
1. प्रस्तावना: कृत्रिम हृदय की नई पीढ़ी
दशकों से वैज्ञानिक एक ऐसे कृत्रिम हृदय के निर्माण में जुटे थे जो मानव शरीर के भीतर बिना किसी खराबी के सालों-साल धड़क सके। पुराने कृत्रिम हृदय मॉडल्स में अक्सर यांत्रिक टूट-फूट (Mechanical wear and tear) और रक्त के थक्के जमने की समस्या आती थी। लेकिन BiVACOR तकनीक ने इन सभी बाधाओं को पार कर लिया है। यह उपकरण अब नैदानिक परीक्षणों (Clinical Trials) के उस निर्णायक चरण में है, जहाँ इसे मनुष्यों के लिए एक स्थायी समाधान माना जा रहा है।
2. मैग्लेव (MagLev) तकनीक: बिना धड़कन वाला हृदय
इस नई सफलता का मुख्य आधार चुंबकीय उत्तोलन (Magnetic Levitation) है।
-
घर्षण रहित पंपिंग: पारंपरिक पंपों के विपरीत, इसमें कोई वाल्व या धड़कने वाला डायफ्राम नहीं होता। इसके बजाय, एक छोटा रोटर चुंबकीय क्षेत्र में तैरता (Levitate) रहता है।
-
शून्य टूट-फूट: चूंकि रोटर किसी भी सतह को नहीं छूता, इसलिए इसमें यांत्रिक घर्षण नहीं होता। इससे उपकरण की उम्र कई गुना बढ़ जाती है।
-
निरंतर प्रवाह: दिलचस्प बात यह है कि यह हृदय ‘धड़कता’ नहीं है, बल्कि शरीर में रक्त का एक निरंतर प्रवाह (Continuous Flow) बनाए रखता है।
3. BiVACOR: छोटा, शक्तिशाली और टिकाऊ
BiVACOR कृत्रिम हृदय आकार में एक मुट्ठी से भी छोटा है, जो इसे छोटे कद के वयस्कों और यहाँ तक कि किशोरों के लिए भी उपयुक्त बनाता है।
-
अनुकूलन क्षमता: यह तकनीक मरीज की शारीरिक गतिविधि के अनुसार अपने आउटपुट को बदल सकती है। यदि मरीज दौड़ रहा है, तो यह तेजी से रक्त पंप करेगा, और सोते समय यह प्रवाह को धीमा कर देगा।
-
सामग्री: इसे टाइटेनियम जैसी अत्यधिक टिकाऊ धातुओं से बनाया गया है, जिससे शरीर द्वारा इसे ‘अस्वीकार’ (Rejection) करने की संभावना न के बराबर होती है।
4. अंग प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा सूची का अंत
विश्व स्तर पर लाखों लोग ‘हार्ट फेलियर’ के अंतिम चरण में हैं और अंग प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा सूची में रहते हुए दम तोड़ देते हैं।
-
ब्रिज टू ट्रांसप्लांट: वर्तमान में, इसका उपयोग उन मरीजों के लिए एक ‘पुल’ (Bridge) के रूप में किया जा रहा है जो डोनर मिलने का इंतजार कर रहे हैं।
-
गंतव्य चिकित्सा (Destination Therapy): वैज्ञानिकों का लक्ष्य है कि आने वाले समय में इसे एक स्थायी विकल्प बनाया जाए, ताकि मरीज को कभी भी प्राकृतिक हृदय की आवश्यकता ही न पड़े।
5. नैदानिक परीक्षण और भविष्य की राह
6 मार्च 2026 तक की रिपोर्टों के अनुसार, जिन मरीजों में यह उपकरण लगाया गया है, उनमें संक्रमण और थ्रोम्बोसिस (खून के थक्के) की दर में रिकॉर्ड कमी देखी गई है। कार्डियक इंजीनियर अब इसके बाहरी पावर स्रोत (Battery Pack) को और छोटा करने और भविष्य में इसे ‘वायरलेस चार्जिंग’ तकनीक से जोड़ने पर काम कर रहे हैं।
निष्कर्ष
‘टोटल आर्टिफिशियल हार्ट’ का सफल होना केवल एक तकनीकी उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह उन परिवारों के लिए आशा की एक नई किरण है जो एक ‘मददगार धड़कन’ के इंतजार में वर्षों बिता देते हैं। BiVACOR और मैग्लेव तकनीक ने साबित कर दिया है कि इंजीनियरिंग और चिकित्सा के मिलन से मौत को भी कुछ समय के लिए टाला जा सकता है।