🢀
श्रीगंगानगर में कुदरत का अजब खेल: मार्च की तपिश के बीच कोहरे का ‘कोल्ड अटैक’

श्रीगंगानगर। राजस्थान के सुदूर उत्तरी छोर पर स्थित जिला श्रीगंगानगर, जो अपनी भीषण गर्मी और कड़ाके की ठंड के लिए देश भर में जाना जाता है, आज एक ऐसी कुदरती घटना का गवाह बना जिसने मौसम वैज्ञानिकों और आम जनमानस दोनों को हैरत में डाल दिया। 20 मार्च, जब आमतौर पर सूरज अपनी तपिश दिखाना शुरू कर देता है और लोग पंखे व कूलर निकालने की तैयारी में होते हैं, तब आज सुबह पूरा जिला सफेद धुंध की चादर में लिपटा नजर आया।

दिसंबर जैसा अहसास और शून्य विजिबिलिटी

आज सुबह जब शहरवासियों की आंखें खुली, तो नजारा मार्च का नहीं बल्कि दिसंबर की किसी सर्द सुबह जैसा था। शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक घना कोहरा (Dense Fog) छाया हुआ था। सुबह 7 बजे तक स्थिति यह थी कि दृश्यता (Visibility) घटकर 10 मीटर से भी कम रह गई। एनएच-62 और अन्य प्रमुख मार्गों पर वाहनों की रफ्तार पूरी तरह थम गई। चालकों को दिन में ही हेडलाइट जलाकर रेंगते हुए चलना पड़ा। कोहरे के साथ-साथ चल रही ठंडी हवाओं ने वातावरण में सिहरन पैदा कर दी, जिससे लोगों को फिर से गर्म कपड़े निकालने पर मजबूर होना पड़ा।

तापमान में भारी गिरावट: 11 डिग्री का गोता

मौसम विभाग (IMD) के आंकड़ों ने इस बदलाव की गंभीरता को स्पष्ट किया। पिछले 24 घंटों के भीतर जिले के न्यूनतम और अधिकतम तापमान में 10 से 11 डिग्री सेल्सियस की भारी गिरावट दर्ज की गई है। कल तक जहां लोग दोपहर की धूप से बचने की कोशिश कर रहे थे, वहीं आज तापमान गिरने से मौसम सुहावना होने के बजाय “ठिठुरन भरा” हो गया।

क्यों बदला मौसम का मिजाज? (पश्चिमी विक्षोभ का असर)

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, इस अचानक आए बदलाव का मुख्य कारण उत्तर भारत में सक्रिय हुआ एक शक्तिशाली पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) है। पहाड़ों पर हो रही बर्फबारी और मैदानी इलाकों में नमी के अचानक बढ़ने के कारण हवा का दबाव बदल गया। श्रीगंगानगर की भौगोलिक स्थिति और पाकिस्तान सीमा से सटे होने के कारण यहां नमी वाली हवाओं ने कोहरे का रूप ले लिया।

आम जनजीवन और स्वास्थ्य पर प्रभाव

इस बेमौसम कोहरे और ठंड ने जनजीवन को व्यापक रूप से प्रभावित किया है:

  • यातायात: कोहरे के कारण लंबी दूरी की बसें और रेल सेवाएं अपने निर्धारित समय से देरी से चल रही हैं। सड़क हादसों की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने वाहन चालकों को सावधानी बरतने की सलाह दी है।

  • स्वास्थ्य: डॉक्टरों ने इस मौसम को ‘स्वास्थ्य के लिए चुनौतीपूर्ण’ बताया है। अचानक तापमान गिरने से वायरल बुखार, खांसी और जुकाम के मरीजों की संख्या बढ़ सकती है। खासकर बुजुर्गों और बच्चों को इस ‘दोहरी ऋतु’ से बचने की हिदायत दी गई है।

  • कृषि: किसानों के लिए यह मौसम चिंता का विषय बना हुआ है। खेतों में गेहूं और सरसों की फसल कटाई के अंतिम चरण में है। यदि यह नमी लंबे समय तक बनी रहती है या बूंदाबांदी होती है, तो कटी हुई फसल को नुकसान पहुंच सकता है।

आने वाले दिनों का अनुमान

मौसम विभाग का अनुमान है कि पश्चिमी विक्षोभ का यह असर अगले 24 से 48 घंटों तक बना रह सकता है। इसके बाद आसमान साफ होने और तापमान में फिर से बढ़ोतरी होने की संभावना है। फिलहाल, श्रीगंगानगर के निवासी मार्च के महीने में दिसंबर के इस ‘फ्री ट्रायल’ का अनुभव कर रहे हैं, जो जलवायु परिवर्तन के बढ़ते संकेतों की ओर भी इशारा करता है।

©️ श्री गंगानगर न्यूज़ ©️