
प्रतिष्ठित ऑल इंग्लैंड ओपन, जिसे बैडमिंटन का ‘विंबलडन’ माना जाता है, इस साल भारतीय प्रशंसकों के लिए बेहद रोमांचक रहा। विशेष रूप से लक्ष्य सेन के अविश्वसनीय प्रदर्शन ने पूरे देश को गौरवान्वित किया।
1. लक्ष्य सेन: ‘जायंट किलर’ का उदय
अल्मोड़ा के 24 वर्षीय शटल र लक्ष्य सेन इस पूरे टूर्नामेंट के ‘पोस्टर बॉय’ रहे। उन्होंने न केवल क्वार्टर फाइनल बल्कि पूरे टूर्नामेंट में दुनिया के दिग्गज खिलाड़ियों को धूल चटाई।
-
क्वार्टर फाइनल की ऐतिहासिक जीत: लक्ष्य ने क्वार्टर फाइनल में चीन के ली शी फेंग (विश्व नंबर-6) को सीधे सेटों में 21-13, 21-16 से हराकर अपनी श्रेष्ठता साबित की। इससे पहले उन्होंने शुरुआती दौर में दुनिया के नंबर-1 खिलाड़ी शी युकी को हराकर तहलका मचा दिया था।
-
फाइनल तक का सफर: लक्ष्य सेन 2022 के बाद दूसरी बार इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट के फाइनल में पहुंचे। हालांकि फाइनल में चीनी ताइपे के लिन चुन-यी के खिलाफ उन्हें हार का सामना करना पड़ा, लेकिन उनका यह प्रदर्शन भारतीय बैडमिंटन इतिहास के स्वर्णिम अध्यायों में गिना जाएगा।
2. महिला वर्ग: नई जोड़ियों का जलवा
महिला एकल में पीवी सिंधु के चोटिल होने और यात्रा बाधाओं (दुबई में फंसे होने) के कारण हटने से भारत को बड़ा झटका लगा था, लेकिन युगल वर्ग (Doubles) में भारतीय खिलाड़ियों ने इसकी भरपाई की।
-
तनीषा और अश्विनी की जुझारू जंग: तनीषा क्रास्टो और अनुभवी अश्विनी पोनप्पा की जोड़ी ने टूर्नामेंट के शुरुआती राउंड में शानदार खेल दिखाया। हालांकि वे अंतिम चार की बाधा पार करने से चूक गईं, लेकिन शीर्ष-10 जोड़ियों के खिलाफ उनके आक्रामक खेल ने भविष्य के लिए पदक की उम्मीदें जगा दी हैं।
3. सात्विक-चिराग: एक अप्रत्याशित हार
भारत की सबसे बड़ी उम्मीद मानी जाने वाली सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी की जोड़ी (विश्व नंबर-4) के लिए यह टूर्नामेंट किसी बुरे सपने जैसा रहा।
-
वे पहले ही दौर में मलेशिया की युवा जोड़ी से हारकर बाहर हो गए। इस हार ने खेल विशेषज्ञों को चौंका दिया, क्योंकि यह जोड़ी पिछले कुछ समय से शानदार फॉर्म में थी।
4. भारतीय बैडमिंटन के लिए क्या रहे मायने?
प्रकाश पादुकोण (1980) और पुलेला गोपीचंद (2001) के बाद भारत अभी भी अपने तीसरे ऑल इंग्लैंड खिताब का इंतजार कर रहा है। लेकिन 2026 का यह संस्करण भारत के लिए कई सकारात्मक संदेश लेकर आया है:
-
लक्ष्य सेन की निरंतरता: दो बार फाइनल में पहुंचना यह दर्शाता है कि लक्ष्य अब विश्व बैडमिंटन के शीर्ष स्तर पर अपनी जगह पक्की कर चुके हैं।
-
युवा शक्ति: मालविका बंसोड़ और उन्नति हुड्डा जैसे युवा खिलाड़ियों ने बड़े मंच पर अनुभव प्राप्त किया, जो आगामी एशियाई खेलों और विश्व चैंपियनशिप में काम आएगा।
5. आगामी चुनौतियां
बर्मिंघम के इस सफर के बाद भारतीय टीम अब स्विस ओपन 2026 के लिए रवाना होगी। लक्ष्य सेन की थकान और सात्विक-चिराग की फॉर्म में वापसी भारतीय प्रशंसकों के लिए चर्चा का मुख्य विषय बनी हुई है।
निष्कर्ष: ऑल इंग्लैंड ओपन 2026 ने दिखाया कि भारतीय बैडमिंटन अब केवल एक खिलाड़ी पर निर्भर नहीं है। जहाँ दिग्गजों को संघर्ष करना पड़ा, वहीं युवाओं ने अपनी चमक बिखेरी। लक्ष्य सेन का फाइनल तक का सफर इस साल की सबसे बड़ी खेल कहानियों में से एक है।