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पर्यावरण पर प्रहार: रावला मंडी में अवैध पेड़ कटाई मामले में गाज, दो वनकर्मी तत्काल प्रभाव से निलंबित

प्रकरण का परिचय: हरे पेड़ों पर कुल्हाड़ी

राजस्थान के सीमावर्ती जिले श्रीगंगानगर के रावला मंडी क्षेत्र में पिछले कुछ दिनों से पर्यावरण प्रेमियों और स्थानीय निवासियों में भारी रोष व्याप्त था। मामला सरकारी भूमि और संरक्षित वन क्षेत्रों से हरे पेड़ों की अवैध कटाई से जुड़ा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि वन माफिया ने प्रशासन की नाक के नीचे सैकड़ों बेशकीमती और हरे-भरे पेड़ों को काटकर ठिकाने लगा दिया। इस घटना ने न केवल क्षेत्र के पारिस्थितिक संतुलन को बिगाड़ा है, बल्कि सरकारी तंत्र की सतर्कता पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

प्रशासनिक कार्रवाई और निलंबन

जैसे ही अवैध कटाई की खबर फैली, रावला मंडी के ग्रामीणों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने एकजुट होकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। ग्रामीणों का कहना था कि बिना विभागीय मिलीभगत के इतने बड़े स्तर पर पेड़ों की कटाई और लकड़ी का परिवहन संभव नहीं है।

बढ़ते जन आक्रोश और पुख्ता सबूतों को देखते हुए, वन विभाग के उच्चाधिकारियों ने इस मामले को गंभीरता से लिया। प्राथमिक जांच में ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों की लापरवाही और संदिग्ध भूमिका सामने आने के बाद दो वनकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। विभाग का यह सख्त कदम अन्य कर्मचारियों के लिए एक कड़ा संदेश है कि प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

विरोध प्रदर्शन का असर

इस कार्रवाई के पीछे स्थानीय समुदाय की सजगता का बड़ा हाथ रहा। ग्रामीणों ने न केवल धरना दिया, बल्कि उच्च अधिकारियों को मौके की तस्वीरें और वीडियो भी उपलब्ध कराए। लोगों का तर्क था कि जहां एक ओर सरकार वृक्षारोपण के लिए करोड़ों खर्च कर रही है, वहीं दूसरी ओर विभाग के ही कुछ लोग रक्षक की जगह भक्षक की भूमिका निभा रहे हैं। प्रशासन ने इस दबाव को भांपते हुए निष्पक्ष जांच का भरोसा दिया, जिसके बाद निलंबन की कार्रवाई अमल में लाई गई।

जांच का दायरा और आगामी कदम

निलंबन केवल शुरुआत है; प्रशासन ने अब इस पूरे ‘लकड़ी सिंडिकेट’ की जड़ तक जाने के लिए एक विशेष जांच दल का गठन किया है। जांच के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

  • मिलीभगत की गहराई: क्या इन दो वनकर्मियों के अलावा विभाग के कुछ उच्च अधिकारी भी इस खेल में शामिल थे?

  • लकड़ी की बरामदगी: काटी गई लकड़ी को किन आरा मशीनों या तस्करों को बेचा गया है?

  • नुकसान का आकलन: कुल कितने पेड़ों को काटा गया और उससे पर्यावरण को कितनी क्षति हुई?

“पेड़ हमारी धरोहर हैं। अवैध कटाई के खिलाफ यह कार्रवाई केवल शुरुआत है। दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा और हम यह सुनिश्चित करेंगे कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।”वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी

निष्कर्ष

रावला मंडी की यह घटना यह दर्शाती है कि यदि जनता जागरूक हो, तो तंत्र को जवाबदेह बनाया जा सकता है। दो वनकर्मियों का निलंबन न्याय की दिशा में पहला कदम है, लेकिन क्षेत्र के लोगों की मांग है कि अवैध कटाई से हुए नुकसान की भरपाई के लिए वहां नए सिरे से सघन वृक्षारोपण किया जाए और माफियाओं के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।

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