सेंटरों के माध्यम से सहकारी समितियां इन मशीनों को खरीदेंगी और अपने सदस्य किसानों को बहुत ही किफायती दरों पर किराए (Rent) पर उपलब्ध कराएंगी। इससे किसान को मशीन खरीदने के लिए बड़ा कर्ज नहीं लेना पड़ेगा और वह आधुनिक तकनीक का लाभ भी उठा सकेगा।
लागत में कमी और मुनाफे में वृद्धि
श्रीगंगानगर जिले में गेहूं, सरसों, ग्वार और नरमा (कपास) की खेती बड़े पैमाने पर होती है। खेती की कुल लागत का एक बड़ा हिस्सा जुताई, बुवाई और कटाई की मशीनों पर खर्च होता है।
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किराये की बचत: निजी ऑपरेटरों की तुलना में सहकारी समितियों के रेट काफी कम होंगे।
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समय की बचत: आधुनिक यंत्रों के उपयोग से कम समय में ज्यादा काम होगा।
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बेहतर पैदावार: लेजर लैंड लेवलर और सीड ड्रिल जैसे यंत्रों से बीज की बचत होती है और जमीन की उर्वरता का सही उपयोग होता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन केंद्रों के शुरू होने से खेती की लागत में 20% से 30% तक की कमी आ सकती है, जो सीधे तौर पर किसान के शुद्ध मुनाफे में तब्दील होगी।
इन यंत्रों की मिलेगी सुविधा
मंजूर किए गए इन 65 केंद्रों पर स्थानीय फसल चक्र के अनुसार मशीनों का चयन किया जाएगा। मुख्य रूप से निम्नलिखित यंत्र उपलब्ध रहेंगे:
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ट्रैक्टर (विभिन्न हॉर्स पावर के)
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रोटावेटर और कल्टीवेटर
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थ्रेशर (गेहूं और सरसों के लिए)
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लेजर लैंड लेवलर (जमीन समतल करने हेतु)
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कृषि ड्रोन (कीटनाशक छिड़काव के लिए)
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हैप्पी सीडर (पराली प्रबंधन के लिए)
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा बूस्ट
यह कदम केवल खेती तक सीमित नहीं है। इन केंद्रों के संचालन के लिए स्थानीय स्तर पर ऑपरेटरों और मैकेनिकों की आवश्यकता होगी, जिससे ग्रामीण रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। साथ ही, सहकारी समितियों की आय में भी वृद्धि होगी, जिससे वे किसानों को भविष्य में और बेहतर सुविधाएं दे सकेंगी।
कैसे उठाएं लाभ?
जिले के किसान अपनी नजदीकी ग्राम सेवा सहकारी समिति में जाकर पंजीकरण करा सकते हैं। मशीनों की बुकिंग के लिए ‘पहले आओ-पहले पाओ’ या ऑनलाइन टोकन सिस्टम लागू किया जा सकता है, ताकि पारदर्शी तरीके से सभी को लाभ मिले।
निष्कर्ष: बदलती खेती की तस्वीर
श्रीगंगानगर में 65 केंद्रों की यह मंजूरी सहकारिता के मूल मंत्र “बिना सहकार नहीं उद्धार” को चरितार्थ करती है। जब एक छोटा किसान अपनी जेब पर बिना बोझ डाले बड़े ट्रैक्टर या आधुनिक थ्रेशर से अपनी फसल काटेगा, तभी सही मायनों में कृषि का आधुनिकीकरण होगा। सरकार का यह कदम जिले के कृषि क्षेत्र के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा।