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यूपी स्वास्थ्य विभाग की चेतावनी: बदलते मौसम में बच्चों पर ‘दोहरी मार’, निमोनिया और डायरिया से बचाव के लिए एडवाइजरी जारी

लखनऊ, 

उत्तर प्रदेश समेत पूरे उत्तर भारत में मार्च महीने की शुरुआत के साथ ही मौसम के मिजाज में बड़ा बदलाव देखा जा रहा है। दिन में तेज धूप और रात में हल्की ठंडक के कारण ‘तापमान के उतार-चढ़ाव’ (Temperature Fluctuation) ने बच्चों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालना शुरू कर दिया है। आज 5 मार्च को उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य विभाग ने राज्य के सभी जिला अस्पतालों और मुख्य चिकित्सा अधिकारियों (CMOs) को सतर्क करते हुए एक विशेष स्वास्थ्य एडवाइजरी जारी की है।


बीमारियों का बढ़ता ग्राफ: निमोनिया और डायरिया का खतरा

पिछले एक सप्ताह में लखनऊ, कानपुर, वाराणसी और मेरठ जैसे बड़े शहरों के बाल रोग विभागों (Pediatric Departments) में मरीजों की संख्या में 30-40% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में विशेष रूप से दो बीमारियां प्रमुखता से देखी जा रही हैं:

  1. निमोनिया (Pneumonia): रात और सुबह की ठंडी हवाओं के संपर्क में आने से बच्चों के फेफड़ों में संक्रमण हो रहा है। तेज बुखार, सांस लेने में तकलीफ और पसलियों का चलना इसके मुख्य लक्षण हैं।

  2. डायरिया (Diarrhea): बढ़ती गर्मी के कारण खान-पान में गड़बड़ी और दूषित जल के सेवन से बच्चों में दस्त और डिहाइड्रेशन की समस्या बढ़ रही है।

स्वास्थ्य विभाग की मुख्य एडवाइजरी: अभिभावकों के लिए दिशा-निर्देश

स्वास्थ्य महानिदेशालय ने अभिभावकों से अपील की है कि वे इस ‘संक्रमण काल’ में ढिलाई न बरतें। एडवाइजरी में निम्नलिखित बिंदुओं पर जोर दिया गया है:

  • पहनावे पर ध्यान दें: दिन में गर्मी महसूस होने पर बच्चों के गर्म कपड़े पूरी तरह न उतारें। सुबह और शाम को बच्चों को पूरी बाजू के सूती या हल्के गर्म कपड़े पहनाकर रखें।

  • खान-पान की शुद्धता: बाहर के कटे हुए फल, जूस या खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थों से परहेज करें। बच्चों को हमेशा ताजा बना हुआ और हल्का गर्म भोजन ही दें।

  • स्वच्छता (Hygiene): बच्चों के हाथ बार-बार साबुन से धुलवाएं। बोतल से दूध पीने वाले बच्चों के मामले में बोतलों के स्टरलाइजेशन (Stelilization) पर विशेष ध्यान दें।

  • ओआरएस (ORS) का प्रयोग: यदि बच्चे को दस्त की शिकायत हो, तो तुरंत ओआरएस का घोल देना शुरू करें ताकि शरीर में पानी की कमी न हो।


टीकाकरण और शीघ्र उपचार

डॉक्टरों का कहना है कि निमोनिया से बचाव के लिए पीसीवी (PCV) वैक्सीन और डायरिया से बचाव के लिए रोटावायरस वैक्सीन अत्यंत प्रभावी हैं। यदि किसी बच्चे का टीकाकरण छूटा हुआ है, तो उसे तुरंत पूरा करवाएं। स्वास्थ्य विभाग ने सरकारी अस्पतालों को निर्देश दिए हैं कि वे दवाओं का पर्याप्त स्टॉक रखें और बाल रोग विशेषज्ञों की उपलब्धता सुनिश्चित करें।

खतरे के संकेत: कब भागें डॉक्टर के पास?

एडवाइजरी में कुछ ‘डेंजर साइन्स’ (Danger Signs) बताए गए हैं, जिन्हें नजरअंदाज करना जानलेवा हो सकता है:

  • यदि बच्चा सुस्त पड़ जाए या दूध पीना छोड़ दे।

  • यदि सांस लेते समय बच्चे के गले या पेट से आवाज आए।

  • यदि दस्त के साथ खून आए या बच्चा लगातार उल्टी करे।

  • यदि बुखार 102°F से ऊपर चला जाए।

निष्कर्ष

5 मार्च की यह एडवाइजरी केवल एक चेतावनी नहीं, बल्कि सुरक्षा कवच है। उत्तर प्रदेश सरकार ‘मिशन निरामया’ के तहत हर बच्चे तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुँचाने का प्रयास कर रही है। बदलते मौसम की इस चुनौती से निपटने के लिए जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार है। अभिभावकों को सलाह दी गई है कि वे नीम-हकीमों के चक्कर में पड़ने के बजाय तुरंत निकटतम प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) पर संपर्क करें।

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