
श्रीगंगानगर/अनूपगढ़। भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा पर तैनात सीमा सुरक्षा बल (BSF) और राजस्थान पुलिस के संयुक्त प्रयासों ने एक बार फिर पड़ोसी देश की नापाक हरकतों को विफल कर दिया है। आज 10 मार्च 2026 की तड़के, श्रीगंगानगर सेक्टर के सीमावर्ती इलाके में एक सुनियोजित सर्च ऑपरेशन के दौरान 1 किलो उच्च गुणवत्ता वाली हेरोइन बरामद की गई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस खेप की कीमत करोड़ों रुपये आंकी जा रही है।
आधी रात का ऑपरेशन: कैसे मिली सफलता?
सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, सीमा पर तैनात BSF की चौकस टुकड़ी ने देर रात करीब 2:30 बजे आसमान में एक संदिग्ध ड्रोन (UAV) की भनभनाहट सुनी। अंधेरे का फायदा उठाकर पाकिस्तानी तस्कर भारतीय सीमा के भीतर मादक पदार्थों की खेप गिराने की कोशिश कर रहे थे।
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BSF की जवाबी कार्रवाई: ड्रोन की आवाज सुनते ही जवानों ने दिशा का अनुमान लगाकर उस पर फायरिंग की, जिसके बाद ड्रोन वापस पाकिस्तान की ओर लौट गया।
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संयुक्त तलाशी अभियान: सुबह होते ही BSF और स्थानीय पुलिस की स्पेशल टीम ने संबंधित गांव और खेतों की घेराबंदी कर ‘कंबिंग ऑपरेशन’ शुरू किया। घंटों की मशक्कत के बाद झाड़ियों में छिपाकर रखा गया एक पीला पैकेट बरामद हुआ, जिसमें हेरोइन भरी हुई थी।
ड्रोन: तस्करी का नया और घातक हथियार
पिछले कुछ वर्षों में श्रीगंगानगर और पंजाब से सटी सीमाओं पर पारंपरिक तस्करी (बाड़ के नीचे से या ऊपर से फेंकना) की जगह ड्रोन टेक्नोलॉजी ने ले ली है। जांच अधिकारियों का कहना है कि ये ड्रोन GPS गाइडेड होते हैं और एक निश्चित लोकेशन पर खेप गिराकर तुरंत वापस लौट जाते हैं।
तकनीकी चुनौतियां:
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लो-फ्लाईंग ऑब्जेक्ट्स: ये ड्रोन बहुत कम ऊंचाई पर उड़ते हैं, जिससे इन्हें रडार की पकड़ में लाना मुश्किल होता है।
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साइलेंट इंजन: आधुनिक चीनी निर्मित ड्रोन की आवाज बहुत कम होती है, जिससे रात के सन्नाटे में भी इन्हें पहचानना एक चुनौती है।
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सटीक लैंडिंग: तस्कर ‘ड्रॉप ज़ोन’ के लिए गूगल मैप्स का उपयोग करते हैं, जिससे स्थानीय रिसीवर को खेप ढूंढने में आसानी होती है।
स्थानीय नेटवर्क पर पुलिस की पैनी नजर
बरामदगी के बाद अब पुलिस का पूरा ध्यान उन ‘लोकल हैंडल्स’ पर है, जिन्हें यह खेप प्राप्त करनी थी। शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि सीमा पार बैठे आकाओं ने व्हाट्सएप या अन्य एन्क्रिप्टेड ऐप्स के जरिए स्थानीय तस्करों को लोकेशन भेजी थी।
पुलिस की रणनीति:
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मोबाइल टावर डंप डाटा: घटना के समय सक्रिय संदिग्ध मोबाइल नंबरों की जांच की जा रही है।
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संदिग्धों की धरपकड़: पिछले रिकॉर्ड्स के आधार पर तस्करी में लिप्त रहे पुराने अपराधियों से पूछताछ की जा रही है।
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ग्रामीण इंटेलिजेंस: सीमावर्ती गांवों के ‘विलेज डिफेंस कमेटियों’ (VDC) को सक्रिय कर दिया गया है ताकि किसी भी बाहरी व्यक्ति की आवाजाही पर तुरंत सूचना मिल सके।
नशे के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’
श्रीगंगानगर जिला पुलिस अधीक्षक और BSF के डीआईजी ने संयुक्त बयान में कहा है कि सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था को मल्टी-लेयर कर दिया गया है। नशे की यह खेप न केवल युवाओं को बर्बाद करने की साजिश है, बल्कि इसके जरिए होने वाली कमाई (नार्को-टेररिज्म) का इस्तेमाल राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में किए जाने की आशंका है।
सुरक्षा घेरा सख्त:
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सीमा पर एंटी-ड्रोन गन की तैनाती बढ़ाई गई है।
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रात के समय गश्त (Patrolling) के साथ-साथ हाई-टेक थर्मल कैमरों का उपयोग किया जा रहा है।
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नहरों और कच्चे रास्तों पर पुलिस ने नाकाबंदी कड़ी कर दी है।
निष्कर्ष
1 किलो हेरोइन की यह बरामदगी सुरक्षा बलों की मुस्तैदी का प्रमाण है, लेकिन यह इस बात की ओर भी इशारा करती है कि सीमा पार से चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं। श्रीगंगानगर की जनता और सुरक्षा एजेंसियों का तालमेल ही इन ड्रोन हमलों और तस्करी के नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त कर सकता है।
इस कार्रवाई के बाद पूरे सीमावर्ती क्षेत्र में हाई अलर्ट जारी है और संदिग्ध ठिकानों पर छापेमारी जारी है।