
बर्मिंघम, 15 मार्च 2026: भारतीय बैडमिंटन के उभरते हुए सितारे और देश की सबसे बड़ी उम्मीद लक्ष्य सेन ने प्रतिष्ठित ऑल इंग्लैंड बैडमिंटन चैंपियनशिप में इतिहास रचने की ओर एक बड़ा कदम बढ़ाया है। बर्मिंघम के यूटिलिटा एरिना में खेले गए एक सांस रोक देने वाले क्वार्टर फाइनल मुकाबले में लक्ष्य ने दुनिया के नंबर-3 खिलाड़ी को हराकर पुरुष एकल के सेमीफाइनल में जगह बना ली है।
लक्ष्य की इस जीत ने न केवल उनके जुझारू खेल का परिचय दिया है, बल्कि भारतीय खेल प्रेमियों में 25 साल बाद फिर से इस खिताब को भारत लाने की उम्मीदें जगा दी हैं।
मैच का रोमांच: जब लक्ष्य ने पलटी बाजी
लगभग 72 मिनट तक चले इस कड़े मुकाबले में लक्ष्य सेन ने गजब का धैर्य और कोर्ट कवरेज दिखाया। मैच की शुरुआत उनके पक्ष में नहीं रही थी, लेकिन उन्होंने अपने आक्रामक स्मैश और नेट प्ले से वापसी की:
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पहला गेम: विपक्षी खिलाड़ी ने अपनी रैंकिंग के अनुरूप खेल दिखाते हुए पहला गेम 18-21 से अपने नाम किया। लक्ष्य शुरुआत में थोड़े असहज दिखे और कुछ अनचाही गलतियां कीं।
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दूसरा गेम: दूसरे गेम में लक्ष्य ने रणनीति बदली। उन्होंने लंबी रैलियों (Long Rallies) पर भरोसा किया और विपक्षी को थका दिया। अंततः उन्होंने यह गेम 21-15 से जीतकर मैच को बराबरी पर ला खड़ा किया।
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निर्णायक तीसरा गेम: तीसरे गेम में स्कोर एक समय 19-19 से बराबर था। पूरे स्टेडियम में सन्नाटा था, लेकिन लक्ष्य ने अपने अचूक क्रॉस-कोर्ट स्मैश और बेहतरीन डिफेंस की बदौलत अंतिम दो अंक हासिल किए और 21-19 से गेम और मैच अपने नाम कर लिया।
दुनिया के नंबर-3 खिलाड़ी पर मानसिक जीत
लक्ष्य सेन के लिए यह जीत इसलिए भी बड़ी है क्योंकि उनका सामना एक ऐसे खिलाड़ी से था जिसके खिलाफ उनका पिछला रिकॉर्ड बहुत अच्छा नहीं रहा था। विशेषज्ञों का मानना है कि लक्ष्य ने आज न केवल तकनीकी रूप से बल्कि मानसिक रूप से भी विपक्षी को मात दी। मैच के बाद लक्ष्य ने कहा, “मैंने बस हर अंक के लिए लड़ने पर ध्यान केंद्रित किया। यहाँ की परिस्थितियाँ तेज हैं, लेकिन मैं अपनी लय खोजने में सफल रहा।”
इतिहास के करीब लक्ष्य: क्या टूटेगा 25 साल का सूखा?
ऑल इंग्लैंड ओपन को बैडमिंटन की दुनिया का ‘विंबलडन’ माना जाता है। भारत के लिए अब तक केवल दो दिग्गजों ने यह खिताब जीता है:
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प्रकाश पादुकोण (1980)
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पुलेला गोपीचंद (2001)
पिछले 25 सालों से भारत इस ट्रॉफी का इंतजार कर रहा है। लक्ष्य सेन इससे पहले 2022 में फाइनल तक पहुँचे थे, लेकिन तब उन्हें उप-विजेता बनकर संतोष करना पड़ा था। 2026 में उनकी मौजूदा फॉर्म को देखकर बैडमिंटन जगत का मानना है कि इस बार लक्ष्य इतिहास बदलने के सबसे प्रबल दावेदार हैं।
अगली चुनौती: सेमीफाइनल की राह
सेमीफाइनल में अब लक्ष्य का सामना दुनिया के एक और दिग्गज खिलाड़ी से होने की संभावना है। कोचों का मानना है कि लक्ष्य को अपनी रिकवरी पर ध्यान देना होगा क्योंकि पिछला मैच शारीरिक रूप से काफी थका देने वाला था।
भारतीय प्रशंसकों का समर्थन: सोशल मीडिया पर ‘लक्ष्य फॉर गोल्ड’ ट्रेंड कर रहा है। खेल मंत्री और पूर्व दिग्गजों ने उन्हें इस शानदार जीत के लिए बधाई दी है और सेमीफाइनल के लिए शुभकामनाएं भेजी हैं।
विशेष नोट: लक्ष्य सेन की रक्षात्मक तकनीक और कोर्ट के पीछे से लगाए गए उनके जंप स्मैश ने इस टूर्नामेंट में उन्हें सबसे खतरनाक खिलाड़ी बना दिया है।