
. प्रस्तावना: कैंसर के खिलाफ एक निर्णायक जंग
भारत ने सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए सर्वाइकल कैंसर उन्मूलन के लिए कमर कस ली है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने हाल ही में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर भारत के “90-70-90” लक्ष्य को दोहराया। इसका अर्थ है 90% लड़कियों का टीकाकरण, 70% महिलाओं की स्क्रीनिंग और 90% संक्रमित महिलाओं का समय पर उपचार। 28 फरवरी 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किया गया HPV (ह्यूमन पैपिलोमा वायरस) टीकाकरण अभियान अब देश के कोने-कोने में पहुँच रहा है।
2. राष्ट्रव्यापी HPV टीकाकरण अभियान की मुख्य विशेषताएं
यह अभियान केवल एक चिकित्सा प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक सामाजिक निवेश है।
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लक्ष्य समूह: इस चरण में सरकार का लक्ष्य 9 से 14 वर्ष की आयु की लगभग 1.2 करोड़ किशोरियों को कवर करना है। विशेषज्ञों के अनुसार, कम उम्र में टीका लगाना वायरस के खिलाफ सबसे प्रभावी सुरक्षा प्रदान करता है।
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निःशुल्क सुविधा: निजी अस्पतालों में हजारों रुपये में मिलने वाला यह टीका अब सरकारी स्कूलों और स्वास्थ्य केंद्रों पर पूरी तरह मुफ्त उपलब्ध कराया जा रहा है।
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स्वदेशी तकनीक: भारत की अपनी ‘सर्वावैक’ (Cervavac) वैक्सीन के उत्पादन ने इस अभियान को किफायती और सुलभ बनाने में बड़ी भूमिका निभाई है।
3. सर्वाइकल कैंसर: जोखिम और निवारण
सर्वाइकल कैंसर मुख्य रूप से ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV) के संक्रमण के कारण होता है। भारत में हर साल हजारों महिलाएं इस बीमारी के कारण अपनी जान गंवाती हैं, जिसका मुख्य कारण जागरूकता की कमी और देर से जांच होना है।
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निवारण ही उपचार है: यह दुनिया के उन चुनिंदा कैंसरों में से एक है जिसे टीके के जरिए लगभग पूरी तरह रोका जा सकता है।
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स्क्रीनिंग का महत्व: टीकाकरण के साथ-साथ, सरकार 30 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं के लिए ‘पैप स्मीयर’ (Pap Smear) और HPV DNA टेस्ट की सुविधा भी बढ़ा रही है ताकि शुरुआती संकेतों को पकड़ा जा सके।
4. चुनौतियां और जन-जागरूकता
किसी भी बड़े टीकाकरण अभियान की तरह, यहाँ भी अफवाहें और झिझक एक बड़ी चुनौती है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने ‘आशा’ कार्यकर्ताओं और स्कूलों के माध्यम से अभिभावकों को शिक्षित करने का कार्यक्रम शुरू किया है। मंत्रियों और डॉक्टरों का स्पष्ट संदेश है कि यह टीका पूरी तरह सुरक्षित है और भविष्य में एक स्वस्थ पीढ़ी के निर्माण के लिए आवश्यक है।
5. वैश्विक मंच पर भारत की भूमिका
WHO ने भारत के इस विशाल अभियान की सराहना की है। भारत न केवल अपनी आबादी को सुरक्षित कर रहा है, बल्कि ‘वैक्सीन मैत्री’ के तहत कम आय वाले देशों को भी किफायती HPV टीके उपलब्ध कराने की क्षमता रखता है। स्वास्थ्य मंत्री के अनुसार, भारत 2030 तक सर्वाइकल कैंसर के मामलों में भारी गिरावट लाने के वैश्विक लक्ष्य की ओर मजबूती से बढ़ रहा है।
निष्कर्ष
सर्वाइकल कैंसर के खिलाफ यह महा-अभियान केवल आंकड़ों का खेल नहीं है, बल्कि यह उन करोड़ों माताओं, बहनों और बेटियों के जीवन की सुरक्षा का वादा है जो राष्ट्र की रीढ़ हैं। यदि हम 1.2 करोड़ किशोरियों के टीकाकरण का लक्ष्य हासिल कर लेते हैं, तो हम आने वाले दशकों में इस जानलेवा बीमारी को इतिहास के पन्नों तक सीमित कर देंगे।