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ऋषभ पंत का मेलबर्न में महा-धमाका: 85 गेंदों में शतक जड़कर ऑस्ट्रेलिया की रणनीति को किया ध्वस्त

दिनांक: 15 मार्च 2026

स्थान: मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड (MCG)

क्रिकेट के मैदान पर जब ऋषभ पंत अपनी लय में होते हैं, तो दुनिया का कोई भी गेंदबाजी आक्रमण सुरक्षित नहीं महसूस करता। आज मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड पर कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला। बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी के निर्णायक और चौथे टेस्ट मैच के दूसरे दिन, ऋषभ पंत ने ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों की धज्जियां उड़ाते हुए मात्र 85 गेंदों पर एक अविश्वसनीय शतक जड़ दिया। यह न केवल उनके करियर के सबसे यादगार शतकों में से एक है, बल्कि इसने टेस्ट क्रिकेट में आक्रामकता की एक नई परिभाषा लिख दी है।


मैच का घटनाक्रम: जब दबाव में चमके पंत

भारतीय टीम ने सुबह के सत्र में अपने तीन महत्वपूर्ण विकेट जल्दी गंवा दिए थे। कप्तान रोहित शर्मा और विराट कोहली के पवेलियन लौटने के बाद भारतीय पारी लड़खड़ाती नजर आ रही थी। ऑस्ट्रेलिया के कप्तान पैट कमिंस और मिशेल स्टार्क अपनी घातक स्विंग से भारतीय बल्लेबाजों की परीक्षा ले रहे थे। ऐसे नाजुक समय में ऋषभ पंत क्रीज पर उतरे।

शुरुआती 10-12 गेंदों तक पंत ने संयम दिखाया, लेकिन जैसे ही स्पिनर नाथन लियोन मोर्चे पर आए, पंत ने अपने तेवर बदल लिए। उन्होंने पहले ही ओवर में दो शानदार छक्के लगाकर यह स्पष्ट कर दिया कि वह ‘डिफेंस’ करने के मूड में नहीं हैं।

85 गेंदों का तूफान: रिकॉर्ड्स की बौछार

पंत ने अपनी इस पारी के दौरान मैदान के चारों ओर शॉट्स खेले। उनकी बल्लेबाजी की कुछ मुख्य विशेषताएं इस प्रकार रहीं:

  • आक्रामकता: उन्होंने अपनी पारी में 12 चौके और 5 गगनचुंबी छक्के लगाए।

  • रिवर्स स्कूप का जादू: जब पैट कमिंस 145 किमी/घंटा की रफ्तार से गेंदबाजी कर रहे थे, तब पंत ने विकेट के पीछे ‘रिवर्स स्कूप’ खेलकर गेंद को बाउंड्री के बाहर भेज दिया। इस शॉट ने न केवल दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया, बल्कि ऑस्ट्रेलियाई कप्तान को अपनी फील्डिंग रणनीति बदलने पर मजबूर कर दिया।

  • तेज शतक: 85 गेंदों में बनाया गया यह शतक बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी के इतिहास के सबसे तेज शतकों में शुमार हो गया है।


ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजी आक्रमण बेअसर

दुनिया का सबसे घातक माना जाने वाला ऑस्ट्रेलियाई पेस अटैक आज पंत के सामने बेबस नजर आया। मिशेल स्टार्क की शॉर्ट गेंदों को पंत ने बड़ी आसानी से पुल किया, वहीं जोश हेजलवुड की सटीक लाइन-लेंथ को उन्होंने अपने कदमों के इस्तेमाल से बिगाड़ दिया। ऑस्ट्रेलियाई कमेंटेटरों ने भी माना कि “पंत को रोकना फिलहाल नामुमकिन नजर आ रहा है, वे टेस्ट मैच को टी-20 की तरह खेल रहे हैं।”

मैच की स्थिति और भारत की बढ़त

पंत के इस तूफानी शतक की बदौलत भारत ने खबर लिखे जाने तक पहली पारी में 150 रनों की महत्वपूर्ण बढ़त बना ली है। निचले क्रम के बल्लेबाजों के साथ मिलकर उन्होंने जो छोटी-छोटी साझेदारियां कीं, वे मैच के परिणाम के लिए निर्णायक साबित हो सकती हैं। निर्णायक टेस्ट होने के कारण इस मैच की जीत का मतलब होगा बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी पर कब्जा बरकरार रखना।

पंत का बयान (पारी के बाद): “मेरा लक्ष्य हमेशा टीम को मुश्किल स्थिति से बाहर निकालना होता है। जब गेंद बल्ले पर अच्छी तरह आ रही हो, तो मैं खुद को शॉट खेलने से नहीं रोकता। मेलबर्न में शतक बनाना हमेशा खास होता है।”


विशेषज्ञों की राय

पूर्व क्रिकेटरों का मानना है कि ऋषभ पंत की यह पारी उनकी परिपक्वता को दर्शाती है। उन्होंने न केवल रन बनाए, बल्कि मनोवैज्ञानिक रूप से ऑस्ट्रेलिया को बैकफुट पर धकेल दिया। क्रिकेट पंडितों के अनुसार, पंत की यह पारी आने वाले कई सालों तक मिसाल के तौर पर याद रखी जाएगी।

क्या भारत इस विशाल बढ़त को जीत में बदल पाएगा? यह तो आने वाले तीन दिनों में स्पष्ट होगा, लेकिन फिलहाल ऋषभ पंत ने इस मैच को पूरी तरह से भारत की मुट्ठी में कर दिया है।

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