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बर्मिंघम में लक्ष्य का ‘लक्ष्य’: क्वार्टर फाइनल में प्रवेश कर रचा इतिहास, क्या दोहरा पाएंगे 2001 की यादें?

बर्मिंघम,\

भारतीय बैडमिंटन के ‘पोस्टर बॉय’ लक्ष्य सेन ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वे बड़े मंच के खिलाड़ी हैं। दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित बैडमिंटन टूर्नामेंट ‘ऑल इंग्लैंड ओपन बैडमिंटन चैंपियनशिप 2026’ में लक्ष्य सेन ने अपना विजय अभियान जारी रखते हुए पुरुष एकल के क्वार्टर फाइनल में जगह पक्की कर ली है। आज खेले गए प्री-क्वार्टर फाइनल के एक हाई-वोल्टेज मुकाबले में उन्होंने हांगकांग के अनुभवी खिलाड़ी एनजी का लॉन्ग एंगस को तीन गेम तक चले संघर्षपूर्ण मैच में हराकर तिरंगा बुलंद किया।


मैच का लेखा-जोखा: उतार-चढ़ाव भरा रोमांच

बर्मिंघम के यूटिलिटा एरिना में खेले गए इस मुकाबले में दर्शकों को विश्व स्तरीय बैडमिंटन देखने को मिला। लक्ष्य ने मैच की शुरुआत आक्रामक अंदाज में की, लेकिन विपक्षी खिलाड़ी ने भी कड़ी चुनौती पेश की।

  • पहला गेम (21-19): लक्ष्य ने शुरुआत से ही नेट पर नियंत्रण बनाए रखा। एंगस के तेज स्मैश का जवाब लक्ष्य ने शानदार डिफेंस से दिया। स्कोर एक समय 18-18 से बराबर था, लेकिन लक्ष्य ने धैर्य बनाए रखा और लगातार दो अंक जीतकर पहला गेम अपने नाम किया।

  • दूसरा गेम (21-23): दूसरे गेम में हांगकांग के खिलाड़ी ने वापसी की। लंबी रैलियों और चतुराई भरे ड्रॉप शॉट्स के कारण लक्ष्य थोड़े थके हुए नजर आए। हालांकि उन्होंने मैच पॉइंट बचाया, लेकिन अंततः एंगस ने यह गेम जीतकर मुकाबले को निर्णायक तीसरे गेम में धकेल दिया।

  • तीसरा गेम (21-10): निर्णायक गेम में लक्ष्य सेन ने अपनी फिटनेस और मानसिक मजबूती का लोहा मनवाया। उन्होंने शुरुआत में ही 11-3 की बढ़त बना ली। थकान के बावजूद लक्ष्य के कोर्ट कवरेज ने एंगस को बेबस कर दिया और उन्होंने यह गेम एकतरफा अंदाज में जीतकर मैच अपने नाम कर लिया।

मौजूदा चैंपियन को हराकर बढ़ाया मनोबल

लक्ष्य सेन की यह जीत इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि उन्होंने इससे पिछले दौर (राउंड ऑफ 32) में एक बड़ा उलटफेर किया था। उन्होंने चीन के दिग्गज और मौजूदा ऑल इंग्लैंड चैंपियन शी यू क्यूई को सीधे सेटों में बाहर का रास्ता दिखाया था। चैंपियन को हराने के बाद मिली इस दूसरी जीत ने लक्ष्य को अब खिताब का प्रबल दावेदार बना दिया है।


प्रकाश पादुकोण और पुलेला गोपीचंद की विरासत

भारत के लिए ‘ऑल इंग्लैंड ओपन’ का खिताब जीतना किसी सपने जैसा रहा है। अब तक केवल दो भारतीय दिग्गज ही इस शिखर तक पहुँच पाए हैं— 1980 में प्रकाश पादुकोण और 2001 में पुलेला गोपीचंद। लक्ष्य सेन 2022 में इस टूर्नामेंट के फाइनल तक पहुँचे थे, लेकिन तब उन्हें उपविजेता बनकर संतोष करना पड़ा था। 2026 में उनकी वर्तमान फॉर्म को देखते हुए भारतीय फैंस को उम्मीद है कि 25 साल का सूखा अब खत्म होगा।

क्वार्टर फाइनल की चुनौती

क्वार्टर फाइनल में लक्ष्य का सामना अब डेनमार्क के विक्टर एक्सेलसन या इंडोनेशिया के जोनाथन क्रिस्टी के बीच होने वाले मैच के विजेता से होगा। लक्ष्य की सबसे बड़ी ताकत उनका ‘लो-डिफेंस’ और नेट प्ले है। उनके कोच (विमल कुमार) का मानना है कि यदि लक्ष्य इसी गति और सटीकता के साथ खेलते रहे, तो वे दुनिया के किसी भी खिलाड़ी को हराने की क्षमता रखते हैं।


भारतीय बैडमिंटन के लिए बड़ा दिन

लक्ष्य सेन की जीत ने भारतीय दल में नया उत्साह भर दिया है। पीवी सिंधु और सात्विक-चिराग की जोड़ी के बाहर होने के बाद, अब पदक की पूरी उम्मीदें लक्ष्य के कंधों पर टिकी हैं। भारतीय खेल प्रेमियों की नजरें अब कल होने वाले क्वार्टर फाइनल मुकाबले पर हैं, जहाँ लक्ष्य सेमीफाइनल का टिकट कटाने के इरादे से कोर्ट पर उतरेंगे।

निष्कर्ष

5 मार्च की यह जीत केवल एक मैच की जीत नहीं है, बल्कि यह लक्ष्य सेन के उस कड़े परिश्रम का परिणाम है जो उन्होंने चोटों से उबरने के बाद किया है। बर्मिंघम की ठंडी हवाओं के बीच लक्ष्य का यह ‘हॉट फॉर्म’ भारतीय बैडमिंटन के स्वर्णिम भविष्य की गवाही दे रहा है।

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