
श्रीगंगानगर। सोमवार का दिन कोतवाली थाना क्षेत्र के एक पशुपालक परिवार और स्थानीय निवासियों के लिए मातम और दहशत लेकर आया। शहर के बीचों-बीच गुजर रही 11 हजार वोल्ट (11 KV) की जर्जर बिजली लाइन का तार अचानक टूटकर जमीन पर गिर गया। इस हादसे में बेजुबान पशुओं को संभलने का मौका तक नहीं मिला और देखते ही देखते पाँच दुधारू गायों ने तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया।
घटना का क्रम: कैसे हुआ हादसा?
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सुबह का समय था और पशुपालक अपनी गायों को चराने या पानी पिलाने के लिए बाहर ले जा रहा था। इसी दौरान ऊपर से गुजर रही हाई-टेंशन लाइन में जोरदार धमाका हुआ और बिजली का नंगा तार सीधे गायों के झुंड पर आ गिरा।
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बाल-बाल बचा पशुपालक: जिस समय तार गिरा, पशुपालक गायों से महज कुछ फीट की दूरी पर था। करंट जमीन पर फैलने के कारण उसे भी हल्का झटका महसूस हुआ, लेकिन समय रहते पीछे हटने की वजह से उसकी जान बच गई।
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मौके पर ही मौत: 11 हजार वोल्ट का करंट इतना शक्तिशाली था कि गायों को बचाने का कोई रास्ता नहीं था। कुछ ही मिनटों में पाँचों गायों के शरीर झुलस गए और उनकी घटनास्थल पर ही मृत्यु हो गई।
स्थानीय निवासियों का आक्रोश और प्रदर्शन
हादसे की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में मोहल्ले वासी और गौरक्षक मौके पर जमा हो गए। लोगों में विद्युत निगम (Jodhpur Discom) के प्रति गहरा रोष देखा गया।
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जर्जर लाइनों की शिकायत: निवासियों का आरोप है कि इस क्षेत्र में बिजली के तार काफी पुराने और जर्जर हो चुके हैं। कई बार विभाग को लिखित और मौखिक शिकायतें दी गईं कि ये तार कभी भी टूट सकते हैं, लेकिन अधिकारियों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया।
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रखरखाव में लापरवाही: लोगों का कहना है कि मानसून से पहले या सर्दियों के बाद जो ‘मेंटेनेंस’ (Maintenance) का दावा विभाग करता है, वह केवल कागजों तक सीमित है।
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मुआवजे की मांग: ग्रामीणों और पीड़ित पशुपालक ने मांग की है कि विभाग अपनी गलती स्वीकार करे और मृत गायों का उचित बाजार मूल्य के अनुसार मुआवजा दे, क्योंकि ये गायें उस परिवार की आजीविका का मुख्य साधन थीं।
आर्थिक और भावनात्मक प्रभाव
एक मध्यमवर्गीय पशुपालक के लिए एक साथ 5 दुधारू गायों का खोना किसी बड़े वित्तीय संकट से कम नहीं है।
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आजीविका पर संकट: दुधारू गायों से होने वाली दूध की बिक्री से ही उस परिवार का खर्च चलता था। अब उनके सामने जीविका का तत्काल कोई साधन नहीं बचा है।
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पशु प्रेम: ग्रामीण भारत में पशु केवल संपत्ति नहीं, बल्कि परिवार के सदस्य की तरह होते हैं। इस क्रूर हादसे ने पूरे मोहल्ले को भावनात्मक रूप से झकझोर दिया है।
कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई
घटना की सूचना मिलते ही कोतवाली पुलिस और विद्युत निगम के कनिष्ठ अभियंता (JEN) मौके पर पहुँचे। पुलिस ने स्थिति को बिगड़ने से रोकने के लिए समझाइश की।
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पंचनामा और पोस्टमॉर्टम: पशुपालन विभाग की टीम को बुलाकर मृत गायों का पोस्टमॉर्टम कराया गया है ताकि कानूनी कार्रवाई को आगे बढ़ाया जा सके।
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जांच के आदेश: विद्युत निगम के उच्च अधिकारियों ने मामले की जांच के लिए एक कमेटी गठित करने की बात कही है, जो यह पता लगाएगी कि तार टूटने का कारण तकनीकी खामी थी या लापरवाही।
निष्कर्ष और आगे की राह
यह हादसा एक चेतावनी है। श्रीगंगानगर जैसे घनी आबादी वाले शहरों में ओवरहेड बिजली की लाइनें मौत का जाल बनती जा रही हैं।
जरूरी कदम: > * शहर के भीड़भाड़ वाले इलाकों में बिजली की लाइनों को ‘अंडरग्राउंड’ (Underground Cabling) किया जाना चाहिए।
पुराने और ढीले तारों को तुरंत बदला जाना चाहिए ताकि भविष्य में किसी इंसान या पशु की जान न जाए।